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हम लोगों ने क्या गम्भीरता से कभी ये विचार किया कि हमारा मन पूजा पाठ में क्यूँ नहीं लगता है, इसके विपरीत फिल्म देखने में गप्पें मारने में दूसरों को नीचा दिखाने में अन्य मनोरंजन के कार्यों में हम खूब अपना समय व्यतीत करते हैं, ये बहुत ही गम्भीर विषय है इसलिये आइये इसके कारण और निवारण पर आज चर्चा करते हैं

डेस्क न्यूज। देखिये सर्व प्रथम हमें जानना आवश्यक है कि हम लोग पिछले सात जन्मों के कर्मों के प्रारब्ध को लेकर वर्तमान जीवन जी रहे हैं। जिन लोगों का जीवन पूर्व के जन्मों में आध्यात्मिक गुजरा होगा ,उनका आज का जीवन भी अच्छे कार्योँ में व्यतीत हो रहा होगा। जिनका पूर्व का जीवन भोग विलास _ऐयाशी और बुरे कार्योँ को अंजाम देने में बीता होगा ,उनका वर्तमान जीवन भी वैसा ही बीत रहा होगा बल्कि यूं कहिये कि ऐसे लोग बड़ा कष्ट कारी जीवन जी रहे होंगे। जहाँ तक पूजा पाठ में मन ना लगने की बात है ,इसे थोड़ा ध्यान से समझना होगा।

जब हमारी आत्मा पर पूर्व के कुसंस्कारों का आवरण पड़ा होगा तो हमारा मन कत्तई पूजा पाठ में नहीं लगेगा।ऐसे लोगों को हर समय खुराफात ही सूझेगा। इसके विपरीत जो लोग पूर्व के जन्मों में धार्मिक प्रवृत्ति के रहे होंगे ,वो लोग आज भी इस जन्म में भी सात्विक विचारधारा का जीवन जी रहे होंगे। गुरुदेव श्री शक्ति पुत्र महाराज जी ने ऐसे लोगों को स्वर्णिम अवसर प्रदान किया है ,ऐसे लोगों को अपनी आत्मा पर पड़े हुये आवरण को हटाने का मार्ग प्रदान किया है ,जिससे उनका वर्तमान जीवन तो शानदार बन ही जाएगा बल्कि अगले कई जन्म सुधर जायेंगे।

कई लोग अपने मन में धारणा बना लेते हैं कि अब हमारा जीवन इसी तरह बीतेगा ,अब हमारा कुछ नहीं हो सकता है ,पर ये सरासर गलत धारणा है। गुरुदेव जी के बताए हुये मार्ग का जो भी मनुष्य निष्ठा और श्रद्धा के साथ पालन करेगा उस व्यक्ति का जीवन परिवर्तित होकर रहेगा। भोग विलास और वासनात्म्क जीवन अन्धकार की ओर ले जाते हैं। गुरुदेव जी ने कहा है कि साधना के द्वारा ही वासना के प्रभाव को नियन्त्रित किया जा सकता है। कई लोग गलत कार्योँ से दूर होना चाहते हैं पर उनके पास अन्य कोई रास्ता नहीं है। गुरुदेव जी का सम्पूर्ण जीवन मानवता के कल्याण के लिये पूर्ण रूप से समर्पित है ,उनके जीवन का हर पल समाज के कल्याण के लिये ही बीत रहा है।

हमारा आपका सौभाग्य होगा कि हम लोग पूरी तन्मयता से एकाग्र चित्त होकर गुरुदेव जी द्वारा प्रदत्त माँ की साधना आराधना में लीन हो जायें। गुरुदेव जी आज साकार रूप में हमें उपलब्ध हैं ,ये हम् सभी का परम सौभाग्य है। इतना स्वर्णिम अवसर प्राप्त करके भी हम लोग आज गम्भीर ना हुये तो सारा जीवन पश्चाताप की अग्नि में प्रज्वलित होना होगा। जीवन को सुखी और दुःखी बनाना हमारे हाँथ में ही होता है। गुरुदेव जी द्वारा निर्देशित मार्ग का शत प्रतिशत पालन करना ही हमारा सौभाग्य है। गुरुदेव जी के मार्ग को प्राप्त करके भी हम अन्मयस्क जीवन जीयें तो हमको अपना आकलन स्वयं कर लेना चाहिये।

गुरुदेव जी बार-बार हमें आगाह कर रहे हैं पर हम लोग कान में तेल डालकर बैठे हुये हैं। अनेक लोग आज के समय में गुरुदेव जी की आज्ञा का पालन करके सुख शान्ति से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।गुरुदेव जी ने समय के महत्व का हम् सभी को बोध कराया है। हर पल माँ का ध्यान बने रहना ही हमारे अच्छे समय का सूचक है। सत्य और असत्य का भेद जिसको समझ आ गया और उसी के अनुरूप जो जीवन जीने लगा वही व्यक्ति आज के समय में सफल व्यक्ति कहलाया जाएगा। जिसने समय के महत्व को नहीं समझा उसका पतन कोई भी रोक नहीं सकता है। माँ गुरुवर की नियमित साधना द्वारा ही आत्मा पर पड़े हुये आवरण को हटाया जा सकता है अन्य कोई मार्ग इस भूतल पर है ही नही। यही ध्रुव सत्य है।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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