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अगले साल हो सकते हैं मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव?, नगरीय प्रशासन मंत्री बोले- 6 महीने में चुनाव होना मुश्किल, प्रक्रिया पूरी होते ही कराएंगे

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह।

भोपाल। मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव अगले साल जनवरी के बाद हो सकते हैं। इसे लेकर बुधवार को सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कानूनी विषयों और कोरोना के चलते राज्य में फिलहाल आगामी 6 महीने तक चुनाव होना मुश्किल है। कानूनी समेत अन्य प्रक्रियाएं पूरी होते ही चुनाव कराएंगे। इधर, मंत्री के बयान से एक दिन पहले ही जबलपुर हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव को लेकर फिलहाल तैयारी नहीं होने की बात कही थी। इससे भी साफ हो गया था, फिलहाल चुनाव नहीं होंगे। मंत्री सिंह ने इस पर मुहर लगा दी।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने भी कोर्ट में कोरोना के कारण अभी चुनाव कराने में असमर्थता जताई है। आरक्षण के विषय पर भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला बाकी है। वहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट में आरक्षण को लेकर स्टे दिया हुआ है। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। अभी न तो सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्णय आया है और न ही तय हुआ कि आरक्षण रोटेशन के आधार पर होगा या फिर पूर्व की तरह जनसंख्या के आधार पर होगा। यदि आरक्षण रोटेशन के आधार पर होता है, तो हमें पहले एक्ट बनाना पड़ेगा। फिर से आरक्षण प्रक्रिया नए सिरे से करना पड़ेगी। इसमें कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। कोरोना व कानूनी पक्ष को देखते हुए 6 महीने तक चुनाव होने की संभावना नहीं है।

347 नगरीय निकायों में होंगे चुनाव-
प्रदेश में कुल 407 नगरीय निकाय हैं। इनमें से 347 में आम निर्वाचन कराए जाना है। दो चरण में मतदान होगा। प्रथम चरण में 155 और दूसरे चरण में 192 नगरीय निकायों में मतदान कराया जाएगा। महापौर/अध्यक्ष का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इन 347 नगरीय निकायों में सभी 16 नगर निगम शामिल हैं। बता दें, अभी 60 नगरीय निकायों का कार्यकाल बाकी है।

इधर, सरकार ने एक दिन पहले ही कोर्ट में दिया था जवाब-
एक दिन पहले जबलपुर हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि सीमांकन, आरक्षण और महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कराने को लेकर कई याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। आयोग तीसरी लहर के आकलन और राज्य सरकार की सहमति के बाद ही चुनाव कराएगा। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस जवाब के साथ ही इस मामले में दायर की गई याचिका को निराकरण कर दिया था।

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