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बकस्वाहा में जंगल बचाने की मुहिम से जुड़े 1.1 2 लाख लोग, कोरोना खत्म होते ही बकस्वाहा की ओर कूच करेंगे देश भर के पर्यावरण प्रेमी, हीरा खनन परियोजना से है पेड़ो को नुकसान

मध्यप्रदेश। छतरपुर जिले के बकस्वाहा में हीरा खनन परियोजना से जंगल को बचाने के लिए शुरू हुई मुहिम “सेव बकस्वाहा फॉरेस्ट’’ अब मध्यप्रदेश के साथ पूरे देश में पहुंच चुकी है। जंगल को बचाने की इस मुहिम में देश भर के लगभग 1.12 लाख से अधिक लोग एवं पर्यावरण प्रेमी साथ आ गए हैं। बकस्वाहा का जंगल बचाने के लिए युवाओं ने भी सोशल मीडिया पर इस अभियान को तेज कर दिया है। इधर बड़ामलहरा विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी ने इस परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि इसका विरोध करने वाले कुत्सित मानसिकता के लोग हैं। जो बकस्वाहा में हीरा उत्खनन के लिए 2.15 पेड़ों की बलि दी जाना है। की भ्रामक जानकारी लोगों को दे रहा हैं।

महज हीरों के बदले जीवन दायी ऑक्सीजन देने वाले लाखों पेड़ों को बचाने के लिए मप्र समेत देशभर के 1 लाख 12 हजार लोग समर्थन आ गए हैं। कोरोना को देखते हुए इन सभी ने फिलहाल सोशल मीडिया पर ‘सेव बकस्वाहा फॉरेस्ट’ कैंपेन चलाया है।

लेकिन जैसे ही कोरोना संक्रमण थमेगा, स्थिति सामान्य होगी, मुहिम में शामिल सभी पर्यावरण प्रेमी बकस्वाहा पहुंचेंगे। जरूरत पड़ने पर पर्यावरण प्रेमी चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक कर इन्हें काटे जाने का विरोध करेंगे। देश की करीब 50 संस्थाओं ने जंगल बचाने के लिए वेबिनार किया और आगे की रणनीति पर चर्चा की।

दायर हुई सुप्रीम कोर्ट में याचिका-
यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। दिल्ली की समाजसेविका नेहा सिंह ने 9 अप्रेल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है, जिसे सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। याचिका में नेहा सिंह ने कहा कि हीरों के बदले लाखों हरे पेड़ों काटा जाना स्वीकार नहीं है। यह अनुबंध निरस्त किया जाए।

कोरोना काल निकलने के बाद तेज होगा अभियान-
बिहार में पीपल, तुलसी और नीम लगाने के देशव्यापी अभियान से जुड़े डॉ. धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि कोरोना ने ऑक्सीजन की अहमियत बता दी है। राष्ट्रीय जंगल बचाओ, अभियान से जुड़ी भोेपाल की करुणा रघुवंशी ने बताया कि कई राज्यों के लोग जुड़े हैं। डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि कोरोना के खत्म होते ही बकस्वाहा के जंगल को बचाने का अभियान तेज कर दिया जाएगा। बता दें कि इस अभियान से जुड़े बकस्वाहा के युवाओं ने ग्रामीण क्षेत्र में मोबाइल आदि से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

कुत्सित मानसिकता के लोग कर रहे विरोध: विधायक प्रधुम्न सिंह लोधी-
इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी ने हटकर बयान दिया है। उनका कहना है कि कुछ कुत्सित मानसिकता के लोग विरोध कर रहे हैं। लीज 50 साल के लिए है, एक दिन में लाखों पेड़ नहीं कट जाएंगे। कितने पेड़ कटेंगे यह पहले से कैसे कह सकते हैं। इसके पहले भूगर्भ के अधिकारी, पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर देखेंगे। और फिर काम शुरू होने से पहले सरकार और कंपनी जिम्मेदारी के साथ पेड़ लगाना शुरू करेंगी। इसका विरोध करना फिजूल है।

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