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एक चेतनावान गुरू क़ा सानिध्य बार-बार प्राप्त नही होता है, ऐसे महान ऋषिवर को पाकर भी हम लोग सन्तुलित और अनुशासित जीवन ना जी सकें तो हमें अपना पुनर्मुल्याँकन करने की बहुत बड़ी आवश्यकता है

डेस्क न्यूज। वर्तमान समय में पूरे विश्व की स्थिति चिंताजनक है। कलिकाल (कलयुग) अपने चरम पर है। प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी समस्या से ग्रस्त है। झूठ, फरेब, धोखा, बनावटी जीवन आदि क़ा बोलबाला है।लोग भौतिकवाद के पीछे इस कदर भाग रहे हैं की उन्हें स्वयँ के जीवन की सुध नही है। अधिकाँश व्यक्ति संघर्ष क़ा जीवन जी रहे हैं। ऐसे समय में निराशा को आशा में परिवर्तित करने के लिए एक प्रकाश पुंज के रूप में गुरुदेव जी श्री शक्ति पुत्र महाराज जी क़ा इस धरा पर अवतरण हुआ है। इस संसार में लाखों गुरुओं क़ा आगमन हुआ परन्तु ज्यादातर लोग सीमित दायरे में ही कार्य करके रह गए। कुछ लोगों ने अपने आश्रम क़ा, अपने कुछ शिष्यों क़ा और अपने परिवार और रिश्तेदार के ही कल्याण तक सीमित दायरा रखा।

किसी ने भी सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के बारे में गम्भीरता से विचार नही किया। गुरुदेव जी ने समाज को माँ दुर्गा जी की साधना आराधना प्रदान करके सम्पूर्ण मानवता के कल्याण क़ा मार्ग प्रशस्त किया है। आजकल के लोग गुरुओं से सिर्फ धन धान्य आदि भौतिकवाद की चीजों को प्राप्त करना चाहते हैं। एक सच्चे गुरू हमारे सोई हुई चेतना को जागृत करने क़ा कार्य करते हैं। गुरुदेव श्री क़ा प्रमुख उद्देश्य हम सबकी आत्मा को बन्धनमुक्त कराना है। आत्मा पर पड़े हुए आवरण को हटाने क़ा मार्ग प्रदान करना ही गुरुदेव जी की प्रथम प्राथमिकता है। जब हमारी आपकी आत्मा विकार रहित होगी तभी हमारा कल्याण सम्भव हो पाएगा। आत्मा से परमात्मा (माँ दुर्गा जी) क़ा मिलन कराने के लिए ही तो गुरुवर श्री क़ा अवतार हुआ है। हम लोग आज भटकाव क़ा जीवन जी रहे हैं। हमारे कार्य क़ा फोकस एरिया कहीं और है। वासना के वशीभूत होकर तमाम लोग जीवन जी रहे हैं।गुरुदेव जी के बताए हुए मार्ग क़ा जो व्यक्ति अक्षरशःपालन करेगा उस व्यक्ति को जीवन जीने की दिशा मिल जाएगी और जीवन के तमाम झंझावातों से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा।

आत्मा के गूढ़ रहस्यों की जो जानकारी गुरुवर श्री के पास है वो दुनियाँ के किसी भी धर्मज्ञ के पास नही है।आज तक हम लोगों ने तमाम स्थूल की वस्तुओं को प्राप्त करने के पीछे ही अपना बहुमूल्य समय गवाँया है।गुरुदेव जी के द्वारा बताए हुए सूक्ष्म के मार्ग क़ा पालन करने से जीवन में आनन्द क़ा प्रादुर्भाव हो जाता है। गुरुदेव जी की विचारधारा से जन-जन को जोड़ना अत्यन्त आवश्यक है।माँ जगदम्बे की नियमित साधना द्वारा ही हमारा कल्याण सम्भव है। जिस प्रकार से पेड़ के पत्तों और डालियों पर पानी डालने से पेड़ क़ा विकास नही होता ,जब पेड़ की जड़ में पानी देंगे तभी पेड़ क़ा विकास होगा। उसी प्रकार तमाम भटकावों से ध्यान हटाकर गुरुदेव जी द्वारा प्रदत्त मार्ग के पालन करने से ही हमें सफलता प्राप्त होगी। आज साकार रूप में गुरुदेव जी हमारे कल्याण के लिए ही अनवरत साधना रत हैं। ऐसे में हम सभी का प्रथम कर्तव्य है की संगठन के समस्त जन कल्याणकारी कार्यों में बढ़ चढ़ कर सम्मिलित हों।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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