खजुराहो

ईमानदार सांसद और विधायक के क्षेत्र में ठेके पर हो रहे में आयोजन, सामाजिक संस्थाओं की बल्ले बल्ले, संस्कृति विभाग के भ्रष्टाचार की आने लगी बू?

@खजुराहो- आशुतोष द्विवेदी। इन दिनों विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो में ठेके पर हो रहे आयोजनों के लिए सबसे ज्यादा हाइलाइटेड है, हों भी क्यों नहीं क्योंकि खजुराहो में इन दिनों “खजुराहो कार्निवाल” का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कहा जा रहा है कि यह पूरी तरह से कृषि अनुसंधान केंद्र और सामाजिक संस्था के माध्यम से आयोजित है, वही रविवार 22 फरवरी को हाफ मैराथन का आयोजन हुआ जिसको भी एक मैनेजमेंट ग्रुप तथा कुछ सामाजिक संस्थाओं के द्वारा आयोजित किया गया जबकि आयोजन मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड का था, दोनों में ही गोल-मोल तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों गण मननागरिकों की अपेक्षा तथा मीडिया से किनारा कुछ ना कुछ दाल में काला नजर आ रहा है जिसको लेकर भ्रर्ष्टाचार की जमकर बू आ रही हैं उसी का नतीजा था की संस्कृति मंत्री की उपस्थिति में जनता नें गो बैक के नारे तक लगा डाले।

खजुराहो कार्निवल जो की 18 से 26 तारीख तक आयोजित है जिसका विद्यवत उद्घाटन 20 फरवरी को मध्य प्रदेश शासन में पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी, खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं क्षेत्रीय विधायक अरविंद पटेरिया के द्वारा किया गया था जिसमें पर्यटन विभाग से शिवसेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी गण भी मौजूद रहे। लेकिन सवाल यहां यह उठता है की 18 तारीख से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में लोगों का रुझान आखिर क्यों नहीं है, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से समाचार पत्रों एवं विभिन्न चैनलो से प्रसारित ना किया जाना पोस्टर बैनर या अन्य संचार माध्यमों के द्वारा लोगों को कार्यक्रम से संबंधित जानकारी ना देना फीस वार्ता के नाम पर चार-पांच पत्रकारों के साथ प्रेस वार्ता और मीडिया को इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बनाए रखना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है !

प्रेस वार्ता के माध्यम से आयोजन प्रमुख मनोज गुप्ता द्वारा जानकारी प्रदान की गई थी कि कार्यक्रम में आने वाले 500 से अधिक कलाकारों को यहां उनके रुकने खाने-पीने ट्रांसपोर्ट एवं आने जाने की संपूर्ण व्यवस्थाएं की जा रही हैं वही जब राजस्थान से आई एक कलाकार से पूछा गया तो उनका साफ कहना था कि उन्हें किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दी गई वह अपने स्वयं के खर्चे पर आई हैं एवं रुकी है तथा खाने पीने की भी व्यवस्था उनके ही स्वयं के द्वारा की गई है।

वही सिर्फ ग्राम प्रांगण में क्राफ्ट बाजार को लेकर के भी विभिन्न अखबारों में एवं सोशल मीडिया के माध्यम से भारी भरकम राशि लेकर दुकान दिए जाने की बातें आई थी जिस पर स्थानीय व्यापारियों ने भी रोष व्यक्त किया गया था क्योंकि उन्हें यहां स्थान नहीं दिया गया, खजुराहो में आयोजन और खजुराहो के ही लोगों को व्यापारियों को इसका अगर लाभ नहीं मिल सकता तो ऐसे आयोजन का महत्व क्या है…?


प्रचार प्रसार को लेकर स्थानीय निवासी कल्याण सिंह ने बताया कि वह नगर परिषद में कार्यरत हैं और शिल्पग्राम से बिल्कुल लगा हुआ उनका ऑफिस है लेकिन उन्हें स्वयं पता नहीं था कि यहां क्या हो रहा है और किस तरह के कार्यक्रम है, सिर्फ एक कल्याण सिंह ही नहीं बल्कि अधिकांश लोग इस आयोजन से बेखबर हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों ने इस आयोजन को लेकर प्रश्न चिन्ह खड़े किए और कहा कि यह किस तरह का आयोजन है और इसमें होना क्या है कुल मिलाकर प्रचार प्रसार की कमी और आयोजन कर्ताओं का ईगो लेवल इतना ऊंचा है कि उन्हें मंच पर उपस्थित दूसरी पंक्ति के नेताओं को उद्घोषक द्वारा दो दो बार नाम लेकर स्वागत करने के लिए कहा गया इसके बावजूद भी स्वागत करना उन्होंने अपने लायक नहीं समझा।


कुछ लोगों ने नाम ना बताने की शर्त पर तो इतना भी कहा की आयोजन कह रहे हैं कि उनकी इतनी ऊंची सेटिंग है कि यहां के लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते ना ही नेता और ना ही पत्रकार, अब आप समझ सकते हैं कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से ऊपर लेकर लेवल तक किस तरह मैनेज है क्योंकि अगर मैनेज नहीं है तो बार-बार मीडिया के माध्यम से इस आयोजन को लेकर उठ रहे सवालों पर क्यों अधिकारी मौन साधे हुए हैं ।

खजुराहो में आयोजित हुई मैराथन का भी रहा यही आलम
पर्यटन नगरी खजुराहो में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के द्वारा हाफ मैराथन का आयोजन किया गया, इस आयोजन में आयोजकों के द्वारा ना ही क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित किया गया ना ही नगर के प्रथम नागरिक एवं नगर के गणमान्य जन तथा पत्रकारों को भी सूचना नहीं प्रदान की गई,जब उनसे इस संबंध में सवाल किए गए तो मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड की ज्वांइट डायरेक्टर एसपी श्रीवास्तव ने कहा की हमारे द्वारा सूचना प्रदान की गई है जो की पूर्णतः सत्य है क्योंकि विधायक महोदय से जब फोन पर पूछा गया तो उन्होंने इस आयोजन को लेकर अनभिज्ञता व्यक्त करते हुए उनके यहां उपस्थित होने के बावजूद भी कार्यक्रम के संबंध में जानकारी नाम मिलने को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की, स्थानीय पत्रकारों को तो बिल्कुल ही दरकिनार किया गया।

उक्त यह आयोजन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तक ही सीमित रहा तथा धरातल से दूर औपचारिकताओं के साथ अधिकारी भोपाल से आकर समाज सेवी संस्थाओं के सहारे अपना कार्यक्रम पूरा करके आयोजन की इति श्री करके यह कहते हुए भोपाल लौट गए की मैराथन से टूरिज्म प्रमोट होगा, अब पता नहीं किस तरह का प्रमोशन था यह तो भगवान जाने और आयोजक…?


कुल मिलाकर पर्यटन नगरी खजुराहो में इन दिनों सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है जनता के द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को यथोचित सम्मान न मिलाना, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों को हकीकत से भटकने के लिए नजर अंदाज करना और जिनके लिए आयोजन होते हैं वह देसी और विदेशी पर्यटकों के लिए पूरी तरह दूरी होना कहीं ना कहीं आयोजन आयोजकों के कार्य प्रणाली तथा सत्ता में बैठे लोगों पर कई सवाल खड़े करता है जिसको लेकर स्थानीय जनों में भी बड़ा रोष है ।

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