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अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई) पर विशेष: जान हथेली पर लेकर इंसानी जानें बचा रही नर्सें, कोरोना काल में अब तक 13 कोरोना पॉजिटिव महिलाओं का प्रसव कराया,कोरोना से जूझ रहे मरीजों की देखभाल में खुद भी हो रही हैं पॉजिटिव,घर वालों के डर को भी दूर करने की करती हैं कोशिश, परिवार का रखती हैं ख्याल

उत्तरप्रदेश। हमीरपुर जिले में कोरोना महामारी के बीच अस्पतालों की नर्से अपनी जान हथेली पर रखकर मरीजों की सेवा में लगी हैं। कोरोना पॉजिटिव महिला का प्रसव हो या फिर कोरोना से जूझते इंसान, सबका इस बुरे वक्त में नर्से बखूबी साथ दे रही हैं। आज विश्व नर्स दिवस पर जनपद की कुछ ऐसी ही जांबाज नर्सों के बारे में बताते हैं जो खतरों से जूझते हुए अपने फर्ज को अंजाम दे रही हैं।

कोविड एल टू हॉस्पिटल कुरारा में ड्यूटी देने वाली नर्स प्रियंका बताती हैं इस कठिन समय में ड्यूटी देते वक्त जहां मरीज की जिंदगी का ख्याल होता है वहीं खुद के भी पॉजिटिव होने का खतरा बना रहता है। एक बार खुद पॉजिटिव भी हो चुकी हैं। उससे उबरने के बाद फिर से ड्यूटी दे रही हैं। 25 अप्रैल से लगातार 14 दिन तक ड्यूटी देने के बाद दो दिन के लिए क्वॉरंटाइन हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस समय खुद भी बचना है और दूसरों को भी इस महामारी से बचाना है, उसी उद्देश्य के साथ काम कर रही हैं। लेकिन कभी अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं भागीं।

जिला महिला अस्पताल की नर्स पूनम भी मरीजों के बीच अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम दे रही हैं। पूनम ने बताया कि घर वाले कोरोना काल में डरे रहते हैं। लेकिन जब वह इस पेशे में आई थी तो यही सोचकर आई थी कि मरीजों का जीवन बचाना है। आज देश में कोरोना महामारी फैली हुई है। रोज लोगों की जानें जा रही हैं, ऐसे में वह अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से अंजाम दे रही हैं।

राठ सीएचसी की नर्स मेंटर सुनीता बताती हैं कि उनके अस्पताल में पांच कोरोना पॉजिटिव महिलाओं का हाल के दिनों में सुरक्षित तरीके से प्रसव करवाया गया। उन्होंने बताया कि जैसे ही कोई कोरोना पॉजिटिव गर्भवती आती है तो एकदम से माहौल बदल जाता है। हर कोई घबराता है, मगर ऐसे माहौल में वह लोग चीजों को हैंडल करती हैं और स्थिति संभालती हैं।

इसी तरह सुमेरपुर पीएचसी की नर्स मेंटर रहनुमा, मौदहा की सताक्षी भी इस कोरोना काल में अपनी फिक्र न करते हुए मरीजों की सेवा में लगी हुई हैं। इन दोनों का कहना है कि इस बीमारी ने बहुत कुछ सिखाया है। ऐसा बुरा वक्त शायद कभी दोबारा देखने को मिले।

जिला क्वालिटी इम्प्रूवमेंट मेंटर आकांक्षा यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद से महिलाओं के प्रसव को लेकर खास एहतियात बरती जा रही है। अगर कोई महिला पॉजिटिव आती है तो फिर पूरी सावधानी के साथ उसका प्रसव कराया जाता है। अब तक जिले में 13 कोरोना पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं। जिसमें आठ प्रसव जिला अस्पताल में और पांच सीएचसी राठ में हुए हैं। सभी नर्से टीम भावना के तहत काम कर रही हैं और कोविड काल में मरीजों की सेवा में लगी हुई हैं।

(हमीरपुर ब्यूरो अजय शिवहरे)

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