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राहुल गांधी के करीबी जितिन भाजपा में हुए शामिल, बोले – देशहित में काम करने वाली पार्टी केवल भाजपा, बाकी व्यक्ति विशेष के नाम पर चलते हैं

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जितिन प्रसाद का भाजपा में स्वागत किया।

नईदिल्ली। कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और राहुल गांधी के करीबी जितिन प्रसाद BJP में शामिल हो गए। दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले जितिन प्रसाद ने गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद जितिन ने कांग्रेस पर तंज कसा। कहा, अब केवल BJP ही देशहित में काम करने वाली पार्टी है। बाकी दल व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए हैं। राष्ट्रीय दल के नाम पर देश में अगर कोई पार्टी है तो वह सिर्फ BJP है।

जितिन प्रसाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से भी मिले।

मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा: जितिन प्रसाद
प्रसाद ने कहा, ‘मैं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सभी भाजपा नेताओं का धन्यवाद देता हूं। ये राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है। मेरा कांग्रेस से तीन पीढ़ियों का नाता है। ये अहम निर्णय विचार और मंथन के बाद लिया है। सवाल ये नहीं है कि मैं किस दल को छोड़कर आ रहा हूं। सवाल ये है कि किस दल में जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं। कुछ सालों से महूसस किया है कि आज देश में असली मायने में कोई राजनीतिक दल है तो भाजपा है। राष्ट्रीय दल तो भाजपा है।’

प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित होकर पार्टी जॉइन की-
पीयूष गोयल ने कहा, ‘आज जितिन प्रसाद हमारे बीच में है। ये उत्तर प्रदेश के नेता हैं। भाजपा की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर हमारी पार्टी में आ रहे हैं। ये कांग्रेस संगठन में कई पदों पर काम कर चुके हैं। मंत्री भी रहे हैं।

पीयूष गोयल ने कहा- जितिन प्रसाद ने बहुत छोटी आयु से उत्तर प्रदेश की सेवा में अपना पूरा जीवन झोंक दिया है। अभी भी मुझे याद है कि इनकी उम्र 27 वर्ष की थी, जब अचानक इनके पिता जी का देहांत हो गया था। तब ये मुंबई में काम करते थे। दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ये पढ़ाई कर चुके हैं। छोटी ही उम्र में परिवार को झटका लगा। इन्होंने छोटी आयु में भी उत्तरप्रदेश में दौरा किया। अलग-अलग जिलों में जाकर अपनी प्रतिभा और काम से लोगों का दिल जीता। शाहजहांपुर से सांसद बने। इन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो भूमिका निभाई, वो हम सबने देखी है।

जितिन प्रसाद उत्तरप्रदेश के बड़े नेताओं में हैं शुमार-
कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद का नाम उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं में शुमार है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भी कयास लगाए जा रहे थे कि जितिन कांग्रेस को छोड़कर BJP का दामन थाम सकते हैं, लेकिन तब ऐसा नहीं हो पाया था। जितिन प्रसाद धौरहरा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा उनके पास केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी थी।
राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि यूपी में प्रियंका गांधी के आने के बाद से जितिन प्रसाद को साइड लाइन कर दिया गया। पार्टी के कार्यक्रमों में भी उनको कम तवज्जो मिलती थी। हालांकि जितिन ने कभी खुलकर इसको जाहिर नहीं किया।

12 महीने में 3 बार खुलकर सामने आए-
1- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान लिस्ट में देरी पर भी जितिन प्रसाद नाराज हो गए थे। तब वह कांग्रेस के राज्य प्रभारी थे।

2- सचिन पायलट जब कांग्रेस से नाराज थे तब जितिन प्रसाद ने उनका समर्थन किया था। जितिन ने ट्वीट किया था, “सचिन पायलट सिर्फ मेरे साथ काम करने वाले नहीं बल्कि मेरे दोस्त भी हैं। इस बात को कोई नकार नहीं सकता कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम किया है। उम्मीद करता हूं कि ये स्थिति जल्द सही हो जाएगी। ऐसी नौबत आई इससे दुखी भी हूं।

3- पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव और पार्टी को ज्यादा सजीव बनाने के लिए पत्र लिखा था। यूपी में इसको लेकर कुछ नेताओं ने विरोध भी किया था।

कांग्रेस ने किया था ब्राह्म चेतना संवाद से किनारा-
बीते काफी समय से जितिन प्रसाद ब्राह्मणों के हक में आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, प्रदेश नेतृत्व से उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा था। यही वजह थी कि जब जितिन ने ब्रह्म चेतना संवाद कार्यक्रम की घोषणा की तो पार्टी ने इससे किनारा कर लिया। कई नेताओं ने यह तक कहा कि वह उनका अपना निजी मसला है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।
BJP को फायदा नहीं होगा, लेकिन कांग्रेस को नुकसान जरूरत
जितिन प्रसाद भले ही देश में बड़ा कद रखते हों, लेकिन क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो गई है। प्रसाद ने 2004 में शाहजहांपुर से पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था। जीत कर मंत्री भी बने फिर 2009 में धौरहरा सीट से चुनाव जीते और UPA-2 में मंत्री भी बने। फिर जितिन 2014 में लोकसभा चुनाव हार गए। 2017 में तिलहर विधानसभा से चुनाव लड़े, लेकिन यह चुनाव भी नहीं जीते। 2019 में धौरहरा से फिर लोकसभा चुनाव लड़े और फिर हार का सामना करना पड़ा।

इन हार के पीछे क्षेत्र से उनकी दूरी को बड़ा कारण माना गया। जितिन का कद कांग्रेस में काफी बड़ा रहा। वह राहुल गांधी के काफी करीबी थे। बंगाल के प्रभारी भी रहे। इसके बावजूद आम लोगों में उनकी ख्याति दिनों दिन कम होती गई। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि जितिन के आने से BJP को कोई खास फायदा नहीं होगा। लेकिन कांग्रेस को जरूर इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। वह इसलिए क्योंकि एक समय लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस को जितिन ने ही पश्चिमी यूपी में खड़ा किया था। वह कांग्रेस के लिए बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर थे।

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