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मनुष्य जिस प्रकार से अपने कमाए हुए धन क़ो अपने बैंक में जमा करता है और वो धन समय-समय पर उसके काम आता है, ठीक उसी प्रकार से मनुष्य क़ो माँ गुरुवर की नियमित साधना करके उसको साधना का बैंक बनाकर उसमे संचित ऊर्जा का लाभ जीवन पर्यन्त तक लेते रहना चाहिए

डेस्क न्यूज। हम लोग अपने पूरे जीवन क़ो धन कमाने में ही व्यतीत कर देते हैं। जब से जन्म होता है, तभी से शिक्षा दीक्षा भी धन अर्जन के लिए ही करते हैं। जब हम लोग कोई नौकरी या व्यवसाय करने लगते हैं तो उससे प्राप्त आमदनी क़ो आपात काल की आवश्यकता के लिए बैंक में जमा करके रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर हमारे काम आ सके। धन का संचय सिर्फ इस जन्म के लिए काम आएगा। य़े धन हमारे स्थूल के जीवन में काम आएगा। धन महत्वपूर्ण तो है पर सब कुछ इसी से हो जाए ऐसा बिल्कुल नही है। भौतिकवाद में हम इतने लिप्त हैं की अपने जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष क़ो भूल बैठे हैं। स्थूल के साथ साथ सूक्ष्म का जीवन भी अत्यन्त आवश्यक है।

सूक्ष्म क़ो हम अगर मजबूत बनाएंगे तो हमें इस जीवन के साथ -साथ अगले जन्मों में भी लाभ मिलेगा। माँ गुरुवर की साधना से प्राप्त ऊर्जा से जीवन के समस्त विकारों पर विजय प्राप्त किया जा सकता है। हम सभी क़ो अपने-अपने साधना क़ो संचित करने के लिए अपने मन में ही साधना का बैंक बनाना चाहिए। जब हम किसी क़ो दुर्गा चालीसा का पाठ शुरू करा देंगे, किसी क़ो गुरू मंत्र, शक्ति चेतना मंत्र शुरू करा देंगे, माँ-ॐ का जप शुरू करा देंगे और वीरवार (गुरुवार) का व्रत शुरू करा देंगे और किसी क़ो महा आरती में ले जाएँगे तो उससे जो भी हमें लाभ मिलेगा हमारे साधना के बैंक में जमा होता रहेगा।

आप देखेंगे की कुछ ही वर्षों में आपके जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन होने लगेगा। कोई भी व्यक्ति जब आपके द्वारा बताए हुए गुरू मार्ग का पालन करने लगता है तो साधना करने वाले व्यक्ति क़ो तो लाभ (ऊर्जा) मिलता ही है, पर बताने वाले व्यक्ति क़ो भी लाभ अवश्य प्राप्त होता है। गुरुदेव जी ने लाभ लेने के अनेक कार्य हम लोगों क़ो प्रदान किए हैं। हममे से ज्यादा लोग स्वयं ही लाभ उठाकर चुपचाप बैठ जाते हैं। शिविर में बहुत कम लोग अपने साथ नए व्यक्तियों क़ो ले जाते हैं, जबकि लाभ प्राप्त करने का सबसे शशक्त माध्यम यही है। जब कोई व्यक्ति दीक्षित होकर समाज क़ो गुरुदेव जी की विचारधारा से अवगत कराने लगेगा तो कितनों का जीवन बदल जाएगा। गुरुदेव जी के प्रत्येक क्रमों में लाभ समाहित है।

हमारे समाज में अनेक लोगों में य़े आम धारणा बन चुकी है कि पूजा पाठ से क्या होगा? कई लोग कहते हैं कि हम तो अपने काम और अपने परिवार क़ो ही प्राथमिकता देते हैं, धर्म और आध्यात्म हमारे लिए महत्वहीन है। हमारी बहुत बड़ी भूल है जो हम ऐसा सोचते हैं। हमारे जीवन क़ो हमारी आत्मा संचालित करती है पर हमारे आत्मा क़ो अध्यात्म के द्वारा ही निर्विकार किया जा सकता है।

माँ गुरुवर की साधना द्वारा ही आत्मा पर पड़े हुए आवरण क़ो दूर किया जा सकता है। काम जरूरी है परिवार जरूरी है पर साधना आराधना सबसे ज्यादा जरूरी है। साधना करने से विवेक जागृत होगा, तभी हमें सही और गलत के बारे में पता चलेगा। हम अपने साधना के बैंक में जितनी ऊर्जा जमा करते जाएँगे उतना ही अधिक हमारा जीवन सुखमय होता जाएगा। जब किसी कुँए में आप पानी निकालना बन्द कर देंगे तो थोड़े समय बाद पानी में बदबू आने लगता है। इसी तरह साधना विहीन मनुष्य पशु के समान होता है अर्थात जीवन का मूल सार यही है की हम जब तक जिएँ तब तक नियमित माँ गुरुवर की साधना करते रहें।साधना के साथ साथ झूठ-फरेब,छल-प्रपंच से भी दूर रहना होगा,तभी जीवन सार्थक होगा।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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