आध्यात्मिक

कथावचक हमारे सनातन धर्म कों गलत दिशा में ले जा रहे हैं: धर्मसाम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज

@आध्यात्मिक। जब कोई अच्छा कार्य किया जा रहा हो तथा जब कोई सनातन का प्रहरी खड़ा होकर के सनातन की समृद्धि की ओर कदम बढ़ाता हैं तो सहज भाव से उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगीराज शक्तिपुत्र जी महाराज नें कहा क्योंकि चालीस वर्षों से जिस महत्वपूर्ण बात को मैं सतत कहता चला आ रहा हूं, आवाज उठाता चला आया हूं, कई बार विरोध का सामना करना पड़ा, मगर आज मुझे प्रसनन्ता इस बात की हैं कि अखाडा परिषद नें महत्वपूर्ण निर्णय लिया हैं कि हम सभी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों को एक समान जोड़कर चलेंगे, छुआछूत को मिटाने के लिए कार्य करेंगे और जिन जातियों को हम अब तक नजरअंदाज करते रहे, उन्हें अपना शिष्य बनाएंगे, उन्हें सम्मानजनक पदवीयाँ दी जायेंगी, उन्हें महामंडलेश्वर बनाएंगे। चूकि एकरुपता में ही हमारे सनातन की रक्षा छिपी हुई हैं। यदि प्रारम्भ से ही हम सनातन के भावों को लेकर चल रहे होते, तो आज हमारा देश विश्वगुरु कहलाता। लेकिन आज तक जो गलतियां की गई हैं उन्हें सुधारने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा हैं और जो निर्णय हमारे अखाडा परिषद द्वारा लिया गया हैं उसकी मैं बार- बार सराहना करता हूं। अखाडा परिषद को एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए कि गुरुकुलों में भी सभी जाति के बच्चों को प्रवेश दिया जाए। हमें ज्ञान को किसी जाति के आधार पर बाँट करके नहीं रख देना चाहिए और जिस दिन हम ऐसा निर्णय लेना प्रारम्भ कर देंगे, हमारा सनातन और सशक्त रूप से आगे बढ़ता चला जायेगा।

भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता सनातन के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। चेतनात्मक प्रवाह को लेकरके हमें अपनी पूरी क्षमता को लगा देना हैं। धर्म, राष्ट, मानवता की सेवा के लिए समाज को संस्कारवान बनाना हमारा कर्तव्य है। चूकि जब तक समाज को संस्कारवान नहीं बनायेंगे, नास्तिकता हावी रहेगी, समाज के लोग नशे- मांस का सेवन करते रहेंगे, तो ऐसा समाज कभी सनातन की रक्षा नहीं कर सकेगा। हिन्दूसमाज को सही दिशाधारा देने के लिए मेरे स्वयंसेवी कार्यकर्ता लगे हुए हैं और आगे भी लगे रहेंगे। अगर गलत के विरुद्ध हम मुखर होकर आवाज नहीं उठायेंगे, तो हम सनातन की रक्षा नहीं कर सकते।

गुरुवर में कहा सत्य का जीवन जियो। मैं सत्य का जीवन जीता हूं, सत्य बोलता हूं और सत्य के लिए दिन- रात कार्य कर रहा हूं और जब मैं सत्य की आवाज़ उठा देता हूं, तो धूर्त लोग, अज्ञानी लोग उस पर टिप्पणीयां करना शुरू कर देते हैं। कुछ समय पहले मैंने माँ राधा के विषय में एक आवाज उठाई थी, चूकि मुझसे लाखों- करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं, जो मुझे सूचना देते रहते हैं कि इस प्रवचनकर्ता के द्वारा ऐसा कहा जा रहा हैं, उस प्रवचनकर्ता के द्वारा ऐसा कहा जा रहा हैं, उस प्रवचनकर्ता के द्वारा ऐसा कहा जा रहा हैं।

