छतरपुर

जेल में खूनी संघर्ष, पत्थरबाजी में कैदी गंभीर रूप से घायल, सुरक्षा पर खड़े हुए कई सवाल

@छतरपुर-आशुतोष द्विवेदी। जिला जेल में हुई यह घटना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। जहां सुरक्षा के बड़े- बड़े दाबे फेल साबित हो रहे हैं जेल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर पत्थरबाजी होना और एक कैदी का गंभीर रूप से घायल होना, सीधे-सीधे जेल प्रशासन की विफलता को उजागर करता है। यह पहला मामला नहीं हैं जहां ख़ूनी संघर्ष हुआ हैं इसके पूर्व भी छतरपुर की जिला जेल सहित जिले की उप जेलों सहित प्रदेश की अन्य जेलों से भी इस तरह की घटनाएं सामने आ जाती हैं। जो सरकार द्वारा किए जा रहे सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों को खोखला साबित कर देते हैं।

सरकार और जेल प्रशासन को इससे सचेत हो जाना चाहिए की जहां परिंदा पर नहीं मार सकता, वहां पत्थर कैसे पहुंचा? यह सवाल केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। बिना अंदरूनी मिलीभगत के ऐसी घटना संभव नहीं है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर साजिश का संकेत देती है। जेल में बंद व्यक्ति भी कानून के दायरे में है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

इनका कहना-
मैं मांग करता हूँ कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। ऐसी घटनाओं पर चुप्पी स्वीकार नहीं की जा सकती। कांग्रेस पार्टी और मैं स्वयं अन्याय, अव्यवस्था और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाते रहेंगे।
अनीस ख़ान- प्रदेश सचिव, कांग्रेस

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