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जिस जगह अमर दुबे एनकाउंटर में हुआ था ढेर, फॉरेंसिंक टीम ने वहां पहुंचकर क्राइम सीन को दोहराया

उत्तरप्रदेश। हमीरपुर जिले में कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर प्रकरण की जांच तेज हो गई है। सोमवार को लखनऊ एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री) टीम ने हमीरपुर में विकास दुबे के राइट हैंड अमर दुबे के एनकाउंटर वाली जगह पर एनकाउंटर सीन को दोहराया। इस दौरान यूपी एसटीएफ और पुलिस के वे जवान भी मौजूद थे, जिन्होंने मुठभेड़ के दौरान अमर दुबे को गोली मारकर ढेर किया था। बता दें कि, अमर दुबे दो जुलाई को बिकरु गांव में आठ पुलिसवालों की हत्या में शामिल था। वारदात के बाद वह गैंगस्टर विकास दुबे के साथ फरार हो गया था। लेकिन 8 जुलाई की सुबह उसे यहां एनकाउंटर में मार गिराया गया।


अरतरा गांव के पास हुई थी मुठभेड़-


बिकरु गांव निवासी अमर दुबे, गैंगस्टर विकास दुबे का भतीजा था। वह शूटआउट के बाद फरार होकर हमीरपुर पहुंचा था। जहां उसने अपने एक करीबी रिश्तेदार के यहां शरण ली थी। लेकिन इसकी भनक यूपी एसटीएफ को लग गई। एसटीएफ ने मौदहा कोतवाली की फोर्स के साथ मिलकर दबिश दी। पुलिस को देखकर अमर अरतरा गांव की तरफ भागा। पुलिस ने पीछा किया तो उसने फायरिंग की। जिसमें कोतवाली प्रभारी और एसटीएफ का एक सिपाही घायल हो गया। वहीं, जवाबी कार्रवाई में अमर दुबे मारा गया।


मौके पर घायल इंस्पेक्टर और सिपाही भी रहे थे मौजूद-


लखनऊ से पांच सदस्यीय फॉरेंसिंक टीम डॉक्टर एके श्रीवास्तव की अगुवाई में सोमवार को अरतरा गांव पहुंची। मुठभेड़ वाली जगह पर क्राइम सीन का री-कंस्ट्रक्शन किया। इस दौरान पुलिस के बयान के आधार पर सीन का मिलान कराया गया। मुठभेड़ की एक एक कड़ी जोड़ने का प्रयास किया गया। इस दौरान मुठभेड़ में घायल इंस्पेक्टर और एसटीएफ का सिपाही भी मौजूद रहा। पड़ताल के बाद टीम वापस लौट गई।


अमर ने सीओ की हत्या की थी


अमर ने 10 बदमाशों के साथ बिल्हौर के सीओ देवेंद्र मिश्र की हत्या की थी। अमर और उसके साथी मिश्र को घसीटकर विकास दुबे के मामा प्रेम कुमार पांडे के घर में ले गए और गोलियों से भून दिया। धारदार हथियार से भी वार किए थे। प्रेम कुमार पांडे एनकाउंटर में पहले ही मारा जा चुका है।


कानपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई को हुआ था शूटआउट


कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने फायरिंग कर दी। हमले में 8 पुलिसवाले मारे गए। घटना के 7 दिन बाद यानी 10 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे का एनकाउंटर कर दिया।

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