Home आध्यात्मिक ढपोल शंख भक्ति

ढपोल शंख भक्ति

डिस्क न्यूज। कहने का तात्पर्य है कि, आजकल सावन के महीने में लोग एक माह शिव जी को जल चढ़ाकर भांग धतूरे चढ़ाकर दिखावे की पूजा कर सोचते है। भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होकर हमारी सुन लेंगे। वरदान दे देंगे।


अरे एक माह क्या कई वर्ष कई जन्म लग जाते है। सच्ची भक्ति को भी तब कभी कुछ प्राप्त होता है। उसमें भी भक्त की तरह तरह से परीक्षा होती है।
कितने ऋषि मुनियों ने बरसों तपस्या की अग्नि में अपने शरीर को तपाया है। ठण्ड वरसात में शरीर को गलाया है। तब जाकर वरदान पाये है। और आज का इंसान चाहता है। हम तो सावन में शिव जी की थोड़ी सी पूजा करके घंटी बजा कर शंख फूंककर भक्त बन गये तो यह बहुत बड़ी भूल है ।गलतफहमी है।


जो नियम पूर्वक हमेशा अपने इष्ट की साधना आराधना में लगे रहते है बिना किसी स्वार्थ के तो भगवान को ख़ुद अपने भक्त की चिंता होती है। कि उसको किस चीज की जरूरत है। और क्या उसके लिये उचित है। वह स्वयं सब देते है । भक्त को अगर कुछ परेशानी भी देते है तो उसमें भी उनके भक्त का हित ही छुपा होता है। लोगो को लगता है कि भक्त परेसान है।पर सच्चा भक्त कभी परेसान नही होता वह तो आत्मा से मन से प्रसन्न अपनी भक्ति में मस्त रहता है।
अतः भावना सच्ची हो समर्पण सच्चा हो तो हमें वैसे भी अपने इष्ट से कुछ मांगने की जरूरत नही होती सब कुछ अपने आप होता जाता है सब कुछ स्वयं मिल जाता है।


और तो दूर से हाथ जोड़कर भगवान को नमस्कार करते है। या ढोंगी भक्ति करते है। कुछ दिन के भक्त बनकर भक्त बनने का नाटक दिखाते है। उनको कही कुछ भी प्राप्त नही होता।


क्योंकि इंसान ,इंसान को धोखे में रख सकते है पर ईश्वर को नही वह तो इंसान के अंदर आत्मा में बैठा है जो अंदर की बात जानता है कि तुम अंदर से कितने काले हो। ढोंग कर रहे हो स्वार्थ की भक्ति कर रहे हो। ईश्वर को इतनी आसानी से पा लिया जाता या खुश कर लिया जाता तो ऋषि मुनियों को क्या पड़ी थी जो तपस्या की अग्नि में तपकर अपने शरीर को कष्ट देते।


भक्ति इतनी आसान होती तो आज सबके पास सब कुछ होता पर सबको मिलता उतना ही है। जितने के तुम पात्र हो जितने के लायक हो। जैसे पढ़ाई के समय जो जितनी पढ़ाई कर परीक्षा में जितना अच्छा पेपर हल करते है। उतने ही अंक मिलते है। पर, कुछ लोग जैसे परीक्षा में नकल करके अच्छे नंबर लाना चाहते है। रात दिन पढ़कर अच्छे नंबर लाने बाले के बराबर होना चाहते है।


इसी प्रकार लोग सोचते है कि रात दिन भक्ति करने बाले भक्ति को अपना जीवन का आधार बनाने बालों की तरह हम सावन में या कभी कभी दिखावे की भक्ति करके भक्त कहलाने लगे या कुछ प्राप्त हो जाये तो ऐसा नही होता। भगवान के यहाँ की परीक्षा में कोई चालाकी या नकल नही चलती क्योंकि वहां भगवान ही परीक्षा का आयोजन करते है। वही परीक्षक है। वही निरीक्षक है। उनकी नजर ही सी सी टी वी कैमरे है ।


वहाँ किसी की चालाकी या नकल नही चलती। सही को मेहनत के सही अंक प्राप्त होते है। और झूठे मतलबी को उसके अनुसार अंक मिलते है। रिजल्ट बिल्कुल सही और हिसाब बिल्कुल बराबर होता है। अतः भक्ति निःस्वार्थ करें ।हमेशा करें तभी कुछ प्राप्त हो सकता है।वर्ना ऐसे ढपोल शंख तो स्वार्थ से बहुत बजते है।,,,,,
जय माता की

लेखक- श्रीमती मंजू द्विवेदी प्रबंध संपादक शक्ति न्यूज

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

मृतक महिला के परिजनों ने लगाए हत्या के आरोप,छत्रसाल चौक पर परिजनों ने किया चक्का जाम, पुलिस की समझाइश के बाद खोला गया जाम

मध्यप्रदेश। छतरपुर जिला मुख्यालय पर मृतक महिला की मां निर्मला कोरी ने आरोप लगाते हुए कहा है...

प्रदेश में खाद की त्राहि-त्राहि, पर मुख्यमंत्री मौन?, बतायें कालाबाजारियों को संरक्षण दे रहा है कौन?: रवि सक्सेना

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और वरिष्ठ प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा मध्यप्रदेश के किसान इस समय...

कलेक्टर ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा, टीबी मरीजों के बेहतर उपचार के लिए दिए निर्देश

छतरपुर जसं। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शनिवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम...

कमिश्नर कार्यालय में फरियादी ने खाया जहर, फंड और पेंशन का पैसा न मिलने से था परेशान, कमिश्नर से समस्या बताने के बाद खा...

कमिश्नर कार्यालय में फरियादी ने खाया जहर। उत्तरप्रदेश। बांदा जिले में फंड और पेंशन...

Recent Comments

%d bloggers like this: