डॉ०घनश्याम भारती को निर्मल साहित्य अलंकरण-2025 से नवाजा गया

सागर शहर की साहित्यिक संस्था श्यामलम् ने हिंदी भाषा में उल्लेखनीय सृजन हेतु किया सम्मानित
सागर@चौधरी शशि कुमार कुर्मी। शासकीय महाविद्यालय शाहपुर के प्राचार्य एवं सागर शहर के हिंदी के जाने-माने रचनाकार, समीक्षक डॉ०घनश्याम भारती को हिंदी दिवस के अवसर पर शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर के सभागार में सागर शहर की साहित्यिक- सांस्कृतिक संस्था श्यामलम् द्वारा निर्मल साहित्य अलंकरण-2025 से सम्मानित किया गया। डॉ०भारती को यह सम्मान श्यामलम् के अध्यक्ष उमाकांत मिश्र, सचिव कपिल बैसाखिया, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति डॉ०अजय तिवारी, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ०चंचला दवे तथा डॉ० नलिन जैन द्वारा 2100 रू० की सम्मान निधि, शाॅल, श्रीफल, कलम तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

डॉ०भारती के सम्मान पत्र का वाचन डॉ०नलिन जैन ने किया तथा जीवन परिचय का वाचन श्री मुकेश तिवारी ने किया। डॉ० भारती को यह सम्मान हिंदी भाषा में उनके उल्लेखनीय सृजन हेतु दिया गया है। डॉ० घनश्याम भारती ने हिंदी भाषा में लगभग तीन दर्जन पुस्तक लिखीं एवं संपादित की हैं। हिंदी भाषा में रामकथा विषयक् उनकी छह पुस्तकें देश-विदेश में रामकथा का प्रचार-प्रसार कर रही हैं।

हाल ही में नई दिल्ली से हिंदी भाषा में प्रकाशित उनका ग्रंथ हिंदी साहित्य का इतिहास स्नातक एवं स्नातकोत्तर (हिंदी) के विद्यार्थियों को साहित्य के इतिहास का ज्ञान कराने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इनके अलावा स्त्री-विमर्श, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, लोक-संस्कृति, कोरोना, मीडिया आदि मुद्दों पर डॉ० भारती की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं। हिंदी भाषा में सृष्टि पत्रिका के 13 अंकों का संपादन भी डॉ०भारती द्वारा किया जा चुका है। विदेश में हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार हेतु हिंदी भाषा में जर्मनी से प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका मौन गूॅंज का संपादन भी डॉ० घनश्याम भारती के द्वारा किया गया है।

सम्मान समारोह का संचालन प्रोफेसर अमर जैन ने किया। आभार डॉ०अंजना चतुर्वेदी ने व्यक्त किया। समारोह में नगर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ०गजाधर सागर, डॉ०शरद सिंह, डॉ० पिंपलापुरे, डॉ० नलिन जैन, डॉ० अनिल जैन, अरुण दुबे, सुश्री संध्या सर्वटे, आर०के० तिवारी, टीकाराम त्रिपाठी,अंबिका यादव, प्रदीप पांडेय, निरंजना जैन के साथ शहर की विभिन्न साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के अध्यक्ष उपस्थित थे।




