Pwd भवन की हुई रजिस्ट्री का मामला: कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम ने अमले के साथ शुरू की जांच

उप पंजीयक का बयान आया सामने दस्तावेजों के आधार पर की रजिस्ट्री
छतरपुर। शहर के सिटी कोतवाली के पास स्थित लोक निर्माण विभाग के भवन पर मालिकाना हक और रजिस्ट्री का मुद्दा पिछले दो दिनों से तूल पकड़े हुए हैं, इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया, जहां एक ओर लोक निर्माण विभाग अपने स्तर पर कार्यवाही कर रहा है वहीं दूसरी ओर जिला कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम अखिल राठौर अपने राजस्व अमले के साथ मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इस पूरे मामले में नगर पालिका के अधिकारी व कर्मचारियों की मिली भगत के साथ रजिस्ट्री करने वाले तत्कालीन उप पंजीयन कंसू लाल अहिरवार का नाम भी सामने आ रहा है, इसके अलावा हाई कोर्ट के आदेश सहित और भी कई दस्तावेज इस पूरे मामले में परत दर परत सामने आ रहे हैं।


सटई रोड अतिक्रमण के बाद गरमाया मुद्दा
प्रशासन एवं नगर पालिका की संयुक्त टीम द्वारा विगत दिनों सटई रोड पर अतिक्रमण हटाओ महिम चलाई गई जिसका काफी विरोध हुआ और इसी अतिक्रमण विरोधी मुहिम के बाद अचानक शहर में लोक निर्माण विभाग की जिन संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं उनका मामला अचानक से गरम हो गया। सिटी कोतवाली के पास बालाजी मंदिर के सामने लोक निर्माण विभाग के भवन पर मालिकाना हक एवं रजिस्ट्री को लेकर खबरें सुर्खियों में आई जिसके बाद प्रशासन द्वारा अब इस पूरे मामले को जांच में लिया गया है। जांच उपरांत देखने लायक यह है कि क्या सिर्फ लोक निर्माण विभाग की एक संपत्ति पर प्रशासन नजर जमाती है या फिर अन्य भवन और संपत्तियों को भी अतिक्रमण मुक्त करा पाएगी।
कलेक्टर के आदेश पर शुरू हुई जांच
जिला कलेक्टर के आदेश पर जांच तो शुरू हो गई है और एसडीएम अखिल राठौर द्वारा अपने राजस्व अमले के साथ मिलकर बारीकी से इस प्रकरण के हर पहलू को समझा जा रहा है और दस्तावेजों को एकत्रित किया जा रहा है। एसडीएम अखिल राठौर द्वारा गुरुवार को नगर पालिका में दस्तावेजों का अवलोकन किया गया, इस दौरान उन्होंने यह स्वीकार किया है कि इस मामले में नगर पालिका ने दस्तावेजों में कहीं ना कहीं हेर फेर किया है हालांकि यह जांच का विषय है और जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी जांच उपरांत हो जाएगा।
नियम अनुसार की थी रजिस्ट्री: कंसू लाल
लोक निर्माण विभाग के भवन की रजिस्ट्री के मामले में तत्कालीन उप पंजीयक कंसू लाल अहिरवार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उक्त रजिस्ट्री उनके द्वारा की गई है लेकिन रजिस्ट्री की कुछ नियम और गाइडलाइन होते हैं जब तक क्रेता और विक्रेता उन नियमों पर खरा न उतरे तब तक रजिस्ट्री नहीं की जाती है, इस पूरे मामले में हाई कोर्ट का आदेश होने के साथ नगर पालिका द्वारा जो दस्तावेज प्राप्त हुए थे उस आधार पर रजिस्ट्री की गई थी। अब अगर इस मामले में कोई भी विवाद उत्पन्न होता है तो प्रशासन मामले की जांच कर किसके द्वारा कहां क्या लापरवाही की गई है या फिर कूट रचित दस्तावेज बनाए गए हैं यह जांच का विषय है, उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए, इसके अलावा हाई कोर्ट द्वारा जो आदेश जारी किया गया है उसका भी अवलोकन कर एक बार फिर हाई कोर्ट की शरण में जाना उचित होगा ताकि मामला स्पष्ट हो सके।

















