पूर्व विधायक का न्यायपालिका पर सवाल?संविधान नहीं, यज्ञ-हवन से मिलेगी रिहाई? भाजपा के पूर्व विधायक के बयान से सियासी तूफान

@छतरपुर-आशुतोष द्विवेदी। प्रदेश की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के छतरपुर जिले के पूर्व विधायक आर डी प्रजापति ने सोशल मीडिया पर एक विवादित टिप्पणी कर दी। प्रजापति ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि अनिल मिश्रा को छुड़ाने के लिए संविधान का सहारा लेने के बजाय यज्ञ और हवन का सहारा लेना चाहिए।

पूर्व विधायक आर.डी प्रजापति के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों ने इसे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान बताया है, जबकि कई सामाजिक संगठनों ने बयान को धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ने की कोशिश करार दिया है। आर डी प्रजापति के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में न्याय और कानून की जगह अब आस्था को विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि किसी भी आरोपी या व्यक्ति की रिहाई संविधान, कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है, न कि धार्मिक अनुष्ठानों से।
सोशल मीडिया पर बवाल
फेसबुक पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों इसे आस्था की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसे कानून के राज पर सीधा हमला मान रहे हैं। वहीं संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियाँ न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि जनता के बीच गलत संदेश भी देती हैं। लोकतंत्र में आस्था का स्थान निजी जीवन में हो सकता है, लेकिन न्याय और प्रशासन का आधार केवल संविधान होता है।

















