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कोरोना पाजिटिव 84 गर्भवती का सहारा बना महिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल में 11 गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराया, 12 को कानपुर और 10 महिलाओं को मेडिकल कॉलेज बांदा रेफर किया

उत्तरप्रदेश। हमीरपुर जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में दो माह के अंदर अब तक 84 गर्भवती प्रभावित हुई हैं। इनमें एक दर्जन के आसपास महिलाओं का जिला महिला अस्पताल की टीम ने सुरक्षित प्रसव भी कराया है, जबकि कुछ गंभीर गर्भवती को मेडिकल कॉलेज कानपुर और बांदा के लिए रेफर किया गया है।

कोरोना संक्रमण ने इस बार जनपद में बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में लिया। मार्च के महीने तक कोरोना पॉजिटिव की संख्या 1500 के आसपास थी, लेकिन जैसे ही अप्रैल का महीना शुरू हुआ, वैसे ही कोरोना पॉजिटिव केस बढ़ने लगे। मई माह के शुरुआती 15 दिन भी काफी मुश्किल भरे रहे। इन 15 दिनों में प्रतिदिन कोरोना प्रभावित मरीजों की संख्या सौ के पार ही रही, मगर 15 मई के बाद से कोरोना केसों की संख्या में कमी आनी शुरू हुई। करीब डेढ़ माह तक जनपद में कोरोना एक्टिव केसों की संख्या एक हजार के पार रही।

मौजूदा समय में कोरोना एक्टिव केसों की संख्या एक सैकड़ा के नीचे आ गई है। अप्रैल की एक तारीख से लेकर मई माह की 24 तारीख तक जिले में कोरोना के करीब 3500 नए केस चिहिन्त हुए हैं। इस प्रकार से जिले में कोरोना पॉजिटिव कुल केसों की संख्या 5177 हो चुकी है। जिसमें 4984 मरीजों की रिकवरी हुई है। मौजूदा समय में 88 एक्टिव केस हैं।

अप्रैल और मई माह में जब कोरोना चरम पर था, तब ऐसे में बड़ी संख्या में गर्भवती भी प्रभावित हुई हैं। प्रसव के नजदीक इन महिलाओं के कोरोना से ग्रसित होने की वजह से इनके परिवारों के सामने भी मुश्किलें थी। कुछ केस काफी गंभीर थे, ऐसे मुश्किल दौर में जिला महिला अस्पताल की टीम ने सराहनीय कार्य किया।

जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.फौजिया अंजुम नोमानी ने बताया कि एक अप्रैल से लेकर 25 मई तक महिला अस्पताल में कोरोना से ग्रसित 84 महिलाओं के दाखिल हुए। इनमें से 11 महिलाओं के उनकी टीम ने सुरक्षित तरीके से सामान्य प्रसव करवाए। 41 ऐसी महिलाएं, जिनके प्रसव में समय था, उन्हें दवा किट देकर होम आइसोलेशन में भेजा। जबकि 12 महिलाओं को कानपुर और 10 को गंभीर हालत में बांदा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। एल-टू हॉस्पिटल कुरारा में नौ और एल-वन सुमेरपुर में दो महिलाओं को भर्ती कराया गया। सीएमएस डॉ.नोमानी ने बताया कि उनकी टीम ने कोरोना जैसे संक्रमण काल में अपनी ड्यूटी को शत-प्रतिशत निभाकर कोरोना से ग्रसित महिलाओं की मदद की।

खानपान का ध्यान न रखने से एनीमिका हो रही गर्भवती-


सीएमएस डॉ.फौजिया अंजुम ने बताया कि गर्भावस्था के समय खानपान का ध्यान न रखने की वजह से ज्यादातर गर्भवती एनीमिक हो जाती हैं। इस समय हर दस में से सात महिलाएं एनीमिया का शिकार होकर अस्पताल आती हैं। तीन-तीन ग्राम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं का सुरक्षित तरीके से कोरोना के दौरान प्रसव कराया गया।

उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि वह गर्भावस्था का ध्यान रखें और प्रसव पूर्व होने वाली जांचें अवश्य कराएं ताकि प्रसव के समय कोई दिक्कत न हो।

(हमीरपुर ब्यूरो अजय शिवहरे)

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