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लाख प्रयत्न करने के बाद भी सत्कर्मों क़ी तरफ हम लोग़ सतत अग्रसर नही हो पाते क्यूँकि इस समय कलिकाल (कलयुग) अपने चरम अवस्था में है। इससे बचने का एक मात्र उपाय माँ क़ी साधना ही है

लेखक- शिव बहादुर सिंह फरीदाबाद (हरियाणा)

डेस्क न्यूज। आज अनेकानेक लोग़ तमाम तरह के बुरे कार्यों में लिप्त हैं। नशे क़ी आदत से परेशान हैं। मालूम है क़ी नशा हमारे पूरे जीवन क़ो बर्बाद कर देगा फिर भी उसे छोड़ नही पा रहे हैं। फिल्मी दुनियाँ के बहुत सारे लोग़ नशे के कारण अपने अच्छे खासे जीवन क़ो नरक बनाने पर आमादा हैं। अधिकाँश लोग़ चरित्र हीनता का जीवन जी रहे हैं। उनको पता है क़ी ये गलत है फिर भी पता नही क्या है क़ी जानबूझ कर ऐसी हरकतें करते हैं क़ी जिसे देखकर किसी क़ो भी शर्म महसूस होगा।

दिन रात वासनात्मक जीवन जी रहे हैं। मुस्लिम समाज में अनेक शादियों का प्रचलन होना इस बात का ज्वलन्त उदाहरण है। जब आप एक शादी से संतुष्ट नही हैं तो आप कितनी शादियाँ कर लीजिए आप असन्तुष्ट ही रहेंगे। ये सब मानसिक विकृति है। ये सब गलत खानपान का नतीजा है। माँस खाने से मनुष्य तामसी प्रवृत्ति का हो जाता है। जिसके फलस्वरूप वो इसी तरह के कार्य करेगा।सादगी भरा जीवन जीने से शान्ति क़ी प्राप्ति होती है। मनुष्य के जीवन में जब तक शान्ति नही है तब तक उसका जीवन किसी काम का नही है। कइयों का खुद का जीवन अशान्त है फिर भी खुराफात से बाज नही आ रहे हैं।

कोई ना कोई षडयंत्र रचते ही रहते हैं। ऐसे लोग़ दिन के उजाले में भी आँखों पर पट्टी बाँध कर चलते हैं।इस तरह के लोग़ सत्य से कोसों दूर रहते हैं।आपसी प्रेम औऱ सौहार्द का जीवन जीना जैसे लोग़ भूल चुके हैं। प्रकृति के विधान के अनुरूप ही जीवन जीने से हमारा विकास होगा। प्रकृति का विधान कहता है की दूसरों क़ी खुशी का कारण बनिए। हर वक्त प्रयास रत रहिए क़ी हम किसी का दिल ना दुखायें।

पहले अपने परिवार के सदस्यों का आदर करें, उसके बाद अन्य लोगों का भी सम्मान कीजिए। बच्चों क़ो उचित सँस्कार प्रदान कीजिए। आज के समय में बहन बेटियाँ सुरक्षित नही हैं। अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। लोगों में एक दूसरे क़ी मदद करने क़ी भावना खत्म होती जा रही है। नैतिकता का नामोनिशान ही नही बचा है। घनघोर कलिकाल चल रहा है। ऐसे समय में अध्यात्म का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।

कोरोना जैसी महामारी से बचने का एक ही उपाय है क़ी गुरुदेव जी क़ी विचारधारा का पालन किया जाय। माँ दुर्गा क़ी नियमित साधना कीजिए। दुर्गा चालीसा का पाठ औऱ माँ एवम गुरुवर के मँत्रो का जाप भी कीजिए। वीरवार का व्रत रखिये। संगठन के अधिकाँश लोगों द्वारा इन क्रमों का पालन करने के कारण अभी तक सुरक्षित जीवन जी रहे हैं।प्रकृति सत्ता क़ी ओर से ये महामारी एक चेतावनी है। अब हमें जगना ही होगा। कलिकाल क़ी इस भयावहता क़ो परास्त करने का एक मात्र यही मार्ग है। अन्य मार्ग निष्प्रभावी हैं।

जै माता क़ी जै गुरुवर क़ी

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