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लाड़ली लक्ष्मी योजना को शिक्षा और रोजगार से जोड़ेगे, बेटी बोझ नही है, का विचार समाज में स्थापित करें

छतरपुर ज.सं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना को शिक्षा और रोजगार से जोड़ते हुए समाज में यह धारणा स्थापित करना है कि बेटी बोझ नहीं गृहस्थी का सहारा है। लाड़ली लक्ष्मी योजना में पंजीकृत लाड़लियाँ, सशक्त, समर्थ, सक्षम और आत्म-निर्भर बनकर समाज में योगदान दें, इसके लिए लाड़ली लक्ष्मियों को उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, रोजगार, स्व-रोजगार आदि के लिए हर संभव मार्गदर्शन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा। लाड़ली लक्ष्मी योजना में बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, कौशल संवर्धन और उन्हें आत्म-निर्भर बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए योजना को नया स्वरूप प्रदान किया जाएगा।

बालिकाओं की कक्षावार ट्रेकिंग होगी-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना में पंजीकृत सभी बालिकाओं की शिक्षा की निरंतरता के लिए कक्षावार ट्रेकिंग की जाएगी। लाड़ली लक्ष्मी बालिका के पहली में प्रवेश लेने से लेकर 12वीं कक्षा तक ट्रेकिंग के लिए पोर्टल विकसित किया जाएगा। लाड़ली लक्ष्मियों के व्यक्तित्व विकास के लिए उन्हें एन.सी.सी, एन.एस.एस. जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाड़लियों को कॉउंसलिंग और कोचिंग की व्यवस्था-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 12वीं कक्षा के बाद लाड़ली लक्ष्मी की रूचि, दक्षता और क्षमता के अनुसार उच्च शिक्षा या तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा।

12वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 20 हजार रूपए देने का प्रावधान-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योजना में पंजीकृत बालिकाओं को 12वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी करने पर आगे की शिक्षा अथवा व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहन स्वरूप 20 हजार रूपए की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। एक लाख रूपए में से शेष 80 हजार रूपए का भुगतान 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर होगा।

लाड़ली लक्ष्मी योजना को स्वास्थ्य और पोषण से भी जोड़ा जाएगा-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए योजना को स्वास्थ्य और पोषण से भी जोड़ा जाएगा। प्रदेश में बेहतर लिंगानुपात सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को पुरस्कृत किया जाएगा।
लाड़ली लक्ष्मी योजना को केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना तक सीमित नहीं रखा जाए। बालिकाओं को सकारात्मक वातावरण देना और निरंतर प्रोत्साहित करना आवश्यक है। बालिकाओं के उत्साहवर्धन और उनसे संवाद के लिए प्रतिवर्ष प्रेरणास्पद तीन या चार कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे बालिकाओं का बेहतर व्यक्तित्व विकास भी होगा। प्रदेश में 39 लाख 37 हजार लाड़ली लक्ष्मियाँ है।

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