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सात्विकता से युक्त विकारमुक्त जीवन अपनाएं: सिद्धाश्रम रत्न अजय अवस्थी जी

@डेस्क न्यूज- आशुतोष द्विवेदी। भगवती मानव कल्याण संगठन के केंद्रीय महासचिव सिद्धाश्रम रत्न अजय अवस्थी जी नें अपने एक उद्बोधन में कहा कि नित्यप्रति चिंतन करें कि आज मुझसे कोई गलत कार्य तो नहीं हों गया हैं, मेरे कार्य-व्यवहार से किसी कों मानसिक क्लेश तो नहीं पहुंचा और यदि भूल से भी ऐसा हुआ हैं तो अपने कार्य-व्यवहार में सुधार लाने का प्रयास करें, अपनी गलती के प्रति प्रायश्चित का भाव आपके मन में होना चाहिए।

लोग कहते हैं कि हम रोजाना पूजा- पाठ करते हैं और हमें कोई लाभ नहीं मिल रहा हैं। तो क्या आप पूजा-पाठ के बाद का अपना पूरा समय सात्विकता से परिपूर्ण, विकारों से मुक्त जीवन जीते हैं? यदि ऐसा जीवन जी रहे होते, तो जीवन सामान्य होता और लाभ- हानि का विचार भी मन में नहीं आता।

परमपूज्य गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज नें तीन धाराओं का सृजन किया हैं। मानवता की सेवा के लिए भगवती मानव कल्याण संगठन, धर्म रक्षा के लिए पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम और राष्टरक्षा के लिए भारतीय शक्ति चेतना पार्टी। इन तीनो की विचाधारा बहुत व्यापक हैं और इन्ही धाराओं के माध्यम से समाज में परिवर्तन डाला जा रहा हैं, जिसके फलस्वरूप करोड़ों लोग आज नशे- मांसाहार से मुक्त चरित्रवान जीवन अंगीकार करके सुख- शांति- समृद्धि से परिपूर्ण जीवन प्राप्त करके कर्मपथ पर अग्रसर हैं।

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