Home शक्ति न्यूज़ खास जीवन में अगर कोई सिद्धांत नहीं होगा तो जीवन अस्त व्यस्त हो...

जीवन में अगर कोई सिद्धांत नहीं होगा तो जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा, जीवन का मूल सिद्धान्त यही है कि आप जिस अनुपात में अपना भाव माँ गुरुवर के प्रति रखेंगे उसी अनुपात में आपके जीवन क़ा विकास होगा, हमें सदैव अपने कर्मों के प्रति सजग रहना होगा

डेस्क न्यूज। हम लोग कई बार अपने मन में सोचते हैं कि हमें बहुत आगे बढ़ जाना चाहिए और जीवन की तमाम परेशानियाँ हमें ही क्यूँ हैं,पर ऐसा सोचते समय हम अपने कर्म को अनदेखा कर देते हैं। सिर्फ सोचने से या परेशान होने से हमारा जीवन सुखमय नहीं हो पाएगा। अच्छे जीवन के लिए अच्छा कर्म भी होना चाहिए। प्रत्येक कार्यों को करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए कि य़े करूँ या ना करूँ।

अभी अभी क़ा एक ज्वलन्त उदाहरण लेते हैं कि हम सभी लोगों को शिविर में जाना ही जाना है परन्तु कुछ लोग सर्दी का बहाना बना रहें हैं और कुछ लोग आजकल फैली हुई महामारी का बहाना बना रहें हैं। देखिए अगर किसी क्षेत्र में सब कुछ प्रतिबंधित है तो समझ में आता है पर यातायात के साधन उपलब्ध हैं और हम सुरक्षित होकर यात्रा कर सकते हैं तो जाने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। माँ गुरुवर के प्रति जितना प्रबल भाव होगा उतना ही प्रबल हमें अनुकूलता प्राप्त होगी।

मौसम की अनुकूलता भी हमारे भाव पर ही निर्भर करती है। बहुत सारे लोग अपने जीवन को अस्त व्यस्त रखते हैं और ऊलजलूल कार्यों में अपने आपको लिप्त रखते हैं, परन्तु हमेशा उम्मीद रखते हैं कि हमारे जीवन में कोई दिक्कत आए ही नहीं। जीवन हमेशा सिद्धांतों पर आधारित होता है। जिस अनुपात में हमारी निष्ठा होगी उसी अनुपात में हमें फल की भी प्राप्ति होती है। जीवन में हम शान्ति और सुकून चाहते हैं तो उसी के अनुरूप हमारे कर्म भी होने चाहिए। एक कहावत भी है कि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय अर्थात आप जैसा कर्म करेंगे उसी तरह का आपको परिणाम भी प्राप्त होगा।

बड़ी मजेदार बात य़े है कि हम सभी लोग उपरोक्त सिद्धान्त से भली भाँति परिचित हैं उसके बावजूद सोचते हैं कि य़े बात दूसरों के लिए कही गयी है हमें इस बात से कोई लेना देना नहीं है।समय नहीं मिल पा रहा है, छुट्टी नहीं मिल रही है, पैसे का प्रबंध नहीं हो पा रहा है, सर्दी अधिक है। य़े सब बहाना है। सिर्फ एक बार मन में निश्चय कीजिए कि किसी भी कीमत पर चाहे कुछ भी हो जाए हमें तो शिविर जाना ही है फिर देखिए आपके अनुरूप ही सारी स्थिति बनती जाएँगी। दरअसल हमारी सोच से ही हमारा जीवन संचालित होता है अतः अपनी सोच को बस सकारात्मक दिशा प्रदान करते रहिए देखिए आपके जीवन में खुशियाँ आपके इर्द गिर्द मन्डरायेन्गी।

गुरुवर जी हमें आपको वो सब कुछ प्रदान कर सकते हैं जिसकी हमने आपने कल्पना भी नहीं की होगी। बस हमें हर पल माँ गुरुवर की साधनाओं के प्रति समर्पित होना होगा और गुरुवर की विचारधारा का पूर्णतया पालन करना होगा। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। अतः अपने मन की स्थिति को हमेशा उच्च स्थित में रखिए। मन छोटा मत कीजिए। हमारी परेशानियों का मूल कारण हमारी सोच ही तो है। माँ गुरुवर के प्रति उच्च भावना ही हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सहयोग प्रदान करेंगी। बहुत सारे लोग मनुष्यों को खुश करने में ही अपनी कीमती ऊर्जा को नष्ट कर रहें हैं पर जिस दिन हम अपनी बहुमूल्य ऊर्जा को माँ गुरुवर की साधना में लगाने लगेंगे तत्क्षण हमारे जीवन की दशा और दिशा दोनों ही परिवर्तित हो जाएगी।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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