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जीपी सिंह नहीं पहुंचे कोतवाली: पुलिस ने भेजा था नोटिस, मगर नहीं आए, राजद्रोह मामले में फिर भेजा जा सकता है बुलावा

पिछले दिनों कोतवाली थाने की टीम ने जीपी सिंह के घर की तलाशी लेकर कंप्यूटर लैपटॉप जब्त किए थे।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीनियर IPS निलंबित ADG जीपी सिंह को गुरुवार को रायपुर के कोतवाली थाने पहुंचना था। मगर वो नहीं आए। न ही उनके तरफ से कोई वकील पहुंचा। पुलिस अब एक बार फिर उन्हें नोटिस भेज सकती है। आमतौर पर दो से तीन नोटिस के बाद भी जब कोई थाने नहीं आता तो उसकी धर-पकड़ की प्रक्रिया शुरू होती है। इस मामले में अफसर डिपार्टमेंटल ऑर्डर के हिसाब से काम करेंगे। चूंकि मामला विभाग के ही आला अफसर से जुड़ा है, पुलिस भी ऐसा कोई कदम नहीं उठा रही, जिससे कोई कानूनी दांव उलटा पड़ जाए। अब आगे इस मामले में किस तरह से एक्शन होगा, इसकी रणनीति पुलिस के अफसर लीगल टीम से चर्चा करके तैयार कर रहे हैं।

घर वालों को दी जा चुकी है चेतावनी-
पुलिस इस नोटिस के जरिए जीपी सिंह से सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने, राजनैतिक षड्यंत्र और राजद्रोह के मामले में बयान लेना चाहती है। एफआईआर इन्हीं धाराओं में दर्ज की गई है। नोटिस बुधवार को ही तैयार हो चुकी थी। पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले में कुछ अफसरों ने पहुंचकर नोटिस घर वालों को दिया था। वहां जीपी नहीं मिले। इस वजह से घर में मौजूद परिजन से पुलिस ने कहा था कि वे जीपी सिंह को सूचित करें कि थाने आकर बयान दर्ज करवा दें। पुलिस ने चेतावनी भी थी कि अगर निर्धारित समय पर जीपी सिंह थाने नहीं पहुंचे तो पुलिस तलाश शुरू कर देगी। 1 जुलाई को ACB के छापे में जांच करने गए अफसरों के कुछ ऐसे दस्तावेज मिले थे जिनमें कुछ विधायकों, अफसरों के खिलाफ बातें लिखी थीं। इसी के आधार पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है।

केस दर्ज होने की वजह-
ACB के अफसरों ने बताया कि छापे की खबर लगते ही डायरी और कुछ कागजों को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी। बंगले के पीछे से कागज मिलने की चर्चा थी। जब टीम मौके पर पहुंची तो वह उन तमाम कागज के टुकड़ों को वापस जीपी सिंह के बंगले में लेकर आई। फिर कुछ गवाहों के सामने उन कागजों को जोड़कर पढ़ने की कोशिश की गई। उन पन्नों और डायरियों में कुछ विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ सीक्रेट बातें लिखी थीं। कुछ सरकारी योजनाओं और धार्मिक मामलों के खिलाफ भी बातें इन कागजों पर लिखी गई थी। इन्हें देख कर पहली नजर में यह समझ आया कि कहीं ना कहीं उम्मीदवारों और विधायकों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए यह मुद्दे नोट किए गए होंगे।

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