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30 साल बाद शनि प्रदोष में मनेगी मकर संक्रांति, कितनी फायदेमंद हैं यह संक्रांति

डेस्क न्यूज। ग्रह गोचर की गणना के अनुसार सूर्य संक्रांति का महापर्व मकर संक्रांति पर्व काल 15 जनवरी शनिवार को ब्रह्म योग की साक्षी में मनाया जाएगा। हालांकि, सूर्य का धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश का समय 14 जनवरी 2022 को दोपहर 2:32 पर होगा।

मान्यता के अनुसार सूर्य की संक्रांति का समय विशेष प्रभाव डालता है। यदि मध्यान्ह उपरांत सूर्य की संक्रांति होती है, तो ऐसी स्थिति में संक्रांति का पुण्य पर्व काल अगले दिन मनाना चाहिए। इस बार संक्रांति 14 जनवरी 2022 को दोपहर 2:32 पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा, जिसका पुण्य पर्व काल 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

30 वर्ष बाद बन रहा है शनि का शश व केंद्र योग-
ग्रह गोचर की गणना में कई प्रकार के योग संयोग बनते रहते हैं। पर्व काल विशेष पर जब ग्रह गोचर में पंच महापुरुष में से कोई एक योग उपलब्ध हो तो वह विशेष माना जाता है। इसी गणना की दृष्टि से इस बार मकर संक्रांति का पर्व शनि के मकर राशि पर परिभ्रमण करने तथा केंद्र योग के माध्यम से होने से शश योग बन रहा है।

सूर्य शनि की युति मकर राशि में
पं. सुरेश मिश्रा जी ने बताया कि यह भी संयोग है कि मकर राशि पर शनि का परिभ्रमण के चलते सूर्य की मकर संक्रांति भी संयुक्त क्रम से बन रही है। यह योग कम बनता है। जब मकर मास में मकर राशि पर मकर संक्रांति का पर्व काल मकर राशि की युति में सूर्य शनि का संयुक्त क्रम होना। आमतौर पर ही यह संयोग सालों बाद बनता है।

शनिवार के दिन प्रदोष होने से शनि प्रदोष पर संक्रांति का पर्व काल
एक संयोग यह भी है कि शनिवार के दिन मकर संक्रांति के पर्व काल होना और प्रदोष का होना भी अपने आप में विशेष है। शनि प्रदोष में संक्रांति पर किया गया दान, व्रत, जप, नियम का विशेष फल मिलता है।

36 साल बाद शनि प्रदोष के साथ- मकर संक्रांति पर्व काल का संयोग
छतरपुर जिले के रिटायर्ड तहसीलदार व ज्योतिषाचार्य पंडित शोभाराम मिश्रा जी के मुताबिक शनि प्रदोष के दिन संक्रांति योग में दान का विशेष महत्व है। यह संयोग 1995 यानी 36 साल बाद बना है। इस संयोग का फल आने वाले समय में दिखाई देगा।

भारत के लिए संक्रांति श्रेष्ठ, लेकिन कठिन समय का भी होगा आरंभ-
खास तौर पर संक्रांति के प्रवेश को लेकर के ग्रह गोचर के गणित का विशेष प्रभाव देखा जाता है। माना जाता है कि जब सूर्य की संक्रांति उत्तरायण की ओर बढ़ती ,है तो ऐसी स्थिति में ग्रहों का प्रभाव भारत राष्ट्र की दृष्टि से कितना अनुकूल है या कितना विकासकारी। इन सभी स्थितियों को देखते हुए भारत के लिए यह तो श्रेष्ठ है, किंतु कठिन समय की भी शुरुआत मानी जाएगी। उसका मुख्य कारण ग्रहों के नक्षत्र और दृष्टियों के संबंध, साथ ही जिस समय लग्न में प्रवेश का वह समय भी इस स्थिति को स्पष्ट करता है। इस दृष्टि से बहुत से स्थानों पर नकारात्मकता का भी अनुभव होगा।

मकर संक्रांति के पुण्य पर्व काल पर यह करें-
मकर संक्रांति के पुण्य काल में सफेद तिल मिश्रित जल में या नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए। ध्यान रहे कि तिल का उपयोग आवश्यक है। स्नान के पश्चात शिव लिंग पर सफेद तिल मिश्रित जल से अभिषेक करें। साथ ही, भगवान सूर्य को भी सफेद तिल से अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद तीर्थ पर वैदिक ब्राह्मण को संक्रांति के निमित्त चावल, खड़ा मूंग, सफेद दीया, काली तिल का दान करें। यदि ताम्र कलश में काले तिल भर कर सोने का दाना रखकर दान किया जाए, तो ज्ञात-अज्ञात दोष और पापों की निवृत्ति होती है।

संक्रांति इन राशियों के लिए हैं शुभ-
मकर संक्रांति पर्व इस बार मेष, सिंह, तुला, वृश्चिक और मकर राशि के लिए शुभ बताया जा रहा है।
मेष: नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति व वेतनवृद्धि का योग। 
यह करें- तिल और गुड़ से बनी मिठाई अपने पिता के उम्र के किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।
सिंह: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवकों के लिए लाभदायक। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 
यह करें- किसी असहाय व्यक्ति को जरूरत की चीजें दें।
तुला: आय के नए स्रोत मिलेंगे। करियर के लिए भी लाभदायक। 
यह करें- कपड़े दान करें।
वृश्चिक: नई पहचान बनेगी। करियर में मेहनत का फल मिलेगा। 
यह करें- गुड़ अथवा मिठाई दान करें।
मकर: मान सम्मान बढ़ेगा। नौकरीपेशा युवकों के लिए विशेष लाभकारी। 
यह करें- तिल का दान करें।
यह हैं शुभ मुहूर्त-
(1) इस वर्ष मकर संक्राति 14 और 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
(2) पुण्य काल मुहूर्त: 14 को दोपहर 2.12 से शाम 5.45 बजे तक
(3) महापुण्य काल मुहूर्त: 14 को दोपहर 2.12 से दोपहर 2.36 बजे तक

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