छतरपुर

पं. गणेश प्रसाद मिश्र स्मृति व्याख्यान माला छतरपुर में 28 दिसंबर रविवार को, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक व ओजस्वी वक्ता अश्विनी उपाध्याय जी होंगे प्रमुख वक्ता

@छतरपुर- आशुतोष द्विवेदी। पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा छतरपुर में आयोजित नवम् व्याख्यान माला में इस वर्ष “राष्ट्रीय सुरक्षा” विषय पर व्याख्यानमें अश्विनी उपाध्याय जी रहेंगे।उनका आमंत्रण निश्चित रूप से इस आयोजन को वैचारिक गहराई, संवैधानिक दृष्टि और राष्ट्रीय चेतना से समृद्ध करेगा। उनका अनुभव, ज्ञान और विचार इस क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों एवं युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध होगा।

अश्विनी उपाध्याय : जीवन परिचय
अश्विनी कुमार उपाध्याय भारत के एक प्रख्यात अधिवक्ता, सामाजिक चिंतक, राष्ट्रवादी विचारक एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं और देशहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण संवैधानिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

शैक्षणिक एवं विधिक पृष्ठभूमि:
अश्विनी उपाध्याय ने विधि (कानून) के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की और प्रारंभ से ही भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था, राष्ट्रीय एकता एवं सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन किया। एक अधिवक्ता के रूप में उन्होंने जनहित याचिकाओं (PILs) के माध्यम से न्यायपालिका के समक्ष कई ऐतिहासिक और राष्ट्रव्यापी महत्व के विषय उठाए।

सार्वजनिक एवं राष्ट्रीय योगदान:
अश्विनी उपाध्याय को विशेष रूप से निम्न मुद्दों पर उनके प्रयासों के लिए जाना जाता है—
• राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता
• एक राष्ट्र, एक चुनाव
• समान नागरिक संहिता
• राजनीति के अपराधीकरण के विरुद्ध अभियान
• चुनावी सुधार
• भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई
• राष्ट्रवादी एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में दायर अनेक याचिकाओं के माध्यम से देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया को दिशा देने का कार्य किया है, जिनका प्रभाव विधायी और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

विचारधारा और वक्तृत्व:
अश्विनी उपाध्याय एक प्रभावशाली वक्ता हैं। उनके व्याख्यानों में—
• संविधान की मूल भावना
• राष्ट्र की सुरक्षा चुनौतियाँ
• वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका
• नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रनिर्माण
जैसे विषय अत्यंत तार्किक, तथ्यपरक और प्रेरक शैली में प्रस्तुत होते हैं। वे युवाओं, बुद्धिजीवियों और नीति-निर्माताओं के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेष दृष्टिकोण
राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर उनका दृष्टिकोण केवल सैन्य या सीमित रणनीतिक दायरे तक नहीं, बल्कि—
• आंतरिक सुरक्षा
• कानूनी ढांचे की मजबूती
• संवैधानिक अनुशासन
• सशक्त नागरिक समाज

तक विस्तृत है। वे मानते हैं कि एक मजबूत राष्ट्र की नींव सशक्त कानून, जागरूक नागरिक और सुशासन पर टिकी होती है।

Related Articles

Back to top button