वे अज्ञानी कहते हैं कि राधा सर्वोत्तम सत्ता हैं, राधा आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा हैं। अरे हम हर शक्ति को नमन करते हैं। तुम जितना मानते हो उससे सैंकड़ो गुना अधिक मैं मानता हूं। मैं माँ का भक्त हूं, मैं माता आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा की आराधना करता हूं। मैंने अनेकों बार गलत के विरुद्ध आवाज उठाई हैं। प्रवचनकर्ता जब रास-रंग के गीत गाते हैं, तब मेरे द्वारा आवाज उठाई जाती हैं कि आप समाज को दिशाभ्रमिट कर रहे हो और मेरे द्वारा पुनः कहा जा रहा हैं कि सभी जितने ज्ञानी हैं, कथित धर्मात्मा हैं, तंत्र- मंत्र का अनुष्ठान करने वाले हैं, वेदों का ज्ञान रखते हैं, कान खोलकर सुन ले कि इस धरती पर जितने अंशावतार हुए हैं, सभी नें जन्म लेकरके सामाजिक जीवन जिया हैं, समाज के बीच रहे हैं। वे न कभी पूर्ण अवतार थे और न कभी होंगे। पूर्ण शक्ति जब अवतरित होती हैं, प्रकट होती हैं, तो अपना कार्य करके तुरंत अपने स्थान पर वापिस चली जाति हैं।

माँ राधा भी अंशावतार हैं। कुछ ऐसे धूर्त लोगों नें इस पर टिप्पणी की, जिन्हें मैं नाली का कीड़ा समझता हूं। जिस तरह की गन्दगी उनके जीवन में भरी हैं, उस तरह की अभद्र भाषा का उपयोग करते हैं। मैं उस तरह की अभद्र भाषा का उपयोग नहीं कर सकता, मगर निश्चय हैं कि यदि कोई गलती की जायेगी तो उसका जवाब अवश्य दिया जायेगा। जिसकों जो भी न समझ में आ रहा हो, वह मेरे पास आकर समझें। अरे आत्मज्ञान से विहीन ये ग्रंथज्ञानी, अज्ञानी बनते जा रहे है, निरर्थक टिप्पणीयां कर रहे हैं। उन्हें मालूम ही नहीं कि मैं कैसा जीवन जीता हूँ? मैं एक सनातनी हूँ मूर्तिपूजा पर विश्वास कर्ता हूँ, मूर्तिपूजा मेरे जीवन का आधार हैं, मातृशक्ति की आराधना करता हूँ, मातृशक्तियों कों अपने सम्मान की पात्र हैं। वे माता आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा के अंशरूप में अवतरित हुई हैं और यदि टटोलोगे तो सबकुछ तुम्हे मिल जायेगा।

तुम समाज कों क्या परोस रहे हो? जिसकी आराधना कर रहे हो उसी कों सर्वशक्तिमान सत्ता बताओगे? ब्रम्हा, विष्णु, महेश का क्या होगा? महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली कौन हैं? ब्रम्हा कौन हैं लक्ष्मी कौन हैं, पार्वती कौन हैं? क्या इनका विश्लेषण करोगे? क्या तुम्हारे पास इतनी क्षमता हैं? जिन आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा कों देवाधिदेव भी माँ कहकर पुकारते हैं, जो अनंत लोगों की जननी हैं, जहां अनेक ब्रम्हा, विष्णु, महेश हैं। उनका आकलन करते हो? ब्रह्म, विष्णु, महेश भी अंशावतार हैं, ये भी पूर्ण अवतार नहीं हैं। केवल माता आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा ही अजर- अमर- अविनाशी सत्ता हैं, प्राणस्वरूप हैं और हमारे अंदर अजर- अमर- अविनाशी आत्मा के रूप में विद्यमान हैं। तुम्हे तो उन महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली का ज्ञान नहीं हैं, तो तुम उस विराटसत्ता का क्या ज्ञान प्राप्त कर सकोगे? आत्मावान बनो, चेतनवान् बनो, तभी सत्य का अहसास हो सकेगा। तुम ग्रंथो कों रटते हो मैं ग्रंथो का जीवन जीता हूँ। मेरी वाणी में ग्रन्थ वास करते हैं। तुम ग्रंथो कों अलमारियों में संजो करके रखते हो, मैं मंदिर में वास करता हूँ और मंदिर की शक्ति मेरे ह्रदय में वास करती हैं।

