अनूपपुर

बड़ी खबर: ताप विद्युत गृह चचाई के 70 वर्षीय लोको पायलट की कार्य स्थल में बिगड़ी तबीयत जिला अस्पताल में मौत

@अनूपपुर- नीरज गुप्ता। ताप विद्युत गृह चाचाई के सीटीडी विभाग अंतर्गत लोको संचालन के लिए निजी फार्मो को ठेका दिया जाता है,और ठेकेदार के द्वारा सेवानिवृत्ति पायलटों को कार्य पर रखा जाता है,बुधवार को एमके ट्रेडर्स के अधीन रहकर लोको चलने वाले 70 वर्षीय पायलट हरी भाऊ रधा टाटे की तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में हुई मौत ने प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार को कटघरे में खड़ा कर दिया है,हालांकि मौत का कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।

अमरकंटक ताप विद्युत चाचाई का सीटीडी विभाग कुछेक सालों से भ्रष्टाचार का अखाड़ा बना हुआ है,जहां लोको संचालन में समय-समय पर इसकी बांनगी सामने आती रही है, यहां कभी लोको इंजन डिब्बों पर चढ़ जाता है,तो कभी लोको चलाने के दौरान पायलट अस्वस्थ हो जाता है अब तक सामने आए मामले में यही दिखाई पड़ा है कि उम्र दराज पायलटों को जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाहियों का शिकार होना पड़ा है,70 वर्षीय पायलट हरी भाऊ रधा टाटे की जिला अस्पताल में हुई मौत के संबंध में लोगों में उनके साथ कार्य कर रहे हेल्पर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह मंगलवार को द्वितीय पाली में ड्यूटी के लिए आए और तृतीय पाली का कार्य भी उन्हीं से लिया गया एवं बुधवार को सुबह प्रथम पाली के कार्य के लिए ठेकेदार व अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया तभी लोको चलाने के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी जिन्हें आनंन -फानन में गेट नंबर 2 से ताप विद्युत गृह के चिकित्सालय उपचार हेतु सुबह तकरीबन 9 बजे लाया गया लेकिन हालत गंभीर होने पर वहां से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया ही था कि उसकी मौत हो गई,पायलट की यह सामान्य मौत नहीं है,लगातार 12 घंटे के बाद किस नियम व शर्तों के अधीन उनसे कार्य लिया जा रहा था।

65 वर्ष की आयु के बाद कैसे लिया जा रहा था कार्य
किसी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में 60 वर्ष की आयु में रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट को नियम व शर्तों के तहत अनुबंध पर आम तौर पर 65 वर्ष की आयु तक पायलट के रूप में सेवा के लिए रखा जाता है लेकिन उसमें भी उनके चिकित्सा फिटनेस और समय-समय पर आई टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर, लेकिन मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड चाचाई में 70 वर्षीय पायलट हरी भाऊ रधा से किस नियम और शर्तों के तहत कार्य लिया जा रहा था यह तो अपने आप में प्रबंधन के जिम्मेदारों और ठेकेदार पर बड़ा सवाल है।

श्रम कानूनों और सुरक्षा मानकों की अंदेखी
अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में 70 वर्षीय लोको पायलट की ड्यूटी के दौरान तबियत बिगड़ने के बाद हुई मौत के मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है की क्या लागू श्रम कानूनों और औद्योगिक सुरक्षा मानकों का विधिवत पालन हुआ था? सामान्यतः 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा निर्धारित है। यहां 12 घंटे से अधिक लगातार ड्यूटी असाधारण परिस्थिति में ही, वह भी लिखित अनुमति और ओवरटाइम नियमों के तहत। यदि लगातार तीन पालियों में कार्य लिया गया, तो यह फैक्ट्री अधिनियम 1948 एवं संबंधित राज्य नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

षड्यंत्र में जुटे प्रबंधन के जिम्मेदार और ठेकेदार
उधर पायलट का परिवार यहां निवासरत न होने के कारण जानकार सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार व प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी लोको पायलट की मौत के मामले में षड्यंत्र रचने पर जुड़ गए हैं अब उसे कार्य क्षेत्र में उपस्थित न रहने की बात की जा रही है,वहीं 70 वर्षीय लोको पायलट हरी भाऊ रधा टाटे के स्थान पर दूसरे अन्य पायलट की हाजिरी दिखाए जाने का व्यू रचा राजा आने लगा है,जानकार सूत्र यह भी बताते हैं कि यहां पर लंबे समय से रजिस्टर में तीन पायलटो का नाम लिखा है लेकिन एक ही पायलट से काम लिया जा रहा था बहरहाल मामले में निष्पक्षता से जांच हुई तो इसकी आज मुख्य अभियंता के अलावा सीटीडी विभाग के सभी जिम्मेदारों पर आएगी।

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