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जय जवान जय किसान के नारे को साकार करने के लिए बुंदेलखंड की धरती पर आए प्रधानमंत्री मोदी, महोबा जिले में PM ने शुक्रवार को अर्जुन सहायक परियोजना का लोकार्पण किया

उत्तरप्रदेश। महोबा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महोबा में अर्जुन सहायक परियोजना का लोकार्पण किया। पीएम ने महोबा में कहा-बुंदेलखंड के विकास के काम रुकने वाले नहीं। उन्होंने जनसभा में कहा कि बुंदेलखंड के विकास के काम रुकने वाले नहीं हैं, लोग चाहे जितनी हाय तौबा मचा लें। हम गुजरात के कच्छ जैसी सफलता के लिए बुंदेलखंड में भी जुटे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी सरकारों ने बुंदेलखंड के साथ जैसा बर्ताव किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्जुन बांध का लोकार्पण किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।


हमारी प्राथमिकता में किसानः मोदी
मोदी ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से हमने अब तक 1 लाख 62 हजार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे हैं, जबकि परिवारवादियों की सरकारें किसानों को सिर्फ अभाव में रखना चाहती थीं। वो किसानों के नाम से घोषणाएं करते थे, लेकिन किसान तक पाई भी नहीं पहुंचती थी।

पीएम मोदी ने कार्यक्रम स्थल में जाने से पहले अर्जुन सहायक परियोजना के प्रोजेक्ट को देखा। उनके साथ सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी रहीं।

गुजरात का दिया उदाहरण-
मोदी ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं जिस गुजरात से आता हूं, वहां की जमीनी हकीकत कुछ और है। पहले के गुजरात की परिस्थितियां बुंदेलखंड से बिल्कुल अलग नहीं थी, इसलिए आपकी तकलीफ को समझता हूं। आज गुजरात में रेगिस्तान तक भी पानी पहुंच रहा है। जैसी गुजरात में सफलता वैसी ही सफलता के लिए बुंदेलखंड में जुटे हुए हैं। मेरे गुजरात में कच्छ में लगातार पलायन हो रहा था, लेकिन जब मुझे सेवा करने का मौका मिला। आज कच्छ तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों के लोग कच्छ आ रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कहता हूं कि हम बुंदेलखंड को फिर से नई ताकत दे सकते हैं।

बेटियां ब्याहने से कतराते थे लोग-
पीएम मोदी ने कहा कि यह पानी की समस्या दशकों पुरानी है, इस वजह से पलायन होता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोगों को पता है कि समय के साथ यही क्षेत्र पानी की चुनौतियों और पलायन का केंद्र कैसे बन गया? क्यों इस क्षेत्र में लोग अपनी बेटी को ब्याहने से कतराने लगे? क्यों यहां की बेटियां पानी वाले क्षेत्र में शादी की कामना करने लगीं? इन सवालों के जवाब महोबा के लोग, बुंदेलखंड के लोग जानते हैं।

सिंचाई व पेयजल की किल्लत को दूर करने के लिए बांधों को आपस में जोड़कर अर्जुन सहायक परियोजना तैयार की गई है। यह कुछ नदी जोड़ो परियोजना की तरह है। इसे पूरा होने में 12 साल लगे, हालांकि अभी भी काम अधूरा है।

प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी बातें-
1- मोदी बोले- मैं जिस गुजरात से आता हूं, वहां की जमीनी हकीकत कुछ और है। पहले के गुजरात की परिस्थितियां बुंदेलखंड से बिल्कुल अलग नहीं थी, इसलिए आपकी तकलीफ को समझता हूं। आज गुजरात में रेगिस्तान तक भी पानी पहुंच रहा है। जैसी गुजरात में सफलता वैसी ही सफलता के लिए बुंदेलखंड में जुटे हुए हैं।
2- मेरे गुजरात में कच्छ में लगातार पलायन हो रहा था, लेकिन जब मुझे सेवा करने का मौका मिला, आज कच्छ तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों के लोग कच्छ आ रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कहता हूं कि हम बुंदेलखंड को फिर से नई ताकत दे सकते हैं।
3- पिछली सरकारों ने प्रदेश में काम नहीं किया। योगी सरकार ने परियोजना पर काम किया। पहले की सरकारों ने सिर्फ अपना भला चाहा। 2017 में योगी सरकार आने के बाद अर्जुन सहायक परियोजना पर काम शुरू किया गया। बुंदेलखंड की धरती पर कई बदलाव हुए। पानी को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। माफिया पर यूपी में बुलडोजर चल रहा है। पहले जंगल माफिया के हाथ में था।
4- बुंदेलखंड को लूटकर पहले की सरकार चलाने वालों ने अपने परिवार का भला किया। आपका परिवार बूंद-बूंद के लिए तरसता रहे, इससे उनको कोई सरोकार नहीं रहा। समय के साथ यही क्षेत्र पानी की चुनौतियों और पलायन का केंद्र कैसे बन गया? क्यों इस क्षेत्र में लोग अपनी बेटी को ब्याहने से कतराने लगे, क्यों यहां की बेटियां पानी वाले क्षेत्र में शादी की कामना करने लगीं। इन सवालों के जवाब महोबा के लोग, बुंदेलखंड के लोग जानते हैं।
5- केन-बेतवा लिंक का समाधान भी हमारी ही सरकार ने निकाला है, सभी पक्षों से संवाद करके रास्ता निकाला है। मैंने दशकों तक बुंदेलखंड के लोगों ने लूटने वाली सरकारें देखीं हैं। पहली बार बुंदेलखंड के लोग, यहां के विकास के लिए काम करने वाली सरकार को देख रहे हैं। वो उत्तर प्रदेश को लूटकर नहीं थकते थे, हम काम करते-करते नहीं थकते हैं।
6- बुंदेलखंड के विकास के काम रुकने वाले नहीं हैं, लोग चाहे जितनी हाय तौबा मचा लें। बुंदेलखंड के साथ जैसा बर्ताव किया गया, उसे कभी भूल नहीं सकते हैं।
7- बीते 7 सालों में हम कैसे सरकार को दिल्ली के बंद कमरों से निकालकर देश के कोने-कोने में ले आए हैं, महोबा उसका साक्षात गवाह है। ये धरती ऐसी योजनाओं, ऐसे फैसलों की साक्षी रही है, जिन्होंने देश की गरीब माताओं-बहनों-बेटियों के जीवन में बड़े और सार्थक बदलाव किए हैं।
8- यहां से पूरे देश के लिए उज्ज्वला योजना की दूसरे चरण की शुरुआत की थी। कुछ साल पहले यहीं से मुस्लिम बहनों से वादा किया था कि तीन तलाक की परेशानी से मुक्ति दिलाकर रहूंगा, वह वादा पूरा हो चुका है। अर्जुन सहायक परियोजना जल संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण है।
9- गुलामी के उस दौर में भारत में नई चेतना जगाने वाले गुरुनानक देव जी का आज प्रकाश पर्व भी है। मैं देश और दुनिया के लोगों को गुरु पूरब की भी शुभकामनाएं देता हूं। आज ही भारत की वीर बेटी, बुंदेलखंड की शान, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती भी है।
10- सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुंदेलखंड का पराक्रम दुनियाभर में जाना जाता है। आज बुंदेलखंड आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हर घर नल की योजना के माध्यम से पेयजल की समस्या का समाधान हो रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस की भी सौगात मिलने वाली है।
11- 2014 में करिश्माई नेतृत्व मिला है। बुंदेलखंड की सूखे की समस्या का समाधान होना एक सपना था। अर्जुन सहायक परियोजना से पानी की पूर्ति होगी।

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुंदेलखंड के महोबा, हमीरपुर व बांदा जिलों के 168 गांवों के लगभग डेढ़ लाख किसानों को परियोजना का सीधा लाभ मिलेगा, जबकि चार लाख लोगों को पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा।

क्या हैं अर्जुन बांध जानें यहां-
1- साल 2009 में केंद्र सरकार और यूपी सरकार की ओर से अर्जुन सहायक परियोजना कार्य शुरू हुआ।
2- करीब 2593.93 करोड़ का खर्च आया।
3- इसकी डेडलाइन दिसंबर 2021 थी, लेकिन इसका लोकार्पण पहले किया जा रहा। अभी कार्य अधूरा है।
4- अर्जुन बांध से तीन जिलों के 168 गांवों को फायदा पहुंचेगा।
5- यह दावा किया जा रहा है कि शुद्ध पीने का पानी भी मिलेगा।
6- 1.5 लाख से ज्यादा किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
7- बांदा, महोबा और हमीरपुर के किसानों के लिए खेती-किसानी आसान हो जाएगी।
8- बारिश का पानी वेस्ट नहीं होगा, बल्कि उसका अब सही उपयोग होने लगेगा।
9- इस परियोजना के जरिए 15000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी।

(महोबा ब्यूरो अखिलेश शिवहरे)

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