श्रीमद् भागवत कथा में रुक्मणी विवाह सम्पन्न, श्रद्धा-भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा महिला इकाई की रही अहम भूमिका

@कटनी शेरा मिश्रा। विजयराघवगढ़ कैमोर क्षेत्र के ग्राम बम्हनगवां में आयोजित साप्ताहिक संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा धार्मिक आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। कथा के पावन अवसर पर श्रद्धालु ज्ञान गंगा में डूबकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

इसी क्रम में 30 दिसंबर को हजारों भक्तों की उपस्थिति में कथा व्यास पं. अनिल उर्मलिया जी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी का दिव्य विवाह श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया गया। भगवान का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार बड़े ही भक्तिभाव और धूमधाम से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालु बराती बने वहीं महिलाओं ने पारंपरिक रूप से बारात का स्वागत किया। बैंड-बाजे आतिशबाजी और भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालु झूमते नाचते नजर आए। विवाह प्रसंग के दौरान भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।
कथा व्यास पं. अनिल उर्मलिया जी ने रुक्मणी विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि रुक्मणी विवाह यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति अटूट विश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने से भगवान स्वयं अपने भक्त की रक्षा करते हैं। रुक्मणी जी का श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार करना यह दर्शाता है कि आत्मा जब परमात्मा से जुड़ती है तभी जीवन पूर्ण होता है।उन्होंने संगीत के माध्यम से विवाह गीत प्रस्तुत किए जिन पर महिलाएं भावविभोर होकर थिरकती रहीं और संपूर्ण वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया।इस भव्य आयोजन में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा महिला इकाई की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही।
कथा की रूपरेखा से लेकर व्यवस्थाओं तक महिला शक्ति ने पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सहभागिता निभाई। वहीं ग्रामीण उत्सव समिति एवं अन्य धार्मिक सहयोगियों का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।आयोजन समिति ने बताया कि नूतन वर्ष के उपलक्ष्य में पूर्णाहुति ब्राह्मण भोज एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।पूरे क्षेत्र में इस धार्मिक आयोजन को लेकर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु श्रीमद् भागवत कथा के अमृतमय रसपान से आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।
शेरा मिश्रा पत्रकार विजयराघवगढ़ कटनी

















