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मनुष्य जन्म से मृत्यु तक अपने मूल प्रवृत्ति में ज्यादा परिवर्तन क्यूँ नही कर पाता है? माँ गुरुवर क़ी साधनाओं द्वारा व्यापक परिवर्तन सम्भव है

लेखक- शिव बहादुर सिंह फरीदाबाद हरियाणा

डेस्क न्यूज। आप किसी भी परिचित व्यक्ति से 20वर्ष बाद मिलते हैंऔऱ आप अनुभव करते हैं क़ी ये व्यक्ति वैसे का वैसा ही है। इसका प्रमुख कारण ये है क़ी कोई भी मनुष्य अपने स्वभाव में बड़े होने पर भी ज्यादा बदलाव नही कर पाता है। आपके औऱ हमारे परिवार में ऐसे तमाम लोग़ हैं जिनके स्वभाव से लोग़ दुःखी है पर लाचार हैं क्यूँकि उनके पास इसका कोई उपाय नही है। ऐसे लोगों क़ो जीवन भर झेलना पड़ता है।

मनुष्य अपने स्वभाव में चाहकर भी ज्यादा परिवर्तन नही कर पाता है। आप स्वयं देखिए क़ी कुछ लोगों में झूठ बोलने क़ी आदत, कुछ लोगों में कहीं भी किन्हीं कार्यक्रमों में देर से पहुँचने क़ी आदत, अपने आपको दूसरों से अधिक बुद्धिमान बनने क़ी आदत औऱ दूसरों क़ो नीचा दिखाने क़ी आदत, हर समय कुछ ना कुछ खुराफात रचने क़ी आदत, पास में कुछ भी नही है फिर भी बहकी-बहकी बातें करने क़ी आदत में लोग़ परिवर्तन नही कर पाते।

कुछ लोग़ अपने परिवार के लोगों से लड़ाई झगड़े क़ी आदत में चाहकर भी परिवर्तन नही कर पाते हैं। इसके लिए बहुत सारे लोग़ परेशान हैं औऱ चाहकर भी कुछ नही कर पा रहे हैं।हमें दर असल इसकी सच्चाई क़ो समझना पड़ेगा। हम लाख प्रयत्न कर लें पर अपने मूल स्वभाव क़ो बदल नही पाते। जब से हमारे अन्दर से बदलाव नही होगा तब से हम जस के तस ही बने रहेंगे।

कई लोग़ कहते हैं क़ी ये बड़ा चिड़चिड़ा व्यक्ति है सीधे मुँह किसी से बात नही करता, ऐसे व्यक्तियों क़ो आप बोलिए क़ी नित्य एक दुर्गा चालीसा का पाठ शुरू कर दीजिए। धीरे धीरे उस व्यक्ति का मन शान्त हो जायेगा। हम अपने मूल स्वभाव में अगर परिवर्तन करना चाहते हैं तो एक ही माध्यम पूर्ण रूप से कारगर है वो है माँ-गुरुवर क़ी साधना का माध्यम। माँ क़ी निरन्तर साधना द्वारा हम अपने मूल स्वभाव में व्यापक परिवर्तन कर सकते हैं।

माँ क़ी साधना आदमी क़ो आदमी(इन्सान) बना देती है। आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलिए जिसका स्वभाव आप पहले से जानते हों उसके बाद वही व्यक्ति संगठन से जुड़कर माँ क़ी साधना करने लगे थोड़े समय बाद वही व्यक्ति आपको अलग ही नजर आएगा। नियमित साधना करने वाले व्यक्ति में एक ठहराव होगा। शान्ति चित्त होगा। काम औऱ क्रोध पर नियन्त्रण होगा। अनाप शनाप क़ी वार्तालाप से दूर होगा।

आपके परिवार में कोई भी व्यक्ति ज्यादा क्रोधी हो, ज्यादा उल्टे पुल्टे कार्यों में लिप्त हो, उसे माँ क़ी साधना के क्रमों से जोड़िये। देखते-देखते उसका मन परिवर्तित होने लगेगा।स्वभाव में परिवर्तन करने के लिए साधना से बढ़कर अन्य कोई भी उपाय कारगर है ही नही। बड़े से बड़ा डॉक्टर भी ऐसा करने क़ी क्षमता नही रखता है क्यूँकि ये हमारी आपकी आत्मा से जुड़ा मामला है।

आत्मा पर पड़े हुए आवरण क़ो गुरुदेव जी द्वारा निर्देशित माँ क़ी साधना द्वारा ही हटाया जा सकता है। अतः अन्य भटकावों से अलग हटकर हम अपने मूल स्वभाव में परिवर्तन करके जीवन क़ो सुचारू रूप से सँचालित कर सकते हैं।

जै माता क़ी जै गुरुवर क़ी

1 COMMENT

  1. बिल्कुल सही कहा अंकल जी आपने सादर जय माता की जय गुरुवर की 🙇‍♂️🙏🙏

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