तुम अज्ञानता का जीवन जीते हो, अज्ञानता का जीवन जीते रहोगे, ग्रन्थज्ञानी हमेशा भटकता हैं और तुम जैसे धूर्त लोगों कों जवाब देने के लिए मेरे शिष्य सक्षम हैं। मैं सत्य कहता हूँ, सत्य कहता रहूंगा, सत्य कहने के लिए मेरा अवतरण हुआ हैं और सत्य कहने के लिए ही मैं समाज के बीच आया हूँ। जन्म लेने वाली सभी देवशक्तियां अंशावतार हैं और वे सभी देवशक्तियों का सम्मान करो, लेकिन तुम्हारी इष्ट केवल माता आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा हैं और तुम्हारे अंदर जो आत्मा बैठी हुई हैं उन्हीं का अंश हैं।

धूर्त, अज्ञानियों, निरर्थक टिप्पणियां करना बंद कर दों। मैं अंबर का सूरज हूं, तुम धरती के जुगनू हो। इतना समझ लोगे तो दोबारा मुझ पर टिप्पणी नहीं करोगे। मैं सत्य कहता रहूंगा, जिससे युवावर्ग सचेत हो सके और तभी हमारे सनातन धर्म की रक्षा हो सकेगी। तुम लोगों ने नाच- रस- रंग में युवावर्ग को भटका करके रख दिया है। अरे कथावाचक हो, धर्मपद पर बैठे हुए हो, तो आत्मज्ञानी बनो, साधक बनो। भागवत कथा करते हो तो श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व को समाज के बीच रखो, लेकिन नहीं केवल नाच- रस- रंग में समाज को उलझाए रहते हो। राम कथा सुनाते हो तो राम के आदर्शों को समाज के बीच रखो। उनके नाम पर न जाने क्या-क्या करते रहते हो? लक्ष्मण को कहते हो कि वे उच्छकल थे! अरे, राम लक्ष्मण ही द्वापर में कृष्ण और बलराम के रूप में अवतरित थे।

गुरुवर कहते हैं की आज हमारे कथावाचक हमारे सनातनधर्म को गलत दिशा में ले जा रही है। एक बार और कान खोलकर सुन लेना कि राधा हो, सीता हो, राम हो, कृष्णा हो, चाहे कोई शक्तियां हो सभी अंशाअवतार थे। राम और कृष्ण, भगवान विष्णु के अवतार थे और यदि कहोगे कि यही विश्वब्रह्मांड के नायक है तो मैं इसका विरोध करूंगा और यदि किसी के पास आत्मबल है, चेतनाशक्ति है, तो वह आए, उसका स्वागत है। हम धर्म की रक्षक हैं हम सनातनी की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहेंगे, समाज को जागरूक करते रहेंगे और गलत का विरोध करते रहेंगे। सत्य बताना धर्म का विरोध नहीं होता मैं बड़े-बड़े ऋषियों- मुनियों का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता हूं, योग की पराकाष्ठा रखता हूं। साधना की उच्चता कुंडलिनीजागरण की उच्चता पर अगर कोई ज्ञान प्राप्त करना चाहे, तो वह ज्ञान प्रदान कर सकता हूं मैं कौन हूं? इसे और समझने का प्रयास करना। सत्य हर काल में रहा है और हर काल में रहेगा।

(संकलन- आशुतोष द्विवेदी संपादक शक्ति न्यूज)

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