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पत्रकारिता की शाख को गिरने न दें: श्रीधर, अख़बारों का गला घोंटने की कोशिशों पर बहस हो: एनके सिंह, प्रख्यात कलमकार शिव अनुराग पटैरिया की स्मृति में हुई व्याख्यान माला

मध्यप्रदेश। पत्रकारिता के क्षेत्र में छतरपुर का नाम रोशन करने वाले कलमकार शिव अनुराग पटैरिया की प्रथम पुण्य तिथि पर गुरुवार को छतरपुर जिला मुख्यालय के होटल लॉ कैपिटॉल में शुभ भारत पत्र समूह द्वारा पुष्पांजलि एवं व्याख्यान माला आयोजित की गई।

समारोह के मुख्य अतिथि इंडियन एक्सप्रेस एवं हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व संपादक एनके सिंह थे जबकि अध्यक्षता महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर के कुलपति प्रो टीआर थापक ने की।

इस मौके पर माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक, आंचलिक पत्रकार संघ के राष्ट्रीय संयोजक पदमश्री विजयदत्त श्रीधर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे। राज्यसभा टीव्ही के पूर्व संस्थापक संपादक राजेश बादल, नईदुनिया के पूर्व संपादक विभूति शर्मा, नेशनल बुक ट्रस्ट के उप संपादक पंकज चतुर्वेदी, नमामि गंगे के राष्ट्रीय संयोजक डॉ भरत पाठक, वरिष्ठ पत्रकार दिनेश निगम त्यागी, श्री पटेरिया के पुत्र प्रखर विशिष्ट अतिथि थे। समारोह में छतरपुर जिले के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी मौजूद थे।  

मुख्य वक्ता माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध केंद्र भोपाल के संस्थापक  पदमश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि आजादी की लम्बी लड़ाई में लोक मान्यता से पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ का दर्जा मिला और पत्रकारिता ने 200 वर्षों में जो प्रतिष्ठा कमाई थी वह आज टीवी मीडिया ने सत्यानाश कर दी। सोशल मीडिया में तो गाली-गलौच तक चलती है। पत्रकारिता आज बाजारू हो चली है। फेक न्यूज जोरों पर है झूठ और प्रपंच की ख़बरें हमारे हाथ से निकल रहीं है। एक बार शाख चली गई तो लौट कर नहीं आती इसलिए पत्रकारिता की इस शाख को गिरने न दें।

पद्मश्री श्री श्रीधर ने छतरपुर कांड से उभर कर आए शिव अनुराग पटेरिया को याद करते हुए कहा कि छतरपुर कांड हिंदुस्तान के इतिहास में नजीर है जिसमे पहली बार किसी जिला दंडाधिकारी के खिलाफ न्यायिक जांच हुई और पत्रकारों पर कलंक का एक छींटा तक नहीं पड़ा। तभी गृह विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि पत्रकारों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि कस्बाई पत्रकारों ने गजब का काम किया और आज भी हिंदुस्तान के असली पत्रकार छोटे शहरों में ही हैं। उन्होंने बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाने की वकालत भी की।

मुख्य अतिथि एनके सिंह ने शिव अनुराग पटेरिया से पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि छतरपुर कांड के कवरेज के दौरान 40 साल पहले छतरपुर आने पर ही वे उनसे मिले थे। कलेक्टर, एसपी अपने को खुदा हैं उनसे लड़ने के लिए जिगरा चाहिए। तब यहां के पत्रकारों ने जीवट की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि पिछले 6-7 सालों में अख़बारों को दबाने की कोशिशें बहुत तेज हुई हैं। विज्ञापन निति को सम्पादकीय से जोड़ दिया गया है। इस पर बहस होना चाहिए क्यों कि विज्ञापन पर खर्च होने वाली राशि नागरिकों के टैक्स की है।लेकिन श्री सिंह ने अख़बारों का गला घोंटे जाने से असहमति जताई। उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने खुद उस दौर को भुगता है तब ख़बरें छपने के पहले अधिकारीयों को दिखाना पड़तीं थी आज तो असहमति की आजादी है अख़बार जो चाहें लिखने के लिए आजाद हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने शिव अनुराग पटेरिया से बचपन से लेकर अभी तक के संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि उनके पटेरिया के साथ ऐसे संयोग रहे जो जुड़वां भाईयों में भी नहीं होते। उन्होंने कहा कि जब उनने 1977 में पत्रकारिता शुरू की तब सेंसरशिप थी फिर भी छतरपुर खोजी पत्रकारिता में अग्रणी था लेकिन आज मीडिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सिद्धांतों, सरोकारों और मूल्यों की पत्रकारिता कर पाएं यही शिव अनुराग के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विभूति शर्मा ने शिव अनुराग पटेरिया की स्मृति करते हुए कहा कि उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों रूपों से सबके दिल जीते उनके बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखने जैसा है। 

पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि आज अखबारनवीसी के सामने चुनौती है कि सूचना को सहज, सरल तरीके से पठनीय कैसे बनाएं। यदि आप पटेरिया जी को दिल से श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो उनकी लिखी किताबें जरूर पढ़ें उन्होंने शब्दों के चयन और उसके प्रवाह को लेकर लिखा है।

डॉ भरत पाठक ने श्री पटेरिया को बड़ा भाई बताते हुए कहा कि वे पहले सारे तथ्य जुटा लेते थे इसलिए उनका लेखन प्रभावी रहा। कुलपति प्रो टीआर थापक ने श्री पटेरिया की विशेषताएं गिनाते हुए कहा कि पत्रकारिता की नई पौध को तराशने में उनका अहम योगदान रहा है। उनके जाने से बुंदेली और बुंदेलखंड को बहुत नुकसान हुआ है।स्वागत भाषण अधिवक्ता राकेश शुक्ला ने दिया। समारोह का संचालन आकाशवाणी के रिटायर्ड अधिकारी सुरेंद्र तिवारी ने किया। 

दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती पूजन और शिव अनुराग पटेरिया के चित्र पर पुष्पांजलि के  समारोह का शुभारम्भ हुआ। शुभ भारत के समूह संपादक श्याम किशोर अग्रवाल, लखन लाल चौरसिया, सुरेंद्र अग्रवाल, हरिप्रकाश अग्रवाल, सनत जैन, रविंद्र व्यास, रविंद्र अरजरिया, डॉ सुमति प्रकाश जैन, कल्याण सिंह चौहान, कमलेश पांडे, प्रवीण गुप्त, अंकुर यादव, दिलीप सोनी, सचिन अग्रवाल और नितिन अग्रवाल आदि ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सभी अतिथियों का शाल, श्रीफल  स्मृतिचिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।

बुंदेलखंड के गौरव, लेखक, समीक्षक शिव अनुराग पटैरिया का छतरपुर जिले से गहरा नाता रहा है। दैनिक शुभ भारत समाचार पत्र से वर्ष 1978 में अपनी पत्रकारिता के सफर को शुरू करने वाले शिव अनुराग पटैरिया विभिन्न संचार माध्यमों में लगभग साढ़े चार दशक से ज्यादा समय तक कार्यरत रहे हैं। इस दौरान नईदुनिया इंदौर, जनसत्ता मुंबई, चौथा संसार भोपाल, आईटीवी, संडे मेल, जन्मभूमि, दैनिक नईदुनिया भोपाल में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। उनका निधन  एक वर्ष पहले 12 मई को कोरोना से हो गया था।

रामेश्वर गुप्त को मिला प्रथम स्मृति सम्मान-
समारोह में शिव अनुराग पटैरिया की स्मृति में प्रथम सम्मान बुंदेलखंड अंचल के बांदा जिले के वरिष्ठ पत्रकार रामेश्वर प्रसाद गुप्त को प्रदान किया गया। उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल, श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट किया गया।   

समारोह में एसपी सचिन शर्मा, पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह, उमेश शुक्ला, पुष्पेंद्र नाथ पाठक, एडवोकेट योगेंद्र प्रताप सिंह, नारायण काले, अजय सिंह राव साहब, राकेश शुक्ल राधे, अम्बिका शर्मा, एडवोकेट श्याम सुंदर श्रीवास्तव और जगदीश तिवारी, जनसम्पर्क विभाग के उप संचालक अजय वर्मा सहित अनेक लोग प्रमुख तौर पर उपस्थित थे।

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