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सावन का पहले सोमवार पर शिवालयों में गूंजे बाबा भोलेनाथ के जयकारे, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, कोरोना गाइडलाइन का नहीं हुआ पालन, पुलिस की व्यवस्था भी रही कम

भगवान शिव से प्रार्थना करती महिला।

मध्यप्रदेश। सावन के पहले सोमवार की शुरुआत भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। मौसम साफ रहने के कारण बारिश नहीं हुई। जिले के सभी शिवालयों पर जमकर भीड़ उमड़ी। हालांकि इस दौरान सामाजिक दूरी और कोरोना गाइड लाइन का पालन नहीं हो पाया। अलसुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गए थे। शहर के बड़े शिव मंदिरों पर इस बार प्रशासन द्वारा भी कोई खास व्यवस्था नहीं की गयी थी। न ही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस की मौजूदगी रही।

श्रावण मास का पहले सोमवार- शिवालयों में विशेष पूजा अर्चना के साथ भगवान शिव का रूद्राभिेषक हुआ। मान्यता है कि सावन के सभी सोमवार को व्रत रखना विशेष फलदायी होता है। इस साल कुल चार सावन सोमवार पड़ेंगे। श्रावण मास रविवार से शुरू होकर रविवार को ही समाप्त हो रहा है। जिले के प्रमुख शिव स्थलों में केदारनाथ धाम, गादेर गुफा, मुहालपुर गुफा, बागबाघेश्वर सहित अन्य प्राचीन शिव स्थल है। यहां गुना ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र में शिव भक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इसके अलावा शहर के मुख्य शिव मंदिरों में जिला अस्पताल परिसर स्थित शिव मंदिर, हनुमान चौराहा मंदिर, जाटपुरा शिव मंदिर आदि हैं।

गादेर गुफा-
शहर से 7 किमी की दूरी पर स्थित गादेर गुफा का विशेष महत्त्व है। सावन के महीने में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोमवार को सुबह से ही यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हालांकि सामान्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम रही। इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर पूजा की। सुबह मंदिर के पुजारियों के द्वारा भगवान शिव की आरती की गयी। हालाँकि यहां ज्यादा भीड़ हो जाने से शारीरिक दूरी नहीं दिखी। अधिकतर लोगों ने तो मास्क भी नहीं लगाए हुए थे। हर साल यहां पुलिस की तैनाती की जाती है, लेकिन इस बार यह व्यवस्था भी कमजोर ही दिखी।

केदारनाथ धाम-
शहर से 35 किमी दूरी पर केदारनाथ धाम स्थित है। पहाड़ों से घिरे होने के कारण यहाँ का प्राकर्तिक सौंदर्य काफी मनमोहक है। यहाँ पहाड़ों के बीच ही शिव प्रतिमा स्थापित है। वहीं पहाड़ों के ऊपर से गिरने वाला झरना लोगों को आकर्षित करता है। सोमवार को आस-पास के गांव सहित शहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बड़ी संख्या में युवक और महिलाओं ने यहाँ पहुंचकर पूजा-अर्चना की। हर वर्ष यहाँ सावन के दिनों में मेला लगता है, लेकिन कोरोना काल होने से इस वर्ष यहां मेला नहीं लगाया जा सका। फिर भी कुछ संख्या में दुकानदारों ने अपनी छोटी-छोटी दुकानें यहाँ लगा राखी थीं, जिनपर प्रसाद, फूल-माला आदि की बिक्री होती रही। शहर से थोड़ा दूर होने के कारण सुबह ज्यादा संख्या में तो श्रद्धालु नहीं पहुंचे, लेकिन समय के साथ यहां भीड़ बढ़ती जा रही थी। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों के भी यही हाल रहे। यहां भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की। मुहालपुर गुफा पर भी बड़ी संख्या में नागरिक दर्शन करने पहुंचे।

सावन के सोमवार का महत्त्व-
सावन हिंदू पंचांग के अनुसार पांचवां महीना है और यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त के दौरान पड़ता है। भगवान शंकर को समर्पित सावन का महीना अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भगवान शंकर का प्रिय महीना है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु हरिशयनी या देवशयनी एकादशी पर विश्राम करने क्षीरसागर में चले जाते हैं तो इस दौरान समस्त ब्रह्मांड के पालन का दायित्व भगवान शिव स्वयं ले लेते हैं। सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा माता पार्वती के साथ करने से सभी प्रकार के मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और अनेक प्रकार की समस्याओं से मुक्ति भी मिलती है।

वैदिक ज्योतिष अनुसार भगवान शंकर प्रकृति का सामंजस्य बनाए रखने पर विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। वे एक ओर अपने गले में विषधर वासुकि नाग को धारण किए रहते हैं तो वहीं दूसरी तरफ अपने मस्तक पर चंद्र देव और जटाओं में मां गंगा को। उनका वाहन वृषभ है जिसे हम नंदी बैल के नाम से भी जानते हैं तो वहीं महादेव की अर्धांगिनी माता पार्वती का वाहन शेर है।

भगवान शंकर के पुत्र गणेश और कार्तिकेय के वाहन क्रमशः मूषक और मयूर हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह सभी जीव एक दूसरे के शत्रु हैं लेकिन भगवान शंकर के निवास कैलाश पर बड़ी ही प्रेम पूर्वक रहते हैं। इनके माध्यम से भगवान शंकर हमें संदेश देते हैं कि हमें प्रकृति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और सावन मास में जब प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेरती है तो उस दौरान प्रकृति का शृंगार होता है। ऐसे में मानव मात्र को भी प्रकृति संतुलन पर ध्यान देना चाहिए जिससे किसी प्रकार की कोई परेशानी भविष्य में हमें ना सताए। इससे भगवान शंकर की कृपा सहज भी प्राप्त हो जाती है।

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