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महज 6 कमरे, 4 प्रोफेसरो के सहारे 3 हजार विद्यार्थी, फिर भी बेहतर शिक्षा का राग, 32 साल पुराने शासकीय महाविद्यालय बरही के बुरे है हाल, कहा गए 3 करोड़ 56 लाख, नई बिल्डिंग बनाने जारी हुई राशि का नही किसी को पता, कक्षा में ठूस-ठूसकर बैठाने की छात्र छात्राओं,मजबूरी, 3 पालियों में संचालित हो रहा बरही का महाविद्यालय

कटनी। मध्यप्रदेश का एक ऐसा महाविद्यालय, जहां विद्यार्थियों को ठूस-ठूस कर बैठाने की न सिर्फ कालेज प्रबंधन की मजबूरी है, बल्कि कमरों एवं प्रोफेसरों की कमी के चलते विद्यार्थियों को 3 पालियों में बुलाने की लाचारी भी है। जी हाँ सरकार की बेरुखी का दंश झेल रहा कटनी जिले का 32 साल पुराना शासकीय महाविद्यालय बरही का बुरा हाल है, जो अपनी बेबसी, लाचारी, मजबूरी की कहानी बयां करते हुए बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का राग अलाप रही सरकार और सरकारी सिस्टम की पोल भी खोल रहा है।

आप देख सकते है कि कमरे में किस कदर ठूस-ठूस कर ये बैठने मजबूर है, कई ऐसे है, जो क्लास के अंदर-बाहर खड़े भी है। करीब 3 हजार छात्र-छात्राओं की विशाल संख्या वाले बरही कालेज में अध्यापन कार्य के लिए महज 6 कमरे है, पढ़ाने वाले स्थायी 4 प्रोफेसर है, ऐसे में यहां के विद्यार्थियों का भविष्य कैसे उज्ववल होगा, यह जिम्मेदारों को सोचने, समझने की जरूरत है। दुर्दशा का शिकार कालेज के विद्यार्थियों ने अपनी व्यथा बताई।

छात्र शिवलाल, छात्रा शालिनी ने साफ कहा कि बैठने की ठौर न होने से कई विद्यार्थी तो कालेज नही आते, सरकार उम्मीद करती है कि विद्यार्थी उम्दा प्रदर्शन करें, लेकिन व्यवस्था बनाने के लिए शायद सरकार ने अपनी आंखें बंद कर ली है।

इस बारे कालेज के प्राचार्य डॉ आर के वर्मा ने मजबूरी बयां करते हुए बताया कि वर्तमान सत्र से नई बिल्डिंग बन जाने की बात कही गई थी, जिसके लिए 3 करोड़ 56 लाख रुपए शासन स्तर से जारी होने की जानकारी भी मिली थी, लेकिन आज तक न तो नया भवन बना और न ही किसी को यह जानकारी है कि 3 करोड़ 56 लाख रुपए कहां है, वही कालेज में बढ़े विद्यार्थियों की विशाल संख्या को देखते हुए प्रोफेसरों के पद भी सृजित नही किए गए, जिससे बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है, आपको बता दे कि शासकीय महाविद्यालय में कमरों एवं शिक्षकों की कमी का मुद्दा विधानसभा में क्षेत्र के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने उठाया था, जहां से यह बताया गया था कि नए शिक्षण-सत्र में नई बिल्डिंग का निर्माण हो जाएगा, जिसकी एक साल बीतने के बाद आधारशिला भी नही रखी गई, जिससे बरही कालेज में विद्यार्थियों को बैठकर पढाई करने की ठौर तक नही है।

कमरे न होने से खुले बरामदे में भी यहां क्लास लगाई जा रही है।गौरतलब है कि प्रदेश सरकार नए-नए कालेज खोल रही है, लेकिन जो कालेज वर्षो से संचालित है, उन कालेजो में प्रोफेसरों की कमी, कमरों की कमी बनी हुई है और हर साल विद्यार्थीयो की संख्या बढ़ रही है, जिससे बेहतर शिक्षा का राग बेमानी साबित हो रहा है।

(कटनी ब्यूरो विनोद दुबे की रिपोर्ट)

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