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गुप्त नवरात्र मे दतिया के पीतांबरा माता मंदिर में 2 दिन में 22 हजार से अधिक पहुंचे श्रद्धालु, गुप्त नवरात्र में बगलामुखी मां के कर रहे दर्शन

माता बगलामुखी।

मध्यप्रदेश। दतिया शहर में प्रसिद्ध पीतांबरा माता मंदिर, आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जा चुका है। दो दिन के अंदर बगलामुखी माता के दर्शन करने के लिए 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन किए। गुप्त नवरात्र के चलते मंदिर पर श्रद्धालु माता के मंदिर में पूजा-अर्चना व दर्शन के लिए बढ़ी तादाद में पहुंच रहे हैं।

पीतांबरा मंदिर में दर्शन करते हुए श्रद्धालु।

आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्र 11 जुलाई रविवार से शुरू हो चुकी है। यह नवरात्र 18 जुलाई तक चलेगी। हर बार बढ़ी तादाद में नवरात्र के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग समेत दूसरे प्रांतों के श्रद्धालु पीतांबरा मंदिर माता के दर्शन के लिए आते है। वहीं, आषाढ़ मास में देवी-देवता पूजन के लिए खास माना जाता है। ऐसे में हर साल पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालु, मंदिर में ऑनलाइन दर्शन सिस्टम चालू होने की वजह से निराश हो रहे थे। बीते रविवार को प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के निर्देश पर मंदिर प्रबंधन कमेटी द्वारा आम श्रद्धालुओं के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कराए गए हैं। मंदिर के गेट खुलते ही श्रद्धालुओं को तांता लगना शुरू हो गया है।

86 दिन से बंद था मंदिर का मुख्य गेट-
कोविड -19 की दूसरी लहर शुरू होते ही मंदिर में दर्शनों के लिए रोक लगाई गई थी। दूसरी लहर थमने के बाद 19 जून से उत्तर द्वार को खोल दिया गया था और ऑनलाइन सिस्टम के आधार पर श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जा रहा था। इस वजह से बड़ी तादाद में गुप्त नवरात्र में माताके दर्शनों से श्रद्धालु दर्शनों से वंचित थे और वे निराश हो रहे थे। इस वजह से श्रद्धालुओं में आक्रोश पनप रहा था। वहीं, वीआईपी आने पर दर्शन कराया जा रहा था। आम श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पंजीयन कराकर सशर्त दर्शन करने पड़ रहे थे।

मंदिर में साधना के लिए कम आए साधक-
हर वार गुप्त नवरात्र में माता बगलामुखी के साधक, मंदिर परिसर में रहकर बढ़ी तादाद में साधना करने आते थे। इस बार गुप्त नवरात्र के पहले ही दिन से आम श्रद्धालुओं के लिए गेट खोले गए। लंबे समय से दर्शन बंद थे। इसलिए देश के अलग-अलग हिस्सों से साधक नहीं आए। साधकों द्वारा मंदिर प्रबंधन कमेटी से संपर्क किया गया था तब उनसे मंदिर के कपाट बंद रहने की बात कही थी। रविवार को जब कपाट खुले तो स्थानीय साधक ही साधना शुरू कर सके।

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