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मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने झोलाछाप डॉक्टरों को बताया देवदूत, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य रक्षक व स्वास्थ्य सेवक बनाने की मांग, दिया जाए कोरोना योद्धा का दर्जा, इन्होंने गांव-गांव में लोगों को दवाई देकर संक्रमण काबू करने में सहयोग किया

मध्यप्रदेश। सतना जिले की मैहर विधानसभा से भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी एक बार फिर ​सीएम शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखने के बाद सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने झोलाछाप डॉक्टरों की वकालत करते हुए उनको देवदूत बताया है। सीएम से कहा है कि इन देवदूतों को स्वास्थ्य रक्षक और स्वास्थ्य सेवक बनाकर कोरोना योद्धा का दर्जा दिया जाए, क्योंकि आपदा के दौर में इन्होंने गांव-गांव आम जनता की दवाई कर कोरोना को काबू करने में सहयोग किया है।

विधायक नारायण त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को लिखा झोलाछाप डॉक्टरों को स्वास्थ्य रक्षक व स्वास्थ्य सेवक बनाने के लिए पत्र।

गरीब वर्ग पैसे के आभाव में गांव में ही छोटी-मोटी खांसी-बुखार को इनकी दवा से ही कंट्रोल कर लिया था। ऐसे में इनको समुचित प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य विहीन क्षेत्रों में उपचार के लिए तैनात करना चाहिए। जो लोग इनको झोलाछाप डॉक्टरों से संबोधित करते है। उनको अब कोरोना महामारी के बाद से देवदूत बोलना चाहिए।

विधायक ने क्या लिखा पत्र में-


31 मई के पत्र में कहा कि हम आप सभी ग्रामीण परिवेश से हैं। साथ ही यहां कि वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से जानते हैं। हमने महामारी के दौरान गांव-गांव जाकर करीब से देखा है कि झोलाछाप डाक्टरों ने सर्दी, खांसी, बुखार जैसी छोटी मोटी बीमारियों पर अंकुश लगाने का काम किया है। ऐसे ग्रामीण मरीज जिनके पास शहर के अस्पताल जाने और इलाज कराने के पैसे नहीं होते, उनका सहारा यही झोलाछाप डाक्टर बने हैं। हालांकि इनको इंजेक्शन लगाने, डिप लगाने और सामान्य दवाइयों को देने का अनुभव होता है। जबकि इनके पास भी छोटी-मोटी डिग्री-डिप्लोमा होता है। इनका उपयोग प्राथमिक उपचार व जागरूकता के लिये किया जाना उचित होगा।

प्रशिक्षण देकर लिया जा सकता है सही काम-


मैहर विधायक ने आगे कहा कि सभी झोलाछाप डॉक्टरों का सर्वे कराया उचित प्रशिक्षण दिया जाए। फिर इनको स्वास्थ्य विभाग के तंत्र से जोड़ा जाए। इसके बाद सही दिशा में काम लिया जाए। डिग्रीधारी शासकीय/अशासकीय चिकित्सकों ने कोरोना महामारी में जब महत्वपूर्ण निभाई तो शासन, समाज सबने उनका सम्मान किया है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना महामारी के दौरान सराहनीय काम करने वाले चिकित्सक सिर्फ झोलाछाप ही बने हुए है। ऐसे में मेरा अनुरोध है कि स्वास्थ्य रक्षक या स्वास्थ्य सेवक मानकर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में उपयोग कर कोरोना योद्धा का दर्जा दिया जाए।

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