आध्यात्मिक

मेरे गुरुवर जैसा इस जगत में कोई नहीं: आशुतोष द्विवेदी

उनके श्री चरण कमलों की रज पाकर जीवन को मिलती हैं नई दिशा

डेस्क न्यूज। इंसान को जीवन में हमेशा सद मार्ग पर चलने की प्रेरणा हमेशा गुरु से ही मिलती हैं चाहे वह ज्ञान गुरु हो जिसने हमें बाल काल में शिक्षा का ज्ञान प्रदान किया या फिर आध्यात्मिक व कर्म गुरु हो उन्होंने जों ज्ञान हमें दिया वह हमेशा काम आता हैं लेकिन वह गुरु कैसा हैं इस पर निर्भर कर्ता हैं। लेकिन मेरे जीवन में मेरे ज्ञान गुरु से ज्यादा मेरे आध्यात्मिक गुरु सच्चिदानंद अवतार धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज नें जों परिवर्तन किया हैं वह अकल्पनीय हैं। इसी लिए मैं कहता हूं मेरे गुरुवर जैसा इस जगह में कोई नहीं।

आपको मैं बताना चाहता हूं की मेरे गुरुवर सच्चिदानंद अवतार धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज इस कलयुग में स्वयं सच्चिदानंद के अवतार हैं और उनके जैसा एक ऋषि योगी ना इस धरा पर कोई हुआ हैं। मैं गुरुवर की पावन नगरी पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम अपने विवाह उपरांत वर्ष 2016 से अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मंजू द्विवेदी जी जों की गुरुवर की पहले से दीक्षा प्राप्त शिष्या थी उनके साथ जाता रहा लेकिन मेरा संत महात्माओं पर कभी भरोसा नहीं रहा। लेकिन अपनी धर्मपत्नी की भावनाओं को देकते हुए मैंने आश्रम जाना नहीं छोड़ा और गुरुवर का आशीर्वाद लेता रहा।

लेकिन सच्चिदानंद अवतार धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज नें मेरे जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन 2018 में डाला जब परमपूज्य गुरुदेव भगवान की द्वितीय चरण की नशा मुक्ति जनजागरण परिवर्तन यात्रा सागर जिले के लिए जानी थी। गुरुवर की यात्रा तय थी लेकिन छतरपुर जिले के संगठन के लोगों नें यात्रा के ठहराव के लिए जों मैंरिज गार्डन तक किया था वह अचानक कैंसिल हो गया और केंद्रीय पदाधिकारी परम आदरणीय सिद्धाश्रम रत्न श्री सौरभ द्विवेदी जी एवं सिद्धाश्रम रत्न श्री आशीष शुक्ला जी नें मेरी धर्मपत्नी जों की आश्रम से पहले से जुडी थी उनसे ग्राउंड के लिए निर्देश दिए तो मेरी धर्मपत्नी मंजू द्विवेदी नें मुझे अवगत कराया और मैंने तत्काल धार्मिक आयोजन के लिए अपनी हैसियत अनुसार ग्राउंड की व्यवस्था केंद्रीय पदाधिकारियों को करवाई। और मेरा लगाव गुरुवर और गुरुवर की नशा मुक्ति जनजागरण परिवर्तन यात्रा और जुड़ता गया।

मैं यह नहीं समझ पाया की यह क्या हो रहा हैं मेरा लगाव इतना क्यों बढ़ता जा रहा हैं और जैसे जैसे यात्रा की तारीक नजदीक आती जा रही थी धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज मुझे अपनी ओर खीचते चले जा रहे थे। जब यात्रा सितंबर 2018 में छतरपुर जिले की सीमा में पहुंची तो मुझे गुरुवर की अपने जीवन की प्रथम नशा मुक्ति जनजागरण परिवर्तन यात्रा के स्वागत का सौभाग्य जिले के बमीठा में अपनी डेढ़ वर्ष की पुत्री शिवांगी द्विवेदी के साथ मिला और गुरुवर के चेहरे का वह तेज आशीर्वाद के हाथ मुझे गुरुवर के और नजदीक लेते चले गए। साथ ही गुरुमाता जी एवं शक्ति स्वरूपा बहिनों पूजा दीदी, संध्या दीदी और ज्योति दीदी के मुस्कुराते चेहरे मेरी बेटी को दुलार बात रहे थे वह दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्वयं मेरी बेटी को और मुझे माँ सरस्वती, माँ महालक्ष्मी व माँ महागौरी प्यार लूटा रही हो और ममता मई गुरुमाता जी नें ऐसा लग रहा था सारी सृष्टि को अपनी ओर खींच रखा हो। यात्रा जैसे जैसे छतरपुर जिला मुख्यालय के होटल लॉ केपिटल की ओर बढ़ रही थी वैसे वैसे गुरुवर मुझे अपनी ओर और तेजी से खीचते चले जा रहे थे यात्रा होटल लॉ केपिटल पहुंची और मुझे और मेरी धर्मपत्नी श्रीमती मंजू द्विवेदी, मेरी बेटी शिवांगी द्विवेदी को गुरुवर की सेवा का अवसर प्रदान हुआ।

धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की नशामुक्ति जनजागरण परिवर्तन यात्रा अगले दिवस जब सागर जिले के बंडा के लिए छतरपुर से प्रस्थान की तो उसके पहले केंद्रीय पदाधिकारी परम आदरणीय सिद्धारत्न माननीय श्री अजय अवस्थी जी का मेरे पाठ फोन आता हैं और कहते हैं कहा हो तो मैंने कहा की होटल के बाहर गुरुवर के दर्शन के लिए खड़ा हूं तो उन्होंने कहां गुरुवर नें बुलाया हैं। और मैं तत्काल कब गुरुवर के कमरे तक पहुंच गया पता ही नहीं चला। कमरे पर पहुंचने के बाद जब गुरुवर नें सा परिवार आने का निर्देश दिया तो मैं गुरुवर की पूर्व से दीक्षा प्राप्त अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मंजू द्विवेदी और पुत्री शिवांगी के साथ पहुंचा और गुरुवर के कमरे का जब दरवाजा खुला तो ऐसा लगा जैसे स्वयं सूर्य भगवान यहां प्रकट हो गए हो गुरुवर के चेहरे का वह तेज देखते ही बन रहा हैं और जैसे ही मैंने अपना मस्तक गुरुवर के श्री चरणों में रखा तो मुझे ऐसा लगा यही मेरे गुरु रूप में सच्चिदानंद के अवतार हैं और गुरुदेव भगवान में अपने ह्रदय में पूर्ण रूप से धारण कर मुझे फर्श से अर्श पर विठा दिया और मैंने पूर्ण समर्पित होकर 2019 में गुरुवर से दीक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाया। मेरे और मेरे परिवार पर गुरुवर के हमेशा ऋण रहेगा जिन्होंने हर मुश्किल के समय को हल्के में निकाल दिया यही आशा और उम्मीद में अपने गुरुवर धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज से कर्ता हूं की अपनी कृपा और ममता मुझपर और मेरी पत्नी मंजू, बेटी शिवांगी एवं बेटे शिवांश बनी रहे।

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