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उपभोक्तावाद की चमक ने प्रभावित की खजुराहो की छवि, असीम ऊर्जा के केंद्र हैं खजुराहो के मंदिर: विनम्र सागर महाराज

छतरपुर। प्राचीन काल में खजुराहो ऋषियों की नगरी रही है। यहां के इलेक्ट्रो मैगनेटिक के हर बेस्ट प्वाइंट में एक मंदिर बना हुआ है। वर्तमान के उपभोक्तावाद में ऋषियों की नगरी खजुराहो की छवि को प्रभावित कर दिया गया है। यहां आने वाले पश्चिमी सभ्यता के लोगों को खजुराहो की स्थापत्य कला की गलत जानकारी परोसी गई है। खजुराहो की मूल ऊर्जा की पहचान को अलग तरीके से प्रस्तुत कर दिया गया है जबकि खजुराहो के हरेक देव मंदिर असीम ऊर्जा के केंद्र हैं।

यह विचार प्रख्यात जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावी शिष्य विनम्र सागर महाराज ने स्वर्णोदय तीर्थ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खजुराहो में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पर्यटन नगरी खजुराहो में भारतीय संस्कृति की वैदिक परंपरा के मंदिर हैं किंतु दुर्भागय है कि यूनेस्को और वल्र्ड हेरिटेज की कमेटियों ने ऐसी चाल चली कि पश्चिमी देशों से आने वाले ऐसे लोग जिनका जीवन शारीरिक आकर्षण और वासना की दृष्टि का रहता है उनके सामने खजुराहो की छवि को अलग पहचान दे दी गई है।

कोई भी व्यक्ति खजुराहो के मंदिरों के बाहरी आवरण को देखकर लौट जाता है जबकि मंदिरों के गर्भगृहों में बैठे देवताओं के महत्व को समझने का प्रयास नहीं करता है। मुनिश्री विनम्र सागर महाराज ने कहा कि खजुराहो में चार ऐसे मंदिर हैं जिनके अंदर बैठकर भगवान शिव, विष्णु, आदिनाथ भगवान का यदि कोई व्यक्ति ध्यान करता है तो उसकी एनर्जी का लेबल 400 तक पहुंच जाता है जबकि मंदिरों के बाहर वही एनर्जी लेबल 180 तक रहता है। खजुराहो के मंदिरों के इस गूढ़ रहस्य को कोई गाइड भी बताने का प्रयास नहीं करता है।  

खजुराहो में अक्षय तृतीया पर कार्यक्रम आज-
पर्यटन स्थल खजुराहो के दिगंबर जैन अतिशय स्वर्णोदय तीर्थ क्षेत्र में अक्षय तृतीया पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। महान संत आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावी शिष्य एवं लघुरूप आचार्य मुनिश्री विनम्र सागर महाराज, मुनि निसर्ग सागर महाराज, निस्वार्थ सागर महाराज, निर्मद सागर महाराज, भ्रमण सागर महाराज की मौजूदगी में अक्षय तृतीया के दिन सुबह भगवान आदिनाथ का मस्तकाभिषेक, विश्व कल्याण की कामना को लेकर मंत्रोच्चार के साथ वृहद शांतिधारा, भक्तांबर श्रोत, गुरूदेव पूजन के साथ ही शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में जैन समुदाय के अलावा विभिन्न समाजों के लोग शामिल होंगे।

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