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पूर्वांचल के 145 घाटों पर छठ पूजा कल से, 4 दिनों के महापर्व में लाखों श्रद्धालु जुटेंगे, नहाय-खाय से होगी शुरुआत

वाराणसी में 3 लाख से अधिक लोग गंगा और वरुणा के किनारे छठ की पूजा करते हैं।

लखनऊ। पूर्वांचल का चार दिवसीय महापर्व छठ 8 नवंबर से शुरू हो रहा है। इसके लिए तैयारियां हर घर में जोरों से चल रही हैं। छठ मइया की पूजा अर्चना के लिए घाटों को तैयार किया जा रहा है। 8 नवंबर को घाटों पर पूर्वांचल के लाखों श्रद्धालु छठ मैया की पूजा करेंगे। इससे पहले घाट पर सफाई, शौचालय और बिजली की व्यवस्था की जा रही है। पूर्वांचल के वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर में कुल 145 घाटों पर 8 से 11 नवंबर तक आस्था का सैलाब उमड़ेगा। वाराणसी के 104, प्रयागराज के 16 और गोरखपुर के 25 घाटों पर महिलाएं छठ मइया की पूजा करेंगी।

कब क्या होंगे कार्यक्रम-
8 नवंबर को नहाय-खाय किया जाएगा। इस दिन स्नान के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं। इस दिन चना दाल, कद्दू या घीया की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन खरना से व्रत शुरू होता है। खरना 9 नवंबर 2021 से है। महिलाएं पूरे दिन व्रत रहेंगी। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाई जाएगी। इसके बाद सूर्य देव की पूजा होगी।

खरना के अगले दिन यानी 10 नवंबर 2021 की शाम को महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर डूबते सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद 11 नवंबर 2021 को सूर्य उगने से पहले ही व्रती महिलाएं नदी या तालाब के पानी में उतर जाती हैं। सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं। इसके बाद उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा का समापन कर महिलाएं व्रत का पारण करती हैं।

मेला प्रशासन की ओर से घाटों को बनाने का काम शुरू है।

वाराणसी के 104 घाटों पर 3 लाख लोगों की होगी भीड़-
घाटों पर साफ-सफाई को लेकर वाराणसी कमिश्नर दीपक अग्रवाल खुद नजर बनाए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन को बेहतर सुविधा के निर्देश दिए हैं। घाटों पर साफ-सफाई जोरों पर है। वाराणसी में 3 लाख से अधिक लोग गंगा और वरुणा के किनारे छठ की पूजा करते हैं। शहरी क्षेत्र के सभी 84 और ग्रामीण इलाकों के करीब 20 घाटों पर छठ मइया की पूजा की जाती है। छठ पर्व को लेकर नगर निगम गंगा घाटों की सफाई में जुटा है। दशाश्वमेध घाट, राणा महल घाट, मान मंदिर घाट, चौसट्ठी घाट, अस्सी घाट, राजा घाट आदि जगहों पर सफाई, शौचालय और रात में प्रकाश के लिए व्यवस्था पूरी की जा रही है।

प्रयागराज के 16 घाटों पर होगी छठ पूजा-
छठ को लेकर प्रयागराज में घाटों पर सफाई व्यवस्था को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। संगम, शंकरघाट, बलुआघाट आदि जगहों पर व्रती महिलाएं स्नान कर छठ मइया की पूजा करती हैं। किला से संगम तक घाट बनाया जा रहा है। संगम पर मेला लगता है, मेला प्रशासन की ओर से घाटों को बनाने का काम शुरू है। मेला प्रशासन का दावा है कि 24 घंटे के अंदर व्यवस्था ठीक हो जाएगी।

घाट सुपरवाइजर पुनीत श्रीवास्तव का कहना है कि दलदल की वजह से घाट बनाने में समय ज्यादा लग रहा है। उम्मीद है कि सोमवार सुबह तक घाट बनकर तैयार हो जाएगा। किला से लेकर संगम तक करीब पांच सौ मीटर तक घाटों का निर्माण किया जा रहा है।
वहीं, रात में श्रद्धालुओं को असुविधा न हो इसको देखते हुए लाइट की भी व्यवस्था की गई है। घाट के आसपास 200 से भी अधिक पोल लगाए गए हैं। बिजली विभाग का दावा है कि आज रात तक घाट रोशनी से जगमगाने लगेगा। प्रयागराज के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घाटों पर छठ पूजा होती है।

गोरखपुर में अभी से ही घाटों पर पूजा के लिए जगह रिजर्व हो गई है।

गोरखपुर में अभी से रिजर्व हो गई घाटों पर जगह-
गोरखपुर में 25 घाटों पर छठ की पूजा की जाती है। राप्ती नदी के तट पर रामघाट और राजघाट पर छठ का आयोजन भव्य होता है। यहां अभी से ही घाटों पर पूजा के लिए जगह रिजर्व हो गई है। छठ घाटों पर तैयारियों को लेकर नगर निगम ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू दी हैं। डोमिनगढ़ छठ घाट और हनुमान गढ़ी घाट पर भी पूजा के लिए लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने छठ घाटों पर व्यवस्था का निरीक्षण किया।

कोरोना ने घरों में कैद कर दिया था-
पिछले वर्ष छठ पर कोरोना का संकट था। कोरोना ने श्रद्धालुओं को घरों में ही कैद कर दिया था। पूर्वांचल के लोग अपने घर की छत पर ही तालाब बनाकर सांकेतिक रूप से छठ मइया की पूजा की थी। इस बार कोरोना संकट कम होने से त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। सामूहिक रूप से लोग परिवार के साथ घर से निकलकर छठ मइया की पूजा करने घाटों पर जाएंगे। नदी किनारे के घाटों और प्रशासन की ओर से बनाए जा रहे कृत्रिम तालाबों पर तैयारियां जोरों से चल रही हैं। कोरोना संकट के बाद छठ मइया का महापर्व मनाने के लिए पूर्वांचल के लोगों में विशेष उत्साह दिख रहा है।

पूजा में कब क्या-
8 नवंबर को नहाय-खाय।
9 नवंबर को खरना के साथ व्रत शुरू।
10 नवंबर की शाम डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य।
11 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य और समापन।

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