Home शक्ति न्यूज़ खास कोरोना महामारी हम सभी के समक्ष बार-बार आकर खड़ी हो जा रही...

कोरोना महामारी हम सभी के समक्ष बार-बार आकर खड़ी हो जा रही है, हम लोग भी बेफिक्र होकर कान में तेल डालकर सो रहे हैं, प्रकृति के विधान के अनुरूप कार्य ना करने के परिणाम स्वरूप हमें ये सजा मिल रही है

डेस्क न्यूज। एक बार पुनः कोरोना महामारी मौत का तांडव खेलने के लिए तैयार खड़ी है और हम लोग बेफिक्र होकर दुनियाँ भर के दुष्कर्मों को अन्जाम दिए जा रहे हैं। आखिर हम लोग नींद से कब जगेँगे। पिछले वर्ष इसी महीने के आस -पास पूरे विश्व में करोड़ो लोगों को इसी महामारी ने मौत की नींद सुला दिया था।यही महामारी एक बार फिर से अपने पैर पसार रही है।

अब देखना है की फिर से कितनों को अपने चपेट में लेती है। लाखों की मौत के बाद भी हम लोग अपने जीवन में बदलाव नही कर रहे हैं और अपने पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। दरअसल कुछ लोगों को आप कितना भी समझा लो जब तक उन्हें परिणाम नही मिलता तब तक ऐसे लोग मानते नही। समाज में हमारे आपके साथ में ही बहुत सारे रावण, कंस और दुर्योधन रहते हैं। इन लोगों का इलाज प्रकृति सत्ता के द्वारा ही सम्भव है। रावण को भी अपने पराक्रम का अत्यधिक अहंकार हो गया था। कोई भी अपने दिमाग का कितना भी दुरुपयोग कर ले अगर वो व्यक्ति प्रकृति के विधान के प्रतिकूल कार्य कर रहा है तो उसका पतन सुनिश्चित है।

ओसामा बिन लादेन और सद्दाम हुसैन भी अपने आपका बहुत शक्तिशाली समझते थे पर सभी ने उनकी मौत का खेल अपनी आँखो से देखा था।मौत के डर से थोड़े समय के लिए कुछ लोग दुर्व्यसनो से दूर हुए थे। जब डर खत्म हो गया तो फिर से लोगदुष्कर्मों में लिप्त हो गए। प्रकृति के विधान को धीरे-धीरे हम लोग भूलते जा रहे हैं। उसी के कारण ये कष्ट हमें मिल रहा है। जब-जब भी प्रकृति के साथ जंगलराज व्याप्त हुआ है तब-तब प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया है।

आज के समय में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कितनी पाशविकता का व्यवहार हो रहा है। महिलाओं का अनादर हो रहा है। महिलाओं को अपने मनोरंजन का साधन मानकर दुर्व्यवहार किया जा रहा है। नशे का खूब सेवन किया जा रहा है। चीन में दुनिया भर के पशु-पक्षियों का भक्षण किया जा रहा था। जिसके कारण महामारी का रूप इतना बिगड़ गया फिर भी हमारे देश में लोग माँस भक्षण में कमी नही कर रहे हैं।

मनुष्य अपनी मनमानी को त्याग नही पा रहा है तो प्रकृति का प्रकोप हमें झेलना ही पड़ेगा। प्रकृति के विधान के अनुरूप जब तक हम लोग कार्य नही करेंगे तब तक हमें राहत नही मिलेगा। शाकाहारी भोजन, नशे के सेवन से सदा-सदा के दूरी बनाना होगा। चरित्र हीनता से बचना होगा। लोग अपनी मौज मस्ती के चक्कर में अनीति और अन्याय के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं, जिसका परिणाम एक ना एक दिन उन्हें भुगतना होगा। प्रकृति के विधान में देर हो सकता है पर अंधेर कभी भी नही हो सकता है। इस विपत्ति से बचने का एक मात्र उपाय है की हम लोग गुरुदेव जी की विचारधारा के अनुसार माँ दुर्गा जी की साधना-आराधना करें। इसके अलावा अन्य कोई भी मार्ग हम सभी का कल्याण नही कर पाएगा। अब हम लोग नही सतर्क नही हुए तो हमें दुबारा मौका नही मिल पाएगा।

जै माता की जै गुरूवर की

लेखक- शिव बहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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