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कौन होगा अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष?, प्रयागराज पहुंचे 7 अखाड़ों के पदाधिकारी, रवींद्र पुरी पहले ही हो चुके हैं बागी

पंच परमेश्वर के इसी हॉल में परिषद अध्यक्ष का चुनाव होगा

प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद पर सोमवार को प्रयागराज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में चुनाव होगा। अखाड़ों में आपसी खींचतान और विद्रोह के बीच यह चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है।

7 अखाड़ों के समर्थन के साथ हरिद्वार में 19 अक्टूबर को अपने आपको अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित कर महानिर्वाणी अखाड़े के रवींद्र पुरी पहले ही बागी बन चुके हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने उन्हें मान्यता ही नहीं दी है। ऐसे में आज 11 बजे होने वाले चुनाव में श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी के अध्यक्ष पद के समर्थन में कितने अखाड़े खड़े हैं। यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, रवींद्र पुरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने साथ 7 अखाड़ों के होने और बहुमत होने का दावा किया है।

नरेंद्र गिरि की मौत के बाद बलवीर गिरि को श्री मठ बाघंबरी गद्दी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

19 अक्टूबर को हरिद्वार में 7 अखाड़े कर चुके हैं चुनाव-
बता दें, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने हरिद्वार में हुए चुनाव को ही अवैध घोषित कर दिया। उनका चुनाव पर बयान आया कि परिषद की बैठक बुलाने का पावर महामंत्री को है। ऐसे में हमने 25 अक्टूबर यानी आज प्रयागराज के पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में सभी अखाड़ों की बैठक बुलाई है।
अगर निर्वाणी अखाड़े के पास बहुमत है तो बैठक में आकर साबित करें। यह चुनाव अवैध है। फिलहाल नई कार्यकारिणी में दामोदर दास महाराज को उपाध्यक्ष, निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष राजेंद्र दास महाराज को महामंत्री, जसविंदर सिंह शास्त्री को कोषाध्यक्ष, राम किशोर दास महाराज को मंत्री, गौरीशंकर दास महाराज को प्रवक्ता और धर्मदास महाराज और महेश्वर दास को संरक्षक बनाया गया है।

दारागंज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में सोमवार की सुबह 11 बजे से अध्यक्ष पद का चुनाव होगा।

आखिर अध्यक्ष पद को लेकर क्यों मचा है घमासान?-
अब सवाल यह उठता है कि साधु- संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर इतना क्यों घमासान मचा है। अध्यक्ष बनने को क्यों कई अखाड़े लालायित हैं।
जब इस मामले की पड़ताल शुरू की तो पता चला कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साधु-संतों और सरकार के बीच महाकुंभ में सेतु का काम करती है।
साधु-संतों की समस्याएं सरकार और प्रशासन के सामने रखती है और उनका निराकरण कराने की कोशिश करती है। ऐसे में सरकार भी अध्यक्ष की बात का वैल्यू रखती है। साधु-संतों की प्रतिनिधि संस्था होने के कारण सरकार भी अध्यक्ष का कहना मानती है। इसके अलावा महाकुंभ में देश-दुनिया से आई मीडिया के केंद्र बिंदु में रहता है।
राजनीति में भी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप रहता है। सभी अखाड़ों का प्रतिनिधि होने के कारण उसका दबदबा रहता है। यही कारण है कि नरेंद्र गिरि जैसे प्रभावशाली संत के संदिग्ध दशा में तौत के बाद अध्यक्ष पद को लेकर परिषद दो फाड़ हो गई है और घमासान मचा है।

7 अखाड़ों के समर्थन का दावा-
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव रवींद्र पुरी ने दैनिक भास्कर से टेलीफोन पर बताया कि प्रयागराज 7 अखाड़े आ चुके हैं। हमें 7 अखाड़ों के समर्थन प्राप्त है। ऐसे में बहुमत मेरे पास है। लोकतांत्रिक और वैध तरीके से अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 13 अखाड़ों को मिलकर बनती है। अप्रैल 2021 में तीन अखाड़े इस परिषद से अपने आपको अलग कर लिए थे। हमसे अलग होने वाले अखाड़ों में श्रीदिगंबर अनी, श्रीनिर्मोही अनी व श्रीनिर्वाणी अनी शामिल हैं।

शेष बचे 10 अखाड़ों में से चुनाव- प्रक्रिया में केवल 7 अखाड़े ही भाग लेंगे। 25 अक्टूबर को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पंच परमेश्वर भवन में सर्वसम्मति से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुनना है। यह चुनाव बहुमत के आधार पर होगा। अगर किसी नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन पाती तो फिर मतदान का प्रावधान रखा गया है।
दो भागों में बंट गई अखाड़ा परिषद
विद्रोह कर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने अपने आपको अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित किया है और अपने साथ-साथ अखाड़ों के समर्थन होने की बात कही है। उससे एक बात तय हो गई है कि अब अखाड़ा परिषद के दो फाड़ हो गए हैं।
अगर निर्माणी अखाड़े के सचिव का दावा सही है, तो फिर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दूसरे धड़े जिसके महामंत्री हरि गिरि जी हैं, उनके पास केवल 7 अखाड़ों का ही समर्थन शेष रह गया है। अगर, इसमें से एक दो अखाड़े और टूट गए तो फिर बहुमत महानिर्वाणी अखाड़ा के पास चला जाएगा।

दो परिषद और अध्यक्ष रहे तो कमजोर होगी संस्था
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि जी महराज से जब पूछा गया कि दो-दो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष रहने पर संस्था पर क्या असर होगा तो उनका कहना था कि भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां लांकतांत्रित तरीके से चुने गए अध्यक्ष की ही परिषद मान्यता देगा।
लोकतांत्रिक तरीका यह था कि आप 25 को आते और अगर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी के पास बहुमत था तो साबित करना था। बिना महामंत्री के बैठक बुलाए अपने को उन्होंने अध्यक्ष घोषित कर लिया यह मान्य नहीं है। इससे परिषद कमजोर होगी।

13 अखाड़ों की है मान्यता-
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में इस समय 13 अखाड़े ही हैं जिनकी मान्यता है। इनमें जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अग्नि, अटल, आह्वान व आनंद संन्यासी अखाड़े माने जाते हैं। वैष्णव अर्थात वैरागियों के अखाड़े दिगंबर अनी, निर्वाणी अनी व निर्मोही अनी हैं, जबकि उदासीन के अखाड़ों में बड़ा उदासीन, नया उदासीन व निर्मल शामिल हैं। यही अखाड़े परिषद का अध्यक्ष चुनते हैं। नरेंद्र गिरि की डेथ के बाद अध्यक्ष पद रिक्त है।

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