विशेष लेख: रूरल टूरिज्म और नारी वंदन से बदल रहा मध्यप्रदेश: गाँवों में बढ़े रोजगार के अवसर, महिलाएँ बन रहीं आत्मनिर्भर और सशक्त- पत्रकार सय्यद असीम अली

@भोपाल। मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में जिस तरह से प्रगति की है, उसमें रूरल टूरिज्म (ग्रामीण पर्यटन) एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन की सादगी को करीब से अनुभव कराने वाला यह पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह एक नया अवसर बनकर सामने आया है, जिसने उनके सशक्तिकरण को एक नई दिशा दी है। इसी कड़ी में “नारी वंदन” जैसे कार्यक्रम इस बदलाव को और अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाने की क्षमता रखते हैं।

रूरल टूरिज्म: विकास का नया आधार-
रूरल टूरिज्म का मुख्य उद्देश्य गाँवों की संस्कृति, परंपरा, खान-पान, हस्तशिल्प और जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना है। मध्यप्रदेश के अनेक गाँव अब पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के साथ रहकर उनके जीवन को भी समझते हैं।
इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पहले जहाँ रोजगार के अवसर सीमित थे, वहीं अब होम-स्टे, गाइड सेवा, लोक कला प्रदर्शन, हस्तशिल्प बिक्री और पारंपरिक भोजन जैसे कार्यों से ग्रामीणों को नियमित आय प्राप्त हो रही है। इससे पलायन में कमी आई है और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।

ग्रामीण पर्यटन में मध्यप्रदेश की उपलब्धि: तीन गाँवों को राष्ट्रीय सम्मान-
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित “बेस्ट टूरिज्म विलेज प्रतियोगिता 2024” में राज्य के तीन गाँव—प्रणपुर, सावरवानी और लाडपुरा खास—को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें प्रणपुर को क्राफ्ट श्रेणी में, जबकि सावरवानी और लाडपुरा खास को रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म श्रेणी में पुरस्कार मिला।
यह प्रतियोगिता ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस उपलब्धि से मध्यप्रदेश के गाँवों की समृद्ध परंपरा, स्वच्छता, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
सावरवानी गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और ग्रामीण जीवन के अनुभव के लिए पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं चंदेरी के पास स्थित प्रणपुर अपनी बुनकरी परंपरा और हस्तशिल्प के लिए विशेष पहचान रखता है। यहाँ पर्यटकों के लिए स्थानीय संस्कृति, खान-पान और कला को करीब से जानने का अवसर मिलता है। यह सम्मान न केवल इन गाँवों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि मध्यप्रदेश को ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में एक मजबूत और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में स्थापित करता है।

महिला सशक्तिकरण की नई पहचान: ‘एमपीटी अमलतास’ और प्रणपुर का कैफे-
मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। पचमढ़ी में शुरू हुआ ‘एमपीटी अमलतास’ राज्य का पहला ऐसा होटल है, जिसका संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। यह पहल महिलाओं की क्षमता, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। पर्यटन क्षेत्र में उनकी भागीदारी न केवल आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत कर रही है।
इसी कड़ी में चंदेरी के प्रणपुर गाँव में शुरू हुआ महिला संचालित कैफे भी एक प्रेरणादायक पहल है। यह कैफे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रहा है और स्थानीय पर्यटन को नई दिशा दे रहा है। यहाँ आने वाले पर्यटक स्थानीय व्यंजनों, विशेष रूप से बुंदेली थाली का आनंद लेते हुए ग्रामीण जीवन और बुनकरों की परंपरा को करीब से अनुभव कर रहे हैं।
इन पहलों से महिलाओं की आय, आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में वृद्धि हुई है। साथ ही, यह साबित हो रहा है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। मध्यप्रदेश की ये पहलें न केवल राज्य के लिए गर्व का विषय हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।

महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार-
रूरल टूरिज्म का सबसे सकारात्मक प्रभाव महिलाओं पर देखने को मिला है। परंपरागत रूप से घर तक सीमित रहने वाली महिलाएँ अब आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे होम-स्टे संचालित कर रही हैं, स्थानीय व्यंजन बनाकर पर्यटकों को परोस रही हैं, हस्तशिल्प और लोक कला के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर रही हैं। महिलाओं की यह भागीदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी संकेत है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है और परिवार एवं समाज में उनकी भूमिका अधिक सशक्त हुई है। स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से महिलाएँ संगठित होकर काम कर रही हैं, जिससे उनकी आय और पहचान दोनों में वृद्धि हो रही है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त पहल-
मध्यप्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पर्यटन स्थलों को और अधिक सुरक्षित एवं आकर्षक बनाने की दिशा में पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। “सुरक्षित महिला–सशक्त मध्यप्रदेश” के संकल्प के साथ राज्य अब खुद को “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस पहल के अंतर्गत प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पुलिस की सक्रिय तैनाती, महिला हेल्प डेस्क, सीसीटीवी निगरानी और त्वरित सहायता प्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, पर्यटन विभाग द्वारा गाइड्स, होटल स्टाफ और स्थानीय नागरिकों को महिला सुरक्षा के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाया जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध हो सके।
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनने से उनकी पर्यटन में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। परिणामस्वरूप, मध्यप्रदेश एक भरोसेमंद और “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” के रूप में नई पहचान बना रहा है।
नारी वंदन: सशक्तिकरण को नई गति-
“नारी वंदन” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक अभियान है। यह पहल महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। जब इस अभियान को रूरल टूरिज्म के साथ जोड़ा जाता है, तो इसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है। नारी वंदन के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। उन्हें पर्यटन से जुड़े कौशल—जैसे आतिथ्य (hospitality), संचार (communication), प्रबंधन और उद्यमिता—में प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे वे न केवल अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से चला पाएंगी, बल्कि नए अवसर भी तलाश सकेंगी।
आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता-
रूरल टूरिज्म और नारी वंदन का संयुक्त प्रभाव महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब महिलाएँ अपनी आय स्वयं अर्जित करती हैं, तो उनका आत्मसम्मान बढ़ता है और वे अपने परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी भागीदारी करने लगती हैं।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। छोटे-छोटे गाँव अब आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन रहे हैं। स्थानीय उत्पादों—जैसे हस्तशिल्प, वस्त्र, जैविक खाद्य पदार्थ—को नया बाजार मिल रहा है। इससे “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सांस्कृतिक संरक्षण में महिलाओं की भूमिका-
मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। लोकगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और परंपराएँ यहाँ की पहचान हैं। इन सभी के संरक्षण और संवर्धन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रूरल टूरिज्म के माध्यम से जब पर्यटक इन परंपराओं को देखते और अनुभव करते हैं, तो इनका महत्व और बढ़ जाता है। महिलाएँ अपनी कला और संस्कृति को न केवल जीवित रख रही हैं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक भी पहुँचा रही हैं। इससे सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ-
हालांकि रूरल टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी प्रगति हुई है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। प्रशिक्षण की कमी, बाजार तक पहुँच, डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढाँचे की सीमाएँ अभी भी कई क्षेत्रों में देखी जाती हैं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। सरकार, निजी क्षेत्र और समाज के संयुक्त सहयोग से इन बाधाओं को कम किया जा सकता है। यदि सही दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो मध्यप्रदेश रूरल टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।
मध्यप्रदेश में रूरल टूरिज्म और नारी वंदन का समन्वय एक- सकारात्मक परिवर्तन की कहानी प्रस्तुत कर रहा है। यह न केवल पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ा रहा है, बल्कि महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर भी बना रहा है। इस पहल से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और सामाजिक संरचना में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को सम्मान और अवसर देकर मध्यप्रदेश ने पूरे देश में अपनी एक नई पहचान बनाई है।
आने वाले समय में यदि इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहे, तो नारी वंदन और रूरल टूरिज्म मिलकर न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए विकास और सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकते हैं।




