बड़ी खबर: 900 फर्जी मार्कशीट के साथ बड़ा गिरोह पकड़ा, छतरपुर की श्री कृष्णा यूनिवर्सिटी की 103 फर्जी मार्कशीट भी पकड़ी गईं

मात्र 7 दिन में मिल जाती थी डिग्री! 14 नामी यूनिवर्सिटी में फैला था शैलेंद्र ओझा का ‘एजुकेशन सिंडिकेट
@उत्तरप्रदेश। प्रदेश के कानपुर में एक बड़ा फर्जी डिग्री और मार्कशीट गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा अभी जेल में है। वह घर बैठे ही नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की डिग्री और डिप्लोमा महज सात दिन में दिलाने का दावा करता था। यह धंधा कई सालों से चल रहा था, लेकिन कोई शिकायत नहीं आई, क्योंकि गिरोह ने बहुत चालाक तरीके से काम किया।

कैसे करता था काम फर्जी मार्कशीट गिरोह ?-
शैलेंद्र और उसके साथियों ने भरोसा बनाने के लिए एक अलग तरीका अपनाया था। डिग्री या मार्कशीट देने का वादा करने पर वे ग्राहक से पहले पूरी रकम नहीं लेते थे। काम पूरा होने के बाद ही नकद पैसे लेते थे। लेकिन भरोसे के लिए ग्राहक से पोस्ट डेटेड चेक ले लेते थे। यह चेक छात्र या उसके पिता के बैंक खाते से होता था। जब ग्राहक नकद पैसे दे देता, तो चेक वापस कर दिया जाता। ग्राहक भी इस शर्त पर राजी हो जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यह सिर्फ गारंटी है। पुलिस को शैलेंद्र के जूही गौशाला स्थित कार्यालय में छापे के दौरान कई पोस्ट डेटेड चेक मिले। इसी तरह शैलेंद्र भी विश्वविद्यालय के बाबुओं को लाखों रुपये के ब्लैंक चेक देता था और बाद में नकद पेमेंट करता था। इस तरीके से सबका भरोसा बना रहा और धंधा बिना रुके चलता रहा।
गिरोह का नेटवर्क में सबको मिली थी अलग-अलग जिम्मेदारियां-
इस गिरोह में हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। शैलेंद्र ने सभी को अलग-अलग यूनिवर्सिटी या बोर्ड का काम सौंप रखा था। किसी को पता नहीं था कि दूसरा कौन से बाबू से संपर्क में है। यह जानकारी सिर्फ शैलेंद्र को या संबंधित व्यक्ति को ही होती थी। इससे पुलिस को जांच में मुश्किल हुई।
पुलिस की कार्रवाई और एसआईटी जांच में 900 फर्जी मार्कशीट बरामद-
किदवई नगर पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। छापेमारी में 900 से ज्यादा फर्जी मार्कशीट, सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। शैलेंद्र समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। बाकी कुछ फरार हैं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने 14 सदस्यीय SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई है। यह टीम पांच हिस्सों में बंटकर जांच करेगी। टीम की अगुवाई एडीसीपी साउथ योगेश कुमार करेंगे। इसमें एक एसीपी, क्राइम ब्रांच के तीन इंस्पेक्टर, छह सब-इंस्पेक्टर और तीन सिपाही शामिल हैं। एसआईटी अब पूरे नेटवर्क, विश्वविद्यालयों के बाबुओं की मिलीभगत और फर्जी डिग्रियों से हुई नौकरियों की जांच करेगी।यह मामला शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को उजागर करता है।
यह कराते थे डिग्रियां उपलब्ध-
एलएलबी की डिग्री और बोर्ड से हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की मार्कशीट बनवाने का जिम्मा जोगेंद्र के पास था। अलीगढ़ स्थित मंगलायतन यूनिवर्सिटी से मनचाही डिग्री बनवाकर लाने का काम मयंक भारद्वाज करता था। मनीष फरीदाबाद स्थित लिंग्या यूनिवर्सिटी और विनीत हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी का काम देखता था। विनीत मंगलायतन यूनिवर्सिटी के भी संपर्क में था। छतरपुर की श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय का काम शुभम दुबे और गौतम संभालते थे। मणिपुर स्थित एशियन यूनिवर्सिटी से डिग्रियां और मार्कशीट उपलब्ध कराना सेखू उर्फ ताबिश के जिम्मे था। ईटानगर स्थित हिमालयन यूनिवर्सिटी की डिग्रियां नागेंद्र उपलब्ध कराने का काम करता था।

















