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रचनात्मक कार्यों के दौरान प्राप्त हुए नकारात्मक प्रतिक्रिया से हम विचलित हो जाते हैं-आखिर क्यूँ

डेस्क न्यूज। जब भी हम लोग गुरुवर जी द्वारा निर्देशित संगठन की विचारधारा क़ो दूसरों से शेयर करते हैं तो सामने से कभी-कभी नकारात्मक जवाब आता है तो हम लोग परेशान होकर अन्य लोगों क़ो बताना बन्द कर देते हैं। कई लोग दूसरों क़ो बताने में संकोच करते हैं। कई लोग अपना ईगो इतना बड़ा कर लेते हैं की सामने वाला हमारी बात नही माना तो हमारी बेइज्जती हो जाएगी।

कई लोग ये सोचते हैं की अपना भला तो हो ही रहा है दूसरों का झंझट कौन मोल ले। कई लोगों क़ो बताने में शर्म महसूस होती है। मेरे मुताबिक उपरोक्त सारे लोग ही सही नही कर रहे हैं। अगर कोई मरीज डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर क्या उसे एक बार की दवा देने के बाद ना ठीक होने पर उसे क्या मना कर देता है? नही ऐसा नही होता।


डॉक्टर बार- बार दवा बदलकर उस मरीज क़ो अंततः ठीक करने का भरपूर प्रयास करता है। ठीक इसी प्रकार से हम लोगों क़ो भी अधिक से अधिक लोगों क़ो गुरुवर जी की विचारधारा बताने की बहुत बड़ी जरूरत है। क्या हमारे आपके बच्चे एक बार ही समझाने पर ही हमारी बात मान लेते हैं? नही! हमें बार-बार उनको समझाना पड़ता है।अगर गुरुवर जी ने भी हमारी आपकी तरह ही सोचा होता तो आज करोड़ों परिवार दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर होते ।

गुरुवर जी के जिस आश्रम क्षेत्र क़ो आज विश्व जगत की धर्म धुरी कहा जाता है उसी आश्रम क़ो कभी अँधियारी क्षेत्र कहा जाता था, आज गुरुवर जी ने अपने कठिन परिश्रम औऱ तप साधना के कारण देदिप्यमान कर दिया। किसी नए व्यक्ति क़ो आप बताओगे तो सहसा विश्वास नही कर पाएगा। हमें अपने प्रयासों में रंच मात्र भी कमी नही रखना है। हमें सँकल्प लेना चाहिए की कितना भी लोग मना करें, तिरस्कार करें अपमानित करें, हम अपने कार्य क़ो कभी भी नही रोकेंगे। दरअसल जितना बड़ा हमारा स्वयं का विश्वास होता है उतने ही विश्वास के साथ लोग संगठन से जुड़ते चले जाते हैं।


अपने आपको दृढ़ विश्वासी बनाने की अत्यधिक आवश्यकता है। कई लोग सोचते हैं की हमारा सब सही चल रहा है दूसरों की आफत कौन ले, ये सरासर गलत है। माँ गुरुवर की कृपा प्राप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम ये है की हम अपने भले के साथ-साथ दूसरों के भले के लिए भी सोचें।जितना ज्यादा आप परोपकार की भावना से कार्य करेंगे उतना ही तीव्रता से आपका चतुर्दिक विकास होना प्रारम्भ हो जायेगा। आप चाहें तो आजमाकर स्वयम देख सकते हैं। जीवन का बहुत बड़ा सूत्र है की कर भला तो हो भला।


हमें अपनी मानसिक दुर्बलताओं क़ो दर किनार करते हुए आज से ही तय करना है की हमें अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्रों, परिचितों औऱ जो भी हमसे मिलेगा सभी क़ो गुरुवर की विचारधारा क़ो बताना ही बताना है। आप हमेशा ही ये मानकर बताया कीजिए की हम सामने वाले व्यक्ति के हित के लिए बता रहें हैं अगर सामने वाला समझता है तो ठीक है अगर नही भी समझता है तो औऱ दूसरे लोग हैं जिन्हें हम समझा सकते हैं। किसी की मदद करने का सर्वोत्तम उपाय यही है। शुरुआत में गुरुवर जी के छोटे छोटे क्रमों से जोड़िये।

जैसे दुर्गा चालीसा का पाठ, गुरु मंत्र, माँ का मंत्र ,माँ ॐ का जप औऱ वीरवार का व्रत,शक्ति जल का प्रयोग करना, अपने घरों पर शक्ति ध्वज का लगाना, अपने माथे पर कुमकुम का तिलक लगाना ,महा आरती में ले आनाआदि। ये सारे सशक्त माध्यम हैं। कई बार कई लोग इसलिए बात नही मानते हैं की उन्होनें किसी औऱ गुरु से दीक्षा लिया हुआ है। इसके बावजूद उन्हें इन क्रमों का पालन करना चाहिए क्यूँकि इससे ज्यादा लाभदायक क्रम इस धरती पर है ही नही।


समाज में अधिकाँश लोग भटकाव का जीवन जी रहे हैं। उन्हे सही मार्ग बताना हमारा आपका प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। गुरुवर ने कहा है की आप कोई भी स्वादिष्ट मिठाई या पकवान खुद खा लीजिए औऱ यही मिठाई या पकवान कुछ जरूरतमँद लोगों में बाँट दीजिए ,आप देखेंगे की आपको चौगुना आनन्द प्राप्त होगा। यही जीवन का मूल सार है। सँकुचित जीवन नही जीना चाहिए। विस्तार प्रकृति का नियम है। आप दूसरों क़ो जितना खुशियाँ प्रदान करेंगे, माँ गुरुवर आपको अत्यधिक खुशियाँ प्रदान करेंगे। गुरुवर जी के आश्रम में रहने औऱ खाने का कोई भी किसी भी प्रकार का शुल्क नही है। आखिर हम लोग भी तो गुरुवर जी के शिष्य हैं इसलिए हम लोग भी लोगों के हितों के लिए कार्य करें।

जै माता की जै गुरुवर की

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