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परमपूज्य शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा समाज एवं अपने शिष्यों के लिए दिव्य चिंतन

तुम्हारे सुख का मैं साथी बनूं या ना बनूं पर इतना तो दृढ़ निश्चय है। कि,जब भी हमारे शिष्यों के ऊपर कोई भी कष्ट या दुःख आयेगा। तब मैं उनके समक्ष ढाल बन कर अवश्य खड़ा हो जाऊँगा। आज के चिंतन में गुरुदेव जी ने अपने शिष्यों के लिए जो प्रेम और आशीर्वाद उनके हृदय मे है वह सभी के सामने व्यक्त किया।गुरुदेव जी का सम्पूर्ण जीवन समाज के कल्याण के लिए पूर्णतया समर्पित है। गरीबों के लिए गुरुवर ने जो कार्य किया है। वह शब्दों के माध्यम से व्यक्त करना असम्भव हैं। समाज के शोषित, पीड़ित और दीन हीन वर्ग के लोगों क़ो गुरुदेव जी एक आशा की किरण बनकर प्रस्फुटित हुए हैं।


माँ की साधना का मार्ग प्रदान करके ऐसे व्यक्तियों का उद्धार किया है। जो लोग दिन रात नशे में लिप्त रहते थे, उन लोगों क़ो नशा मुक्त करके नवीन जीवन प्रदान किया है। आज भगवती मानव कल्याण संगठन के लाखों कार्यकर्ता दिन रात गुरुवर जी द्वारा निर्देशित जन कल्याण कारी कार्यों में रत हैं।


गुरुवर जी के समर्पित शिष्य माँ जगदम्बे की आरती और चालीसा पाठों का अलग अलग स्थानों में आयोजन करके जनमानस क़ो माँ की ऊर्जा से ओत प्रोत करा रहे हैं आज गुरुवर जी ने सरकार की ढुलमुल नीतियों की जमकर आलोचना की और साथ ही कुछ अच्छे कार्यों की सराहना भी की। गुरुवर जी ने कहा की शराब की दुकानों क़ो खोलने से ज्यादा जरूरी लॉक डाउन में फँसे गरीब मजदूरों क़ो उनके गाँवों में पहुंचाना था, पर सरकार क़ो लाखों गरीबों की कोई फिकर नही है।


भूख से बेहाल जनता के दर्द क़ो कौन सुनेगा? पिछले कई वर्षों से गुरुदेव जी ने कड़ी चेतावनी देते हुए बारम्बार बोला था की नशा और माँस का सेवन बन्द कर दो। पर मूर्ख जनता अपनी मनमानी करती रही, जिसका परिणाम आज सारा विश्व झेल रहा है।


बड़े बड़े देशों के अमीरों ने भौतिकता के जो अम्बार लगा लिए थे। आज वो सब कूड़े के ढेर के समान नजर आ रहे हैं। इन चीजों से उनकी जान की कोई रक्षा नही हो पा रही है ।आज प्रत्येक व्यक्ति एक अंधी दौड़ में शामिल हो गया है। अगर सभी ने भक्ति क़ो अपने जीवन का आधार माना होता और गुरुवर की विचारधारा क़ो आत्मसात करके अपने जीवन की यात्रा क़ो संचालित किया होता। तो आज सभी लोग परिवार के साथ निर्भय जीवन जी रहे होते। इस तरह भय ग्रस्त न होते।
बहुत ही शानदार मौका मिला है की सत्य क़ो पहचान कर माँ की भक्ति में हम लीन हो जाऐं। अपने बच्चों के भविष्य क़ो सुरक्षित करें, उन्हें संस्कारवान बनाये।


सत्य से साक्षात्कार कीजिए और अपने आत्मा के ऊपर पड़े हुए आवरण क़ो माँ की साधना आराधना के माध्यम से हटाइये।गुरुवर ने कहा है की वासना के वेग क़ो माँ जगत जननी की साधना से ही रोका जा सकता है। करोड़ों युवा वर्ग इस सन्ताप से पीड़ित हैं। उन्हें इस मार्ग की विशेष आवश्यकता है। अनेकों माता पिता बच्चों की इस समस्या से दुःखी हैं। आप लोग एक बार पंच ज्योति शक्ति तीर्थ सिद्धाश्रम धाम जरूर जाइये आपके बच्चों में अभूतपूर्व परिवर्तन नजरआयेगा। आँखें खोलिए अब जाग जाइये अपने कल्याण के बारे में अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना प्रारम्भ कीजिए।। जनकल्याण होय सुखकारी, तुम निर्बल, निर्धन हितकारी। याचक दुखिया जो कोई आबे, अपने मन की आशा पाबे। रोग,शोक,भय, निर्धनताई, दर रहे हमसे कठिनाई।

श्रीमती मंजू द्विवेदी
प्रबंध संपादक शक्ति न्यूज

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