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लोग आज भी तमाम रिश्तों की भूल भुलैया में चक्कर लगा रहे हैं, सच्चा रिश्ता तो विचारधारा का ही होता है, जिससे भी आपकी विचारधारा का मेल हो ,वही आपका सही मायने में रिश्तेदार है ,भाई है और मित्र है, रिश्ता रखना ही है तो माँ गुरुवर से रखिए जहाँ पर आपको कभी भी निराश नही होना पड़ेगा

डेस्क न्यूज। हम लोग जीवन भर रिश्तों का रोना रोते रहते हैं। किसी के भाई से नही बनती, किसी के बहन से नही बनती, किसी किसी क़ो अपने पिता से समस्या है, किसी क़ो अपने पुत्र और पुत्री से समस्या है। किसी क़ो अपने पति से और किसी क़ो अपनी पत्नी से समस्या बनी रहती है। रिश्ते नाते तो एक भ्रमजाल की तरह होते हैं।हम पूरे जीवन यही परेशान रहते हैं कि हमारे परिवार के लोग हमारी बात नही मानते और अनसुना कर देते हैं। यहीं पर हम लोग भूल कर बैठते हैं कि जिससे हमारी विचारधारा मिलेगी उसी से हमारी बनेगी या उसी क़ो हमारी बात या कार्य शैली समझ आएगी।

इसको और भी खोलकर बताऊँ तो जिससे हमारे गृह नक्षत्र मिलेंगे उसी से हमारा तालमेल अच्छा रहेगा। चाहे वो व्यक्ति हमारा भाई हो, बहन हो, हमारी पत्नी हो या पति हो, पिता हों, माता हों,चाहे पुत्र या पुत्री हो। अब यहाँ सवाल य़े उठता है कि जिससे भी हमारी विचारधारा ना मिले क्या उससे सम्बन्ध रखा जाए या नही। सम्बन्ध रखना या ना रखना हमारे आपके वश के बाहर की बात है। एक बड़ी मजेदार बात है की गलत लोगों की दोस्ती गलत लोगों से ही होती है और सही लोगों की दोस्ती सही लोगों से होती है और अगर आप नियमित माँ गुरुवर की साधना करते हैं तो आपके जीवन से गलत लोग स्वतः ही दूर होते जाएँगे।

आप जैसे स्वयं होंग़े आपसे उसी प्रकार के लोग जुड़ते जाएँगे। अगर गलती से किसी गलत व्यक्ति से मित्रता हो भी गयी तो थोड़े समय बाद ही ऐसा व्यक्ति स्वतः ही दूर हो जाएगा।कई ऐसे लोग होते हैं जो हमारे रिश्ते में नही होते हैं और दूर दराज में रहते हैं पर उनसे बड़ा ही आत्मीय सम्बन्ध बना होता है। इसी क़ो कहते हैं की रिश्ता तो सिर्फ विचारधारा का ही होता है।आपके भाई से अगर आपकी नही बनती तो कत्तई परेशान होने की आवश्यकता नही है। आपके कार्यशैली में और उनकी कार्य शैली में व्यापक अन्तर होगा इसीलिए नही बनती है। समान विचारधारा के लोग ही आपस में अच्छे से निभा पाते हैं। कई पति-पत्नी भी आपसी रिश्तों में कड़वाहट रखते हैं।

आखिर इन सभी का समाधान क्या है? जो रिश्ते हमारे लिए अत्यन्त महत्व पूर्ण हैं उन्हें कायम करने का एक मात्र उपाय है कि हम लोग गुरुवर जी के द्वारा निर्देशित मार्ग का पालन करें। धीरे-धीरे आपसी समझ विकसित होगी और सम्बन्ध सामान्य होने लगेंगे। आज से आप लोग किसी के पीछे अनावश्यक ऊर्जा नष्ट ना कीजिए। य़े तो भौतिक जीवन के रिश्तों की बात हुई। जीवन का वास्तविक रिश्ता तो माँ गुरुवर से ही रखना चाहिए। इस रिश्ते में सदैव सुख की ही अनुभूति होती है। आपको कभी भी निराश नही होना पड़ेगा। जिस दिन हमें य़े एहसास हो गया उसी दिन से जीवन में आनन्द की अनुभूति होने लग जाएगी। प्रकृति सत्ता और गुरुदेव जी क़ो ही प्रसन्न रखना हमारे जीवन का प्रथम उद्देश्य होना चाहिए। मनुष्यों के पीछे भागना जीवन का सबसे बड़ा भटकाव है। कहने क़ो तो हमें सब कुछ दिखाई देता है फिर भी हमारे आँख पर पट्टी बँधी हुई है। जब हम लोग माँ गुरुवर की नियमित साधना करेंगे तभी हमारी पट्टी खुलेगी। तभी हमें सत्य असत्य का ज्ञान होगा। तभी हम लोग विवेकवान बनेंगे।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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