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छतरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए बजट जारी करे सरकार, विधानसभा में आश्वासन देने के बाद देरी क्यों?, विधायक आलोक चतुर्वेदी ने पत्र लिखकर सरकार से पूछा सवाल

मध्यप्रदेश। छतरपुर जिले के सदर विधायक आलोक चतुर्वेदी पज्जन भैया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग एवं संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पत्र लिखकर छतरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए तत्काल बजट जारी करने की मांग की है।

श्री चतुर्वेदी ने कहा कि एक मार्च को जब छतरपुर मेडिकल कॉलेज के संबंध में मेरे द्वारा विधानसभा में ध्यानाकर्षण लगाया गया था तब सरकार की ओर से मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सदन में आश्वासन दिया था कि अगले माह छतरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए बजट जारी करते हुए निर्माण हेतु नई निविदा निकाली जाएंगी लेकिन सरकार सदन में दिए इस आश्वासन को भूल क्यों रही है।

श्री चतुर्वेदी ने कहा कि छतरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार ने विधानसभा में लगाए गए ध्यानाकर्षण के जवाब में बताया था कि छतरपुर में मेडिकल कॉलेज स्थापना के लिए 10.4. 2018 को तत्कालीन सरकार के द्वारा 300 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य के लिए प्राक्कलन रिपोर्ट तैयार करते हुए 206 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति अनुसार निविदाएं भी आमंत्रित की गई थीं किन्तु निविदा की वित्तीय दर स्वीकृत नहीं होने के कारण पुरानी निविदा निरस्त हो गई थी।

सरकार ने सदन में यह आश्वासन दिया था कि अगले माह पुन: निविदा बुलाने की कार्यवाही की जाएगी और निर्माण कार्य हेतु बजट भी जारी किया जाएगा। लेकिन सरकार विधानसभा में किए इस वादे को भूल गई। तीन महीने बाद भी सरकार ने छतरपुर मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए न तो बजट जारी किया और न ही निविदाएं आमंत्रित कीं। उन्होंने सरकार से जल्द बजट देने की मांग की है।
महामारी में मेडिकल कॉलेज की कमी घातक सिद्ध हुई।

विधायक आलोक चतुर्वेदी ने इस पत्र के माध्यम से सरकार को बताया है कि छतरपुर जिले में मेडिकल कॉलेज न होने के कारण कोरोना महामारी ने सर्वाधिक जानमाल का नुकसान किया है। लोगों को अच्छे इलाज के लिए 100 से 200 किमी दूर जाना पड़ा जिसके चलते कई लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि आबादी के हिसाब से 18 लाख की जनता और आसपास के कई जिलों के मरीजों का भार जिला अस्पताल पर पड़ रहा है।

कोरेाना के दौरान जिला अस्पताल में मौजूद संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी तो वहीं कई गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को संपत्ति बेचकर इलाज कराना पड़ा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की महामारी से तभी बचा जा सकता है जब छतरपुर के पास मेडिकल कॉलेज हो। अत: प्राथमिकता के आधार पर छतरपुर मेडिकल कॉलेज का बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।

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