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परोपकार करना सबके नसीब में नही होता, माँ गुरुवर की जिसके ऊपर विशेष कृपा होती है वही व्यक्ति परोपकार कर पाता है, बहुत सारा धन होने से कुछ भी नही होता, हमारे मन में दूसरों की मदद करने की प्रबल भावना होनी चाहिए

डेस्क न्यूज। आज की विषम परिस्थिति में अगर हम लोग चाह लें तो कई तरह से कोरोना पीड़ित व्यक्तियों की मदद कर सकते हैं, पर मदद करना सबके भाग्य में नही होता है।उदाहरण स्वरूप कई ऐसे राज नेताओं को ही ले लीजिए।

सरकारी खजाने से तो तमाम कार्य कर देंगे परन्तु स्वयं के जेब से फूटी कौड़ी भी नही खर्च करेंगे। ऐसा नही है की कर नही सकते हैं,पर दिल में इस तरह की भावना ही नही है जिससे लोगों की सहायता कर सकें। अभी जो कोरोना का विपत्ति काल चल रहा है, इस दौरान प्रत्येक राजनीतिक दल खुलकर सहयोग कर सकते हैं पर कहीं भी कुछ भी देखने सुनने में नही आ रहा है। सरकारी खजाने में तो जनता का ही पैसा है, आपने उसमे से किसी की मदद कर दिया तो कौन सा तीर मार दिया।

सृष्टि के प्रारम्भ से ही परोपकार करने का विधान प्रकृति सत्ता ने बनाया है। दूसरों के हित से बड़ा कोई भी धर्म नही है। गुरुदेव जी श्री शक्ति पुत्र जी महाराज जी के जीवन से हम सभी को सीख लेनी चाहिए। गुरुदेव जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को जन कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। गुरुदेव जी ने कहा है की आप जिन भी परिस्थितियों में रह रहे हो उन्हीं परिस्थितियों के अनुसार दूसरों को सहायता पहुँचाते रहिए। कई लोग सारी जिन्दगी स्वार्थ के वशीभूत होकर ही अपना जीवन व्यतीत कर देते हैं। खुद ही खाया, खुद ही पहना और ऊपर चले गए। ऐसा जीवन जानवरों के समान है। सरहद पर तैनात प्रत्येक प्रहरी से सबक लेना चाहिए की हमारी रक्षा के लिए अपने जीवन को न्यौछावर कर देते हैं। ऐसे वीर सपूतों को शत शत नमन। गुरुदेव जी ने कहा है की आप कभी खुद ही मिठाई खाकर देखिए और कभी किसी जरुरतमंद को खिला कर देखिए आपको उस व्यक्ति को खिलाकर बहुत ज्यादा आनन्द का अनुभव होगा। छोटे छोटे कार्य करके हम लोगों की मदद कर सकते हैं। हम किसी के सुख का साथी बन सकें तो जरूर बनें पर किसी के दुःख का कारण कभी ना बनें।

जब हम दूसरों की सहायता करने का मन बनाते हैं तो उसी समय प्रकृति सत्ता हमारी सहायता करने का विचार बनाने लगती हैं। एक प्रयोग करके आप देखिए कि आप किसी की मदद जब करते हैं तो आपका मन अत्यधिक प्रसन्न हो जाता है और जब आप किसी का अहित सोचते हैं तो आपके मन में ग्लानि का भाव उत्पन्न होने लगता है। सदैव खुश रहने का मूल मन्त्र एक ही है की हम सदैव दूसरों की सहायता करते रहने की योजना बनाते रहें और उन योजनाओं पर अमल भी करते रहें।इस महामारी के समय हम लोगों से जो भी बन पड़े, उसी प्रकार की मदद हम लोग जरूर करें। आर्थिक, शारीरिक और मानसिक जो भी सम्भव हो उसी प्रकार से सहायता पहुँचाते रहें। हमारे गुरुदेव जी का आश्रम अपने आप में बेमिसाल है, जहाँ पर कभी भी भोजन और आवास का कोई भी शुल्क लिया ही नही जाता, गरीबों को निःशुल्क वस्त्र भी प्रदान किया जाता है। कई लोगों को सिर्फ एक समय का किसी गरीब को भोजन कराना पड़े तो उनकी स्थिति अत्यन्त सोचनीय हो जाती है। कई लोग पैसे होने के बावजूद किसी की सहायता नही करते हैं।

आप जब भी किसी की मदद करते हैं तो आपके धन में कोई भी कमी नही होगी बल्कि किसी ना किसी माध्यम से धन की वृद्धि ही होगी। दुनियाँ में अनेक लोग आज भी ऐसे हैं जो दूसरों की सहायता के लिए अपना सर्वस्व झोंकने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोग अपना वर्तमान जीवन तो सवाँरते ही हैं बल्कि अगले कई जन्म सुधार लेते हैं। अतः मनुष्य के जन्म को सार्थक करने का सबसे सही तरीका है कि हम लोग परोपकारी जीवन जीना शुरू कर दें।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक शिव बहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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