Home शक्ति न्यूज़ खास मनुष्य चाहकर भी अपने मूल स्वभाव में ज्यादा परिवर्तन नही कर पाता...

मनुष्य चाहकर भी अपने मूल स्वभाव में ज्यादा परिवर्तन नही कर पाता क्यूँकि हमारे अन्दर वो क्षमता ही नही है परन्तु हम गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र महाराज जी द्वारा निर्देशित मार्ग का अक्षरशः पालन करें तो हम विलक्षण प्रतिभाशाली बन सकते हैं

डेस्क न्यूज। हम सभी लोग कितना भी प्रयत्न कर लें पर अपने स्वभाव में थोड़ा बहुत बदलाव कर पाते हैं। अनेक लोग अपने खुद के स्वभाव से ही परेशान हैं। उदाहरण के लिए कोई अपने क्रोध के कारण परेशान है। ना चाहते हुए भी अनावश्यक क्रोध के कारण पूरा परिवार दुखी रहता है। कई लोग काम वासना से पीड़ित होते हैं। उन्हें पता होता है की ये गलत कार्य है पर उन्हें अपने स्वभाव पर नियंत्रण नही है ,जिसके कारण उन्हें पश्चाताप भी होता है। कई लोग लालची स्वभाव के कारण बदनामी झेल रहे होते हैं।

कई लोग मोह से ग्रसित होकर उल्टे कार्य करते रहते हैं। कभी आप किसी हत्या के आरोपी से और बलात्कारी से बात करके उनसे पूछिए की आपने ये गलत कार्य क्यूँ कर दिया तो उनका जवाब होगा की मैं गलत कार्य करते समय अपने आपको रोक नही पाया पर इस गलत कार्य का हमें अत्यधिक पछतावा हैं। अधिकाँश मनुष्य अपने गलत स्वभाव से बेहद परेशान हैं, पर उनके पास कोई समाधान नही है जिससे उस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

कई महिलाएं अपने पतियों के क्रोध के कारण बहुत दुखी हैं। कई महिलाएं अपने पतियों की चरित्र हीनता के कारण अत्यन्त दुखी हैं पर लाचार हैं। गुरुदेव जी ने कहा है कि काम, क्रोध, लोभ और मोह पर नियंत्रण पाया जा सकता है।हम लोग स्वयं से सारी जिन्दगी लगा दें पर ज्यादा परिवर्तन नही कर पाएंगे। आप किसी व्यक्ति से कई बर्षों बाद मिलिए आप देखेंगे कि वो व्यक्ति वैसे का वैसा ही है, उसके स्वभाव में कोई बदलाव हुआ ही नही। दरअसल हमारा स्वभाव हमारे ग्रहों की प्रतिकूलता और अनुकूलता के ऊपर निर्भर होता है।

जैसे ग्रहों की स्थिति होगी उसी तरह का हमारा जीवन होगा। इन स्थितियों में व्यापक परिवर्तन किया जा सकता है अगर हम लोग चाहें तो। गुरुदेव जी की विचारधारा में अपार शक्ति समाहित है। गुरुदेव जी द्वारा बताए हुए माँ की साधना के क्रमों से हमारे मूल स्वभाव में बहुत बड़ा बदलाव किया जा सकता है। कुछ वर्षों की नियमित साधना के द्वारा मनुष्य के स्वभाव में अप्रत्याशित परिवर्तन सम्भव है। आपको यकीन ना हो तो आप स्वयं साधना करके देख सकते हैं।माँ दुर्गा जी की नियमित साधना द्वारा किसी भी अपराधी स्वभाव के व्यक्ति को भी सही किया जा सकता है। क्रोध पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

काम वासना के वेग को कम किया जा सकता है। गुरुदेव जी ने कहा है की वासना को माँ की साधना द्वारा ही नियन्त्रित किया जा सकता है अन्य कोई भी मार्ग इस धरती पर है ही नही।नियमित दुर्गा चालीसा का पाठ, माँ ॐ का उच्चारण, गुरु मन्त्र और शक्ति चेतना मन्त्र का जप करने से हमारे स्वभाव में व्यापक परिवर्तन सम्भव है। जब तक हम लोग अपने आचार व्यवहार में परिवर्तन नही करेंगे तब तक हम प्रगति नही कर पाएंगे।ज्यादातर प्राणी इस विकट समस्या के शिकार हैं पर किसी के पास भी समाधान नही है।गुरुदेव जी द्वारा बताए हुए क्रमों का पालन करने से समाधान प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान की महामारी भी मनुष्यों के बुरे स्वभाव के कारण ही उत्पन्न हुई है। असामयिक कष्ट से छुटकारा प्राप्त करने का एक मात्र उपाय यही है कि हम लोग गुरुवर की विचारधारा पर अमल करना प्रारम्भ कर दें।

जै माता की जै गुरुवर की

लेखक- शिवबहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

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