मध्यप्रदेशसागरसागर संभाग

डॉ०घनश्याम भारती ने अंतरराष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी में दिया व्याख्यान

रचना दर्शन मंच द्वारा आयोजित की गई अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, देश विदेश के कई प्रोफेसर तथा साहित्य मनीषी आभासी संगोष्ठी में सम्मिलित हुए

सागर। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गढ़ाकोटा के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ० घनश्याम भारती ने रचना दर्शन मंच मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में “सावन और हिंदी कविता” विषय पर अपना मौलिक व्याख्यान दिया।

आभासी पटल पर व्याख्यान देते हुए डॉ० घनश्याम भारती ने कहा की सावन का महीना बरसात के साथ-साथ सबके मन में उमंग, आनंद उत्साह, प्रेम तथा रंगीनियां उत्पन्न करने वाला हिंदी महीना है। इस महीने पर केंद्रित कई साहित्यिक गीत तथा कविताएं लिखी गई हैं। फिल्मी गीतों में ‘सावन’ का संगीतमय चित्रण हुआ है। डॉ० भारती ने कहा कि ‘सावन’ हमारे साहित्य का महत्वपूर्ण अंग है जोकि रिमझिम बरसात, भाई बहन के प्रेम की राखी का त्योहार तथा शादी विवाह के बाद दुल्हन के मायके में भेजी जाने वाली सावनी का रोमांटिक चित्रण कविता के माध्यम से हुआ है।

इस अंतरराष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी के सभा अध्यक्ष तथा रचना दर्शन मंच के अंतरराष्ट्रीय संयोजक व संरक्षक शिकागो के प्रोफेसर एस०पी० गर्ग थे।विशेष अतिथि लुधियाना की डॉ० जसप्रीत कौर थी। विशिष्ट अतिथियों में देहरादून यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ० भारती शर्मा, सेंट्रल यूनिवर्सिटी गुजरात के प्रोफेसर डॉ० जनक मीना थे। संगोष्ठी का संचालन रचना दर्शन मंच के संयोजक राजेंद्र आर्य ने किया। स्वागत भाषण गांधीनगर गुजरात के साहित्यकार डॉ० गुलाबचंद पटेल ने दिया। सरस्वती वंदना रांची झारखंड की रजनी शर्मा ने प्रस्तुत की।

इस संगोष्ठी में रचना दर्शन मंच की संस्थापक रजनी प्रभा तथा मीडिया प्रभारी रजनीकांत गिरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी में देश-विदेश के कई साहित्य मनीषी, समालोचक, प्रोफेसर तथा समाजसेवी उपस्थित रहे।

(गढ़ाकोटा रिपोर्टर पुरुषोत्तम लाल पटेल)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button