विधानसभा बजट सत्र: दिनांक- 18 मार्च 2025, उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल का विधानसभा में वक्तव्य
(लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सकों को पूर्व सेवा का लाभ एवं उनके वेतन सरंक्षण (पे-प्रोटेक्शन) का लाभ दिए जाने के विषय में)

भोपाल। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सरकार ने नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के सुचारू संचालन तथा प्रदेश के आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिए प्रदेश में योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में पदस्थ चिकित्सकों का शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चयन होने पर नवीन नियुक्ति में मूल वेतन का संरक्षण दिये जाने के नीतिगत निर्णय लिये हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि स्वशासी संस्था में यदि चिकित्सकों को नवीन पद के निर्धारित लेवल में न्यूनतम वेतन से अधिक वेतन प्राप्त है, तो राज्य शासन अंतर्गत सेवा में उपस्थित होने पर उनके मूल वेतन मात्र का संरक्षण किया जायेगा। चिकित्सकों की शासकीय सेवा में पदस्थापना होने पर वेतनमान/मेट्रिक्स लेवल संबंधित नवीन पद के अनुसार ही होगा।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि नये पद पर नियुक्ति के फलस्वरूप पुराने पद के मूल वेतन के बराबर के प्रक्रम में नये पद के वेतनमान/मेट्रिक्स लेवल में वेतन प्राप्त होगा। यदि पूर्व में आहरित वेतन का प्रक्रम, नवीन वेतनमान/मेट्रिक्स लेवल में नहीं है, तो वह नवीन वेतनमान / मेट्रिक्स लेवल में समकक्ष वेतन के ठीक निचले प्रक्रम पर वेतन निर्धारित कर अंतर की राशि व्यक्तिगत वेतन के रूप में देय होगी, जो कि आगामी वेतनवृद्धि में समायोजित होगी।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि नये पद पर नियुक्ति के फलस्वरूप पुराने पद में प्राप्त मूल वेतन यदि नये पद के वेतनमान/मेट्रिक्स लेवल में अधिकतम से भी अधिक है, तो नये पद हेतु निर्धारित वेतनमान/मेट्रिक्स लेवल के अधिकतम पर ही वेतन का निर्धारण होगा अर्थात अंतर की राशि व्यक्तिगत वेतन के रूप में देय नहीं होगी। वेतन वृद्धि की पात्रता, नवीन पद स्थापना के पद पर उपस्थिति दिनांक के पश्चात की गयी सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित होगी।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि NPS के अभिदाता को वर्तमान नियोजन में आवंटित PRAN नवीन पद पर भी निरंतर रहेगा। स्वशासीय संस्था में की गयी सेवा की गणना, नवीन सेवा के साथ नहीं की जाएगी। उक्त सेवा की गणना पेंशनरी दायित्व एवं समयमान/चयन वेतनमान/पदोन्नति / अवकाश की पात्रता आदि की गणना में मान्य नहीं होगी।

















