मदर्स डे पर विशेष: मां के संघर्ष, त्याग और संस्कार ने जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया को पहुंचाया इस मुकाम पर

@छतरपुर- आशुतोष द्विवेदी। लोग सच कहते हैं कि बच्चे की पहली गुरु मां होती है और मां की दी हुई सीख जीवनभर उसका मार्गदर्शन करती है। मदर्स डे पर एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक किसान परिवार की मां ने अपने बेटे को संस्कार, अनुशासन और शिक्षा का ऐसा आधार दिया कि आज वह जिले के शीर्ष प्रशासनिक पद पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह कहानी है छतरपुर के वर्तमान जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया की, जिनकी सफलता के पीछे उनकी मां का संघर्ष, त्याग और संस्कार सबसे बड़ी ताकत बने।

दतिया जिले के ग्राम कामद के एक सामान्य कृषक परिवार में जन्मे नमः शिवाय अरजरिया का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। परिवार आर्थिक रूप से सामान्य था, लेकिन उनकी मां ने कभी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कमी नहीं आने दी। खेतों में परिवार के साथ मेहनत करने के साथ-साथ उन्होंने बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाई। उनका शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा।
उन्होंने प्राथमिक कक्षाओं में नियमित रूप से स्कूल तक नहीं देखा। वह सीधे 5वीं कक्षा में स्कूल पहुंचे। लेकिन उनकी मां ने घर पर ही उन्हें धार्मिक और नैतिक शिक्षा से जोड़े रखा। उन्होंने बचपन से ही बेटे को रामचरित मानस के पाठ से जोड़ा, जिसका असर उनकी सोच और व्यक्तित्व पर गहराई से पड़ा। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के व्यस्त जीवन के बावजूद मां को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं। नमः शिवाय का कहना है कि जीवन में जो भी सफलता मिली है, उसमें उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि मां ने केवल पालन-पोषण ही नहीं किया, बल्कि जीवन के संस्कार, अनुशासन और संघर्ष से लड़ने की ताकत भी दी।




