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श्री कृष्णा विश्वविद्यालय ने विश्व पर्यावरण दिवस पर किया वेबीनार, पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशीलता एवं आचरण में परिवर्तन जरूरी – मुख्य वक्ता गोपाल आर्य जी

मध्यप्रदेश। छतरपुर जिले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार श्री कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पारिस्थितिकी प्रबंधन विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता माननीय गोपाल आर्य जी अखिल भारतीय संयोजक पर्यावरण गतिविधि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नई दिल्ली वक्ता डॉ यू एन सिंह डी वी कॉलेज उरई डॉ कुलदीप द्विवेदी प्रोफेसर पर्यावरण विज्ञान एमिटी यूनिवर्सिटी ग्वालियर विश्वविद्यालय चेयरमैन डॉ पुष्पेंद्र सिंह गौतम कुलाधिपति डॉ बृजेंद्र सिंह गौतम कुलपति डॉ अनिल कुमार धगट उपकुलपति श्री गिरीश त्रिपाठी कुलसचिव श्री विजय सिंह संकाय अध्यक्ष विभाग अध्यक्ष प्राध्यापक एवं छात्र छात्राएं ऑनलाइन सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की आराधना से हुआ विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए डॉ पुष्पेंद्र सिंह गौतम ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी।

इसे 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था। 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय की पर्यावरणीय उपलब्धियां जिनमें इकोफ्रेंडली केंपस सोलर ऊर्जा का उपयोग वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम एवं महामारी के दौरान पीड़ितों की मदद संबंधी बात कही। मुख्य वक्ता गोपाल आर्य जी ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशीलता एवं आचार में परिवर्तन लाने पर जोर दिया।चंद्रगुप्त मौर्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया विश्वविद्यालय का प्राध्यापक अगर एक छात्र को भी संस्कारित कर देता है तो वह देश का भाग्य बदल देता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम वृक्ष लगाना देशभक्ति मानते थे। प्रकृति से जो हम लेते हैं उसके एवज में हमें प्रकृति को देना चाहिए।

विश्व में प्रतिवर्ष जितने पेड़ लगाए जाते हैं उससे कहीं ज्यादा वृक्ष काटे जाते हैं। वृक्ष से हमारा जीवन ही नहीं अपितु हजारों जीव जंतु पलते हैं। वृक्षों के अंधाधुंध कटाई से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग जलवायु परिवर्तन तथा ओजोन ओजोन के क्षरण जैसी घटनाएं भविष्य में सामने आएंगी। संवेदनशीलता पर चर्चा करते हुए आपने बताया कि हमारे पूर्वज जो वृक्ष लगाते थे उनके फल आगामी पीढ़ी तक उपयोग होते थे । जब हम सुबह सोकर के उठते थे तो धरती मां के पैर छूते थे यह हमारी भारतीय संस्कृति रही है । वर्तमान परिपेक्ष में हम पृथ्वी को प्लास्टिक से प्रदूषित करते जा रहे हैं। आपने इको ब्रिक्स
के बारे में विस्तार से बताया कि ब्रिक्स का निर्माण उपयोग की गई बिसलरी बोतल में पॉलिथीन को भरकर कुछ केमिकल के साथ ब्रिक्स तैयार हो जाती है।

असंतुलित पर्यावरण का समाधान आचरण से हो सकता है। हमें नहाने समय सीमित पानी का उपयोग और बिजली की बचत करना चाहिए अनावश्यक रूप से वातानुकूलित यंत्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जल संरक्षण एवं जैव विविधता पर ध्यान आकर्षित करते हुए आपने बताया कि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आगामी दस वर्ष में अगर मानवीय कृत्य इसी तरह से चलता रहा तो मानव जीवन संकट में आ जाएगा। पानी बचाने हेतु एयर मिस्ट को कारगर बताया हमें अपने स्तर से पक्षियों को पानी तथा दाना की व्यवस्था करना चाहिए एवं पंचवटी लगाकर तुलसी तथा पीपल जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों का रोपण करके हम प्रकृति को संतुलित कर सकते हैं।

कुलाधिपति डॉ बृजेन्द्र सिंह गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोरोना काल में हमें वृक्षों की महत्वता का ज्ञान हो गया है हमें वाहन का समुचित प्रयोग करना चाहिए जिससे हम वायु प्रदूषण को रोक सकते हैं । आपने बताया कि विश्वविद्यालय के चेयरमैन के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 100 पौधों को लगाया जाता है जिसका संरक्षण एवं संवर्धन किया जाता है । मुख्य वक्ता गोपाल जी के उद्बोधन में चर्चा के दौरान इको ब्रिक्स को विश्वविद्यालय में बनाकर शहर को पॉलिथीन मुक्त करने हेतु कार्य किए जाने का संकल्प लिया और भविष्य में विश्वविद्यालय इस दिशा में काम करेगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अनिल कुमार धगट ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रबंधन शब्द अपने आप में पूरी बात कहता है। उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है । मानव जीवन हमेशा से ही पारिस्थितिक तंत्र का उपयोग करता रहा है। प्रोफेसर यू एन सिंह ने अपने प्रजेंटेशन में बताया कि व्यवहारिक पक्ष में चूक होने से पर्यावरण असंतुलित होता रहा है जिसके गंभीर परिणाम हमारे सामने आने लगे हैं।

मानव जाति ने पहले पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया फिर उसका क्षरण किया और अंत में उसको नष्ट होने की कगार पर पहुंचा दिया। डॉ कुलदीप द्विवेदी ने इकोसिस्टम को संरक्षित एवं संवर्धित करने की बात पर जोर देते हुए बताया कि इससे हमारा सामाजिक एवं आर्थिक स्तर बढ़ेगा महामारी के युग में लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं जिसकी भरपाई आगे आने वाले समय में स्वस्थ पर्यावरण के द्वारा हो सकता है। विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों को अपने अपने स्तर पर वृक्षारोपण करते रहना चाहिए जो आगामी समय में प्रकृति को संतुलित करेंगे।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ अश्वनी कुमार दुबे बताया कि पर्यावरण को सुधारने हेतु यह दिवस महत्वपूर्ण है जिसमें पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालता हैं। लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना है। आभार प्रदर्शन डॉ अनुज भदौरिया ने किया एवं तकनीकी सहयोग मोहित कुमार ने दिया।

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