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अमेरिकी प्रतिबंधों पर चीन ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, कहा- हमारे आंतरिक मामलों में दखल न दे ट्रम्प सरकार

बीजिंग एजेंसी। हॉन्गकॉन्ग का स्पेशल स्टेटस खत्म करने के अमेरिकी फैसले के बाद चीन ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। चीन ने कहा है कि हॉन्गकॉन्ग उसका आंतरिक मामला है और अमेरिका को इसमें दखल देने से बचना चाहिए। चीन ने हालांकि, यह जानकारी नहीं दी है कि वो अमेरिका के खिलाफ किस तरह की जवाबी कार्रवाई करेगा।  डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हॉन्गकॉन्ग पर एक नए कानून को मंजूरी दी थी। इसके तहत अमेरिका अब उन चीनी अफसरों और कंपनियों पर कार्रवाई कर सकेगा जो वहां लोकतंत्र की मांग दबा रहे हैं। अब तक अमेरिका इन कंपनियों को स्पेशल स्टेटस के तहत कुछ छूट देता था। अब यह नहीं हो सकेगा।


चीन ने क्या कहा?


चीन ने पिछले दिनों हॉन्गकॉन्ग में नया सुरक्षा कानून लागू किया था। दुनिया के ज्यादातर देशों ने इसका विरोध किया। हॉन्गकॉन्ग में तो तीन महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले महीने काफी हिंसा भी हुई। अब जबकि अमेरिका ने हॉन्गकॉन्ग का स्पेशल ट्रेड स्टेटस खत्म कर दिया है तो चीन को भारी नुकसान का डर सता रहा है। चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री ने बुधवार को ‘अल जजीरा’ टीवी चैनल से कहा- हम अमेरिकी कदम की निंदा करते हैं। इसका जवाब देने के लिए चीन तैयार है।  


चीन के बैंकों पर भी असर पड़ेगा


हॉन्गकॉन्ग पर अमेरिका के नए कानून का असर चीन के उन बैंकों पर भी पड़ेगा जो वहां इन्वेस्टमेंट के लिए कर्ज देते हैं। इतना ही नहीं चीन के वो अफसर जो हॉन्गकॉन्ग में तैनात हैं, और वहां के वीजा पर ट्रेड के लिए अमेरिकी दौरे करते हैं, उनका अब अमेरिका जाना मुश्किल हो जाएगा। चीनी कंपनियां हॉन्गकॉन्ग के नाम पर अपना माल सप्लाई करती हैं। अब यह सिलसिला बंद हो जाएगा। हो सकता है अमेरिका के सहयोगी देश भी इस माल को न खरीदें। 


टकराव का नया मोर्चा


दुनिया जब महामारी से जूझ रही है तो चीन ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए। भारत से लद्दाख में टकराव हुआ। अमेरिका ने महामारी को चीन की साजिश बताया। दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा। इसके अलावा उईगर मुस्लिमों के दमन का मामला भी सामने आया। रही सही कसर हॉन्गकॉन्ग विवाद ने पूरी कर दी। अब यहां चीन के दबदबे को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों ने चुनौती दी है। 1997 के पहले हॉन्गकॉन्ग ब्रिटेन के कब्जे में ही था। बाद में उसने संप्रभुता कायम रखने की शर्त पर इसे चीन को सौंप दिया था। चीन अब यहां कब्जा करना चाहता है। 